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कोरोना का खौफ: सिनेमा घरों में नहीं पहुंच रहे दर्शक
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खिलौना टाकीज में फिल्म देखते मामूली दर्शक। अमर उजाला
झांसी। कोरोना संक्रमण के खौफ के चलते सबसे बुरी हालत शहर के सिनेमा घरों की है। आलम यह है कि शो के दौरान अधिकतम चार से पांच लोग ही फिल्म देखने के लिए आ रहे हैं। जिसके चलते थियेटर संचालकों को घाटे में ही शो चलाना पड़ रहा है। दर्शक नहीं होने के कारण अधिकतर नाइट शो को बंद ही रखना पड़ता है। जबकि शहर के एक सिनेमा हॉल को अब तक शुरू ही नहीं किया गया है।
देशभर में फैली कोरोना महामारी के चलते 18 मार्च को सिनेमा हॉल को बंद करने का आदेश जारी किया गया था। आदेश पर अमल करते हुए शहर के थियेटरों को बंद कर दिया गया था। कोविड मरीजों की संख्या कम होते ही व अनलॉक की प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा 15 अक्टूबर को सशर्त सिनेमा हॉल को खोलने की अनुमति प्रदान की गई थी। जिसके चलते शहर के सिनेमा हॉलों को 23 अक्टूबर को खोल दिया गया था। सिनेमा हॉल शुरू होने के बाद से ही दर्शकों का टोटा है। सिनेमा घरों में कुल चार से पांच लोग ही फिल्म देखने के लिए आ रहे हैं। जबकि सिनेमा हॉल में एक शो का संचालन करने में तकरीबन 20 से 30,000 रुपये का खर्च होता है। दर्शकों की कमी होने के कारण कर्मचारियों का वेतन भी नहीं निकल पा रहा है। जिसके चलते संचालकों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
हर शो के बाद किया जा रहा सैनिटाइज
शो के संचालन के बाद सिनेमा हॉल प्रबंधन द्वारा पूरे हॉल व परिसर को सैनिटाइज कराया जा रहा है। इसके अलावा मुख्य द्वार पर सैनिटाइजर मशीन को भी लगाया गया है। किसी दर्शक के मुंह पर मास्क नहीं होने पर मुहैया कराया जा रहा है।
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टिकट दरों में नहीं किया बदलाव
सीटों के आधे टिकटों की बिक्री का नियम तय होने के बाद भी शो के टिकटों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पूर्व की तरह ही टिकट के रेट निर्धारित हैं।
हमारी ओर से कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए रोजाना पांच शो संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन सभी शो में दर्शकों की उपस्थित कम है। जिसके चलते काफी नुकसान हो रहा है। - चंदू, मैनेजर, खिलौना सिनेमा
सरकार ने सिनेमा घरों की कुल सीटों की संख्या से आधे ही टिकट बेचने का नियम तय किया है। लेकिन दर्शक कम होने के कारण एक लाइन में एक ही दर्शक बैठ कर फिल्म देख रहा है। - एचके दास, मैनेजर नटराज सिनेमा
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देशभर में फैली कोरोना महामारी के चलते 18 मार्च को सिनेमा हॉल को बंद करने का आदेश जारी किया गया था। आदेश पर अमल करते हुए शहर के थियेटरों को बंद कर दिया गया था। कोविड मरीजों की संख्या कम होते ही व अनलॉक की प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा 15 अक्टूबर को सशर्त सिनेमा हॉल को खोलने की अनुमति प्रदान की गई थी। जिसके चलते शहर के सिनेमा हॉलों को 23 अक्टूबर को खोल दिया गया था। सिनेमा हॉल शुरू होने के बाद से ही दर्शकों का टोटा है। सिनेमा घरों में कुल चार से पांच लोग ही फिल्म देखने के लिए आ रहे हैं। जबकि सिनेमा हॉल में एक शो का संचालन करने में तकरीबन 20 से 30,000 रुपये का खर्च होता है। दर्शकों की कमी होने के कारण कर्मचारियों का वेतन भी नहीं निकल पा रहा है। जिसके चलते संचालकों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
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हर शो के बाद किया जा रहा सैनिटाइज
शो के संचालन के बाद सिनेमा हॉल प्रबंधन द्वारा पूरे हॉल व परिसर को सैनिटाइज कराया जा रहा है। इसके अलावा मुख्य द्वार पर सैनिटाइजर मशीन को भी लगाया गया है। किसी दर्शक के मुंह पर मास्क नहीं होने पर मुहैया कराया जा रहा है।
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टिकट दरों में नहीं किया बदलाव
सीटों के आधे टिकटों की बिक्री का नियम तय होने के बाद भी शो के टिकटों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पूर्व की तरह ही टिकट के रेट निर्धारित हैं।
हमारी ओर से कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए रोजाना पांच शो संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन सभी शो में दर्शकों की उपस्थित कम है। जिसके चलते काफी नुकसान हो रहा है। - चंदू, मैनेजर, खिलौना सिनेमा
सरकार ने सिनेमा घरों की कुल सीटों की संख्या से आधे ही टिकट बेचने का नियम तय किया है। लेकिन दर्शक कम होने के कारण एक लाइन में एक ही दर्शक बैठ कर फिल्म देख रहा है। - एचके दास, मैनेजर नटराज सिनेमा