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कोविड को मात देने के लिए ड्यूटी पर डटी रहीं योद्धा, नहीं गईं घर, ऑनलाइन और डाक से भेजा रक्षा सूत्र
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Corona warrier done duty to defeat work duty
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। कोरोना वायरस का यह दौर तीज-त्योहारों पर भी भारी पड़ रहा है। बीमारी से लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहीं महिला डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ इस बार राखी के त्योहार पर आपने घर नहीं जा सकीं। कइयों का घर तो शहर से बाहर था लेकिन कुछ का घर झांसी में ही होने के बावजूद सुरक्षा की दृष्टि से वह घर नहीं गईं। कुछ ने डाक तो कुछ ने ऑनलाइन राखी घर पर भिजवा दीड्ड। फिर वीडियो कॉलिंग कर भाइयों की लंबी उम्र की दुआ मांगी। अमर उजाला ने मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ऐसी ही कोरोना योद्धाओं को सलाम करते हुए उनसे बात की। पेश है ये रिपोर्ट।
इस बार रक्षाबंधन हम घर पर नहीं मना पाए लेकिन कोरोना महामारी में मरीजों की सेवा करने की वजह से संतुष्ट हैं। - डॉ. शिवांगी चौधरी, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
रक्षाबंधन पर भाई और परिवार वालों की काफी याद तो आई लेकिन ड्यूटी जरूरी है। इस कारण ऑनलाइन राखी भेज दी। - डॉ. नेहा सिंह, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
हर मरीज किसी न किसी का भाई है। ऐसे में इस रक्षाबंधन पर अपने घर नहीं गई। ड्यूटी कर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हूं। - डॉ. दिव्या पांडेय, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
घर जाकर भाई को राखी नहीं बांध पाने का दुख जरूर है। मगर कोरोना महामारी के दौर में कर्तव्यनिष्ठा मेरे लिए सर्वोपरी है। - डॉ. नीलम सिंह, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
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हम सब कोरोना से जंग में सिपाही की भूमिका में हैं। इसलिए अस्पताल में रहना जरूरी है। इस कारण रक्षाबंधन पर घर नहीं गई। - डॉ. शीना मनचंदा, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
कोरोना दौर में चार माह से ड्यूटी कर रही हूं। रक्षाबंधन पर घरवालों की याद और ज्यादा आई तो मरीजों के साथ पर्व मना लिया। - डॉ. वंशिका खन्ना, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
रक्षाबंधन तो हर साल घर पर जाकर धूमधाम से मनाती हूं लेकिन इस बार अस्पताल में मेरी ज्यादा जरूरत थी तो घर नहीं गईं। - डॉ. रोमिल गुप्ता, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
मौजूदा परिस्थितियों में डॉक्टर की जिम्मेदारी परिवार से ज्यादा समाज के प्रति है। इसलिए इस रक्षाबंधन घर नहीं गई। - डॉ. साम्या सिंह, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
मेरे तीन भाई हैं। तीन महीनों से घर नहीं गई तो वो भी इंतजार में थे कि रक्षाबंधन पर आऊंगी पर इस महामारी में ड्यूटी सर्वोपरी है। - डॉ. अमीषा गर्ग, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
दो भाइयों के बीच मैं इकलौती बहन हूं। ये पहला रक्षाबंधन है, जो मैंने घर से दूर रहकर मनाया। ऑनलाइन ही राखी भेज दी थी। - डॉ. नीति, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
कोविड आईसीयू में ड्यूटी लगी हुई है। इस कारण रक्षाबंधन पर घर नहीं गई। ऑनलाइन ही राखी भेज दी। - रोजलीन पोलॉक, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
उरई की रहने वाली हूं। भाइयों को राखी बांधने जाना था लेकिन नहीं गईं। कहा दिया कि अभी मुझे ड्यूटी करना जरूरी है। - रीमा, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
हर साल हमीरपुर जाकर भाई को राखी बांधती रही हूं। इस साल नहीं जा सकीं लेकिन इसका कोई मलाल नहीं है। - शकुंतला गुप्ता, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
इटावा की रहने वाली हूं। भाइयों को वीडियो कॉल कर राखी दिखाकर बांध दी। पहली बार ऐसा हुआ पर ड्यूटी जरूरी है। - दीपिका सक्सेना, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी लगी है। केरल में घर होने की वजह से इस रक्षाबंधन नहीं जा पाई। ऑनलाइन राखी भेज दी थी। - वर्षा गुप्ता, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
ड्यूटी के बाद होटल में ही क्वारंटीन रहना पड़ रहा है। प्रेमनगर में घर होने के बावजूद रक्षाबंधन पर नहीं गईं। डाक से राखी भिजवा दी। - रितु शर्मा, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
कानपुर में घर है। रक्षाबंधन पर घर नहीं जा पाई। ऑनलाइन ही राखी भेज दी। वीडियो कॉल कर भाई की लंबी उम्र की कामना कर ली। - बीना खरे, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
कोविड अस्पताल के वार्ड दो में ड्यूटी लगी है। जालौन में घर है लेकिन रक्षाबंधन पर नहीं जा पाई। इस समय ड्यूटी पर्व से ज्यादा जरूरी है। - दीक्षा पाल, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
कोविड आईसीयू में अपनी सेवाएं दे रही हूं। हर बार रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधती थी लेकिन इस बार डाक से भेजनी पड़ी। - शैलेंद्री, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
लंबे समय से घर नहीं गई थी। परिजन सोच रहे थे कि राखी पर आऊंगी। घर न जा पाने का दुख तो है पर मरीजों की सेवा सर्वोपरी। - संध्या पटेल, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
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इस बार रक्षाबंधन हम घर पर नहीं मना पाए लेकिन कोरोना महामारी में मरीजों की सेवा करने की वजह से संतुष्ट हैं। - डॉ. शिवांगी चौधरी, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
रक्षाबंधन पर भाई और परिवार वालों की काफी याद तो आई लेकिन ड्यूटी जरूरी है। इस कारण ऑनलाइन राखी भेज दी। - डॉ. नेहा सिंह, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
हर मरीज किसी न किसी का भाई है। ऐसे में इस रक्षाबंधन पर अपने घर नहीं गई। ड्यूटी कर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हूं। - डॉ. दिव्या पांडेय, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
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घर जाकर भाई को राखी नहीं बांध पाने का दुख जरूर है। मगर कोरोना महामारी के दौर में कर्तव्यनिष्ठा मेरे लिए सर्वोपरी है। - डॉ. नीलम सिंह, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
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हम सब कोरोना से जंग में सिपाही की भूमिका में हैं। इसलिए अस्पताल में रहना जरूरी है। इस कारण रक्षाबंधन पर घर नहीं गई। - डॉ. शीना मनचंदा, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
कोरोना दौर में चार माह से ड्यूटी कर रही हूं। रक्षाबंधन पर घरवालों की याद और ज्यादा आई तो मरीजों के साथ पर्व मना लिया। - डॉ. वंशिका खन्ना, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
रक्षाबंधन तो हर साल घर पर जाकर धूमधाम से मनाती हूं लेकिन इस बार अस्पताल में मेरी ज्यादा जरूरत थी तो घर नहीं गईं। - डॉ. रोमिल गुप्ता, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
मौजूदा परिस्थितियों में डॉक्टर की जिम्मेदारी परिवार से ज्यादा समाज के प्रति है। इसलिए इस रक्षाबंधन घर नहीं गई। - डॉ. साम्या सिंह, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
मेरे तीन भाई हैं। तीन महीनों से घर नहीं गई तो वो भी इंतजार में थे कि रक्षाबंधन पर आऊंगी पर इस महामारी में ड्यूटी सर्वोपरी है। - डॉ. अमीषा गर्ग, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
दो भाइयों के बीच मैं इकलौती बहन हूं। ये पहला रक्षाबंधन है, जो मैंने घर से दूर रहकर मनाया। ऑनलाइन ही राखी भेज दी थी। - डॉ. नीति, जेआर, मेडिकल कॉलेज।
कोविड आईसीयू में ड्यूटी लगी हुई है। इस कारण रक्षाबंधन पर घर नहीं गई। ऑनलाइन ही राखी भेज दी। - रोजलीन पोलॉक, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
उरई की रहने वाली हूं। भाइयों को राखी बांधने जाना था लेकिन नहीं गईं। कहा दिया कि अभी मुझे ड्यूटी करना जरूरी है। - रीमा, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
हर साल हमीरपुर जाकर भाई को राखी बांधती रही हूं। इस साल नहीं जा सकीं लेकिन इसका कोई मलाल नहीं है। - शकुंतला गुप्ता, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
इटावा की रहने वाली हूं। भाइयों को वीडियो कॉल कर राखी दिखाकर बांध दी। पहली बार ऐसा हुआ पर ड्यूटी जरूरी है। - दीपिका सक्सेना, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी लगी है। केरल में घर होने की वजह से इस रक्षाबंधन नहीं जा पाई। ऑनलाइन राखी भेज दी थी। - वर्षा गुप्ता, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल।
ड्यूटी के बाद होटल में ही क्वारंटीन रहना पड़ रहा है। प्रेमनगर में घर होने के बावजूद रक्षाबंधन पर नहीं गईं। डाक से राखी भिजवा दी। - रितु शर्मा, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
कानपुर में घर है। रक्षाबंधन पर घर नहीं जा पाई। ऑनलाइन ही राखी भेज दी। वीडियो कॉल कर भाई की लंबी उम्र की कामना कर ली। - बीना खरे, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
कोविड अस्पताल के वार्ड दो में ड्यूटी लगी है। जालौन में घर है लेकिन रक्षाबंधन पर नहीं जा पाई। इस समय ड्यूटी पर्व से ज्यादा जरूरी है। - दीक्षा पाल, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
कोविड आईसीयू में अपनी सेवाएं दे रही हूं। हर बार रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधती थी लेकिन इस बार डाक से भेजनी पड़ी। - शैलेंद्री, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।
लंबे समय से घर नहीं गई थी। परिजन सोच रहे थे कि राखी पर आऊंगी। घर न जा पाने का दुख तो है पर मरीजों की सेवा सर्वोपरी। - संध्या पटेल, स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज।