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कोरोना पॉजिटिव रही मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के फेफड़े तक पहुंचा संक्रमण

Thu, 12 Aug 2021 01:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 01:33 AM IST
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Corona-positive transition to the lungs of the moment in the womb of the mother
झांसी। झांसी में कोरोना के कहर का चौंका देने वाला मामला सामने आया है। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के फेफड़े तक में संक्रमण पहुंच गया। चार महीने बीत जाने के बाद भी उसमें कुछ भी बदलाव नहीं आया है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के बाद ही स्थिति के आधार पर बच्चे का इलाज शुरू होगा। फिलहाल पैदा होते ही उसे जन्मजात निमोनिया की आशंका बनी है।
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मार्च में एक गर्भवती महिला कोरोना की चपेट में आ गई थी। कोविड से ठीक होने के बाद वह स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास रुटीन जांच के लिए पहुंची तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट आई तो डॉक्टर भी चौंक गईं। उन्होंने देखा कि बच्चे के एक तरफ के फेफड़े के निचले हिस्से में धब्बे (पैच) हैं। लगातार फॉलोअप के बाद आठवें महीने में हुए अल्ट्रासाउंड में भी बच्चे के एक फेफड़े में उसी जगह पर धब्बे बने हुए मिले। धब्बों में कुछ भी अंतर नहीं आया है। आशंका जताई जा रही है कि महिला से बच्चे तक में कोरोना संक्रमण पहुंच गया। वहीं, ये फेफड़े की संरचना में गड़बड़ी भी हो सकती है। चूंकि, इस तरह के मामले कम ही सामने आते हैं। ऐसे में चिकित्सक भी इसे कोरोना से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर चौरसिया का कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद स्थिति के आधार पर इलाज किया जाएगा। पैदा होते ही उसे जन्मजात निमोनिया भी हो सकता है। यदि बाद में धब्बे बढ़ते हैं तो समस्या खड़ी हो सकती है।
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सामान्य नहीं सिजेरियन डिलीवरी होगी
महिला का इलाज कर रहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि इन हालातों में महिला का सामान्य प्रसव नहीं कराया जा सकता है। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी होगी। उसमें भी बेहद सावधानी बरतनी पड़ेगी।
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कोविड को अभी डेढ़ साल ही हुए हैं। इसको लेकर काफी स्टडी होनी बाकी है। कुछ रिचर्स में ये कहा गया है कि मां से बच्चे में कोरोना होने की संभावना कम रहती है मगर चार या पांचवें महीने में मां संक्रमित हो जाए तो ये हो भी सकता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। 40 साल के कॅरियर में मैंने ऐसा पहला केस देखा है। ये कोरोना की वजह से भी हो सकता है। इसके अलावा लाखों में एक मामला फेफड़े की संरचना में गड़बड़ी का भी होता है। जन्म के बाद ही जांच के आधार पर स्पष्ट पता चल सकेगा। - डॉ. संजया शर्मा, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ।
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