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रेंग रही ई-टेंडर योजना
ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2016 01:04 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पूर्व घोषित ई-टेंडर योजना रेंग रही है। जबकि, इसकी घोषणा हुए कई महीने बीत चुके हैं। अभी दो महीने का समय और लग सकता है।
गौरतलब है कि परचेज कमेटी पर टेंडर प्रक्रिया में लगातार अनियमितताएं बरतने के आरोप लगने के बाद पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने ऑनलाइन टेंडर कराने की योजना बनाई थी और बाद में परचेज कमेटी से भी कुछ सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
ऑनलाइन टेंडर के लिए कमेटी गठित करने में थोड़ी चूक हो गई और सभी तीन सदस्यों को नोडल अधिकारी बना दिया गया। बाद में कमेटी में पुन: फेरबदल करके एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर दो अन्य को शामिल किया गया। ई-टेंडर की घोषणा हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।
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सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े रहे कुछ लोग चाहते भी नहीं हैं कि ई-टेंडर योजना प्रभावी हो, इससे उनकी दुकानें बंद हो जाएंगी। हालांकि, ई-टेंडर को गठित कमेटी के सदस्यों का कहना है कि यूपीईएलसी को कमेटी सदस्यों के डिजिटल साइन बनने के लिए भेज दिए गए हैं।
इसको बनकर आने में एक माह का समय लग सकता है। इसके बार बीयू का एक एकाउंट बनाया जाएगा। बीयू में जल्द ही सभी निविदाओं के ऑनलाइन आवेदन ही लिए जाएंगे।
यह होगा फायदा
ई-टेंडर प्रक्रिया होने के बाद देश के किसी भी हिस्से से फर्म ऑनलाइन आवेदन कर सकेगी। टेंडर खुलने के बाद ऑनलाइन ही फर्मों द्वारा डाले गए रेट सभी देख सकेंगे, इससे कोई छेड़छाड़ भी नहीं कर सकेगा। न्यूनतम दर वाली फर्म को टेंडर दे दिया जाएगा। प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी।
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गौरतलब है कि परचेज कमेटी पर टेंडर प्रक्रिया में लगातार अनियमितताएं बरतने के आरोप लगने के बाद पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने ऑनलाइन टेंडर कराने की योजना बनाई थी और बाद में परचेज कमेटी से भी कुछ सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
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ऑनलाइन टेंडर के लिए कमेटी गठित करने में थोड़ी चूक हो गई और सभी तीन सदस्यों को नोडल अधिकारी बना दिया गया। बाद में कमेटी में पुन: फेरबदल करके एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर दो अन्य को शामिल किया गया। ई-टेंडर की घोषणा हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।
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सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े रहे कुछ लोग चाहते भी नहीं हैं कि ई-टेंडर योजना प्रभावी हो, इससे उनकी दुकानें बंद हो जाएंगी। हालांकि, ई-टेंडर को गठित कमेटी के सदस्यों का कहना है कि यूपीईएलसी को कमेटी सदस्यों के डिजिटल साइन बनने के लिए भेज दिए गए हैं।
इसको बनकर आने में एक माह का समय लग सकता है। इसके बार बीयू का एक एकाउंट बनाया जाएगा। बीयू में जल्द ही सभी निविदाओं के ऑनलाइन आवेदन ही लिए जाएंगे।
यह होगा फायदा
ई-टेंडर प्रक्रिया होने के बाद देश के किसी भी हिस्से से फर्म ऑनलाइन आवेदन कर सकेगी। टेंडर खुलने के बाद ऑनलाइन ही फर्मों द्वारा डाले गए रेट सभी देख सकेंगे, इससे कोई छेड़छाड़ भी नहीं कर सकेगा। न्यूनतम दर वाली फर्म को टेंडर दे दिया जाएगा। प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी।