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कोरोना से मौत हुई लेकिन साबित कैसे करेंगे, मृत्यु प्रमाण पत्र में तो जिक्र ही नहीं

Mon, 07 Jun 2021 12:55 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 12:55 AM IST
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corona se mot hui lekin savit kaise karenge. deth cirtifecet me to jikr tk nhi
प्रमाणपत्र में मौत होने का जिक्र तक नहीं हुई है।
कोरोना से मौत हुई लेकिन साबित कैसे करेंगे, मृत्यु प्रमाण पत्र में तो जिक्र ही नहीं
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झांसी। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने ज्यादातर परिवारों को प्रभावित किया है। इस स्थिति में केंद्र और प्रदेश सरकार भी लोगों की मदद को आगे आई है। आर्थिक मदद के साथ-साथ तमाम योजनाओं का ऐलान कर लोगों के जख्मों पर काफी हद तक मरहम लगाने का प्रयास किया है। मगर मृत्यु प्रमाणपत्र में कोरोना से मौत नहीं लिखी होने की वजह से लोगों को योजनाओं का लाभ लेने में काफी दिक्कत आ रही है। नगर निगम में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंच रहे लोग इसे लेकर कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं। वहीं, अफसरों का कहना है कि मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु के कारण का कोई कॉलम ही नहीं है तो फिर कोरोना से मौत कैसे लिख दें।
महामारी में जान गंवाने वाले परिजनों को सरकार आर्थिक मदद का एलान कर चुकी हैं। वहीं, अनाथ हुए बच्चों को भी मुआवजा देने की घोषणा की गई है। हालांकि, कई राज्यों में जारी किए जा रहे मृत्यु प्रमाणपत्रों पर मौत की वजह कोरोना नहीं लिखी जा रही। ऐसे में पीड़ित परेशान हैं कि उन्हें मुआवजा कैसे मिलेगा? झांसी जिले में रहने वाले कई कोरोना से प्रभावित परिवार के लोग भी मृत्यु प्रमाणपत्र में मरने का कारण नहीं लिखा होने से परेशान हैं। उन्होंने मांग भी की है कि जिनकी कोरोना से मौत हुई है, उनके मृत्यु प्रमाणपत्र पर कोविड से मृत्यु का जिक्र किया जाए। तभी उन्हें योजनाओं का लाभ मिल पाएगा।
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अभी तक ये हुआ एलान
केंद्र सरकार ने महामारी के चलते अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही, कहा कि यह रकम बच्चों के नाम से सावधि जमा कराई जाएगी। यह रकम बच्चों को 18 से 23 साल की उम्र के दौरान वजीफे के रूप में मिलेगी या 23 साल का होने पर एकमुश्त दी जाएगी। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों में ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पोल अधिकारियों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की कोरोना से मौत पर सरकार पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की राशि देगी।
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ये बोले लोग
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पिता लक्ष्मणदास का 12 मई को कोरोना से निधन हो गया था। हम जैसे कई परिवार इस महामारी में पीड़ित हुए हैं मगर मृत्यु प्रमाणपत्रों में मौत के कारण का जिक्र ही नहीं किया जा रहा है। यदि नियम नहीं है तो महामारी में बदलाव किया जाना चाहिए। - जय अग्रवाल, शहर।
मेरे पति अमित अग्रवाल की दो मई को कोविड से मृत्यु हो गई थी। मृत्यु प्रमाणपत्र में मरने का स्थान तो लिखा है लेकिन कारण का कोई उल्लेख नहीं है। तीन छोटे बच्चे हैं। विभागों के चक्कर लगा रही हूं मगर एक महीने बाद भी कोई मदद नहीं मिली है। - सर्वेज अग्रवाल, बैंकर्स कॉलोनी।
नई बस्ती निवासी नगर निगम के आउटसोर्सिंग कर्मी चंदन की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। नगर निगम में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, लेकिन प्रमाण पत्र पर मौत का कारण नहीं है। इसके साथ ही तमाम सफाई कर्मचारी कोरोना संक्रमण से मर गए, लेकिन उनके पास कोई साक्ष्य नहीं है। उन्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही है।- अशोक प्याल, अध्यक्ष सफाई मजदूर संघ

वर्जन..
मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए केंद्र सरकार के सीआरएस पोर्टल पर आवेदन किया जाता है। इसी पोर्टल से ही प्रमाण पत्र जारी होता है। पोर्टल पर ही मृत्यु प्रमाण पत्र में कारण लिखने का विकल्प नहीं है। लोग नगर निगम में मृत्यु का कारण लिखने के लिए पूछताछ करने आ रहे हैं। इसमें शासन स्तर से ही बदलाव होगा। अगर ऐेसे कोई निर्देश आते हैं, तो उसे अमल में लाया जाएगा। डॉ. विनीत कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
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