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जांच में पुलिसकर्मी व चिकित्सक पाए गए दोषी

Sat, 08 Jun 2019 11:20 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2019 11:20 PM IST
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जांच में पुलिसकर्मी व चिकित्सक पाए गए दोषी
चिकित्सक व पुलिस कर्मी दोषी, कार्रवाई होगी
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झांसी। पोस्टमार्टम हाउस में शव बदल जाने के मामले में जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी के निर्देश पर कराई गई जांच में पंचायतनामा भरने वाले पुलिसकर्मी व चिकित्सकों को दोषी ठहराया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट रामप्रकाश व सीएमओ डा. सुशील प्रकाश ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी है। जिलाधिकारी ने सभी दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शुक्रवार की शाम थाना एट के अमीठा गांव निवासी अरविंद का पुत्र राजकुमार (14), गजेेंद्र का पुत्र राहुल व जगदीश का पुत्र राहुल बाइक पर सवार होकर पंप से बोतल मेें पेट्रोल लेकर लौट रहे थे। एट में पावर हाउस के पास ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तीनों को उपचार के लिए जालौन के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने राजकुमार व राहुल की हालत नाजुक देखते हुए झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। शाम करीब सात बजे उपचार के दौरान राजकुमार ने दम तोेड़ दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया था।
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इधर, थाना मऊरानीपुर के कुरारा गांव निवासी मुकुंदी लाल का पुत्र उमेश (14) मजदूरी करता था। वर्तमान में वह थाना नवाबाद स्थित शिवाजी नगर में रहता था। शुक्रवार की रात वह हंसारी के पास अपने पिता मुकुंदी लाल के साथ काम से गया था। दोनों पैदल घर की तरफ लौैट रहे थे, तभी रात करीब 9 बजे हंसारी मोड़ पर पीछे से आ रही बोलेरो ने टक्कर मार दी थी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची थी, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। यहां भी पुलिस ने परिजनों को बुलाकर पंचनामा की कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया था।
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चूंकि, दोनों के पोस्टमार्टम सुबह होने थे, इसीलिए परिजन अपने-अपने शव रखवाकर चले गए थे। रात करीब 11 बजे मृतक उमेश के पिता ने एक जनप्रतिनिधि से रात में ही पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया। रात में ही उन्होंने जिलाधिकारी से बात की। जिलाधिकारी ने रात में पोस्टमार्टम कराने के निर्र्देश दिए। रात दो बजे चिकित्सक व परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पोस्टमार्टम प्रक्रिया हुई। इसके बाद शव लेकर परिजन रात में घर आ गए। सुबह करीब आठ बजे परिजनों ने अंतिम संस्कार भी कर दिया।
इधर, मृतक राजकुमार के परिजन पोस्टमार्टम प्रक्रिया करानेे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां राजकुमार का शव नदारद देखकर घबरा गए। खबर मिलते ही कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। गुस्साए परिजनोें ने हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों के तेवर देखकर कर्मचारी घबरा गए। सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक देहात राहुल मिठास, सीओ सिटी जितेेंद्र सिंह परिहार, कोंच सीओ शीसराम सिंह, कोतवाल संजय सिंह, नवाबाद प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार, प्रेमनगर प्रभारी निरीक्षक रविंद नाथ यादव, नदीगांव थानाध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा, कैलिया थाना प्रभारी लखन सिंह समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्र का फोर्र्स मौके पर पहुंचा। मृतक के परिजनोें को समझाने का दौर शुरू हुआ, लेकिन परिजन मानने को तैयार नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने उमेश के परिजनों को पुन: दूसरे शव की पहचान के लिए पोस्टमार्टम हाउस बुलाया।
दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उमेश के दादा मातादीन, पिता मुकुंदीलाल व मां मीरा समेत रिश्तेदार पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां पहले तो परिजनों ने शव पहचानने से इंकार कर दिया। पुलिस ने उनको दोबारा पहचान करने को कहा। 15 मिनट बाद मां ने पहचान के बाद पुत्र उमेश को पहचान लिया। यह सुनकर मृतक राजकुमार के परिजन बिफर गए। किसी तरह पुलिस ने उनको कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
कई घंटे की पड़ताल के बाद पता चला कि उमेश की मौत होेने की खबर सुनकर पिता मुकुंदी लाल सदमे मेें आ गए थे। वे घबराहट में उमेश के स्थान पर राजकुमार का शव उठाकर पोस्टमार्टम कराने के बाद ले गए। घर पहुंचकर न तो मां और न ही पिता ने चेहरा देखा। घर का माहौल बिगड़ता देख आनन-फानन में पिता व रिश्तेदारों ने सुबह आठ बजे करीब अंतिम संस्कार कर दिया। घर आकर सभी एक-दूसरे को सांत्वना देने में जुटे थे, तभी एकाएक पुलिस घर पहुंची। जहां पता चला कि वे दूसरे मृतक का शव पोस्टमार्टम हाउस से अपने साथ ले आए हैं।

जिगर के टुकड़े का नहीं कर सके अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम हाउस में रखे दोेनों शवों को पहचानने में उमेश के परिजन धोखा खा गए। मृतक राजकुमार व उमेश एक ही उम्र होने के साथ एक ही कद काठी के थे, जिस कारण उमेश के पिता ने धोखे में राजकुमार का शव अपने साथ ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया। राजकुमार के परिजनों में पुत्र का अंतिम संस्कार न कर पाने का गुस्सा भी नजर आया।

जालौन से बुलाया था फोर्स
बड़ागांव में र्हुई घटना के बाद पुलिस सतर्क नजर आई। मामले की नजाकत भांपते हुए अधिकारियों ने जालौैन पुलिस मंगा ली थी, जो देर शाम पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमा रही। मामला न बिगड़े, इसके लिए अपर पुलिस अधीक्षक राहुल मिठास थानेदारों के साथ मृतकों के परिजनों को सांत्वना देते रहे।

व्हाट्सएप से भी कराई थी पहचान
दोपहर में शव गायब होने की सूचना के बाद गहमागहमी का माहौल पैदा हो गया था। मृतक राजकुमार के परिजन मानने को तैयार नहीं थे। वहीं, मृतक उमेश के परिजनोें को मऊरानीपुर से आने में देरी हो रही थी, जिस कारण पुलिस ने पहचान कराने के लिए व्हाट्सएप पर उमेश की फाइल फोटो भी मंगाकर पहचान कराने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी। इसके बाद मौके पर पहुंचे परिजनों ने पहचान की, जिसके बाद ही सभी ने राहत की सांस ली।


नेताओं ने भी की कार्रवाई की मांग
पूर्र्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य अपने समर्थकों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां दोेनों मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर पुलिस अधिकारियों से वार्ता की। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम हाउस से शव किसी दूसरे के पास चले जाना गंभीर विषय है। इसमें कहीं न कहीं पुलिस व कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करना जरूरी है। उनके साथ विवेक बाजपेई, विनोद वर्मा, शाहिद खान, पंकज मिश्रा, विनय उपाध्याय मौजूद रहे। वहीं, विश्व हिंदू परिषद के अंचल अड़जरिया ने भी पुलिस अधिकारियों से दोषियों पर कार्रर्वाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यह बड़ी लापरवाही है। पोस्टमार्टम हाउस में लापरवाही होनी ही नहीं चाहिए। उन्होंने परिजनों को नवाबाद थाने ले जाकर एफआईआर दर्ज कराई।
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