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कर्ज लेने के बाद चुकाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे सदस्य
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झांसी। कोरोना काल में सहकारी समितियाें की आर्थिक स्थिति भी चरमरा गईं। सदस्य समितियों से लिया कर्ज नहीं लौटा रहे। इस वजह से सदस्यों पर कुल करीब 67 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बकाया हो चुका। अब इन बकाएदारों को बकाया चुकाने के लिए नोटिस भेजा जाएगा।
खाद, बीज समेत अपनी अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सहकारी समितियां सदस्यों को अधिकतम तीन लाख रुपये तक का ऋण मुहैया कराती हैं। इस ऋण पर कुल सात प्रतिशत ब्याज देना होता है। लेकिन फसली सीजन के भीतर इसे चुका देने पर ब्याज में चार फीसदी की छूट मिलती है। ऋण सिर्फ तीन फीसदी ब्याज के साथ ही जमा करना होता है। लेकिन इसके बावजूद कर्ज लेने वाले सदस्य समिति के ऋण को चुकाने में आनाकानी कर रहे हैं। पिछले दो माह के दौरान कोरोना के चरम पर पहुंचने का भी असर कर्ज वापसी पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 58 सहकारी समितियों से 14492 सदस्यों ने 107. 31 करोड़ का ऋण लिया इनमें से 40.88 करोड़ रुपये समितियों को वापस मिल गए। लेकिन 67 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। भारी-भरकम बकाया हो जाने से समितियां अब चरमराने लगी हैं। कर्ज में डूब जाने से कई समितियों के सामने अस्तित्व का भी संकट पैदा हो गया। बता दें, समितियां हर फसली सीजन के दौरान 65 करोड़ का ऋण सदस्यों के बीच वितरित करती हैं।
इसके पहले पंचायत चुनाव के दौरान इसे वापस पाने के लिए बकाएदारों को चुनाव न लड़ने देने की बात कही गई थी लेकिन, विवाद होने के बाद इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। अब इन बकायेदारों की फिर से तलाश शुरू कराई गई है। एआर सहकारिता अनूप द्विवेदी के मुताबिक 30 जून से पहले कर्ज वापस कर देने वालों को सिर्फ तीन फीसदी ब्याज ही देना पड़ेगा। इसके बाद 17.70 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा। इसमें बकाये पर 10.70 प्रतिशत, 2 प्रतिशत पैनल ब्याज एवं 5 प्रतिशत संग्रह शुल्क जोड़ा जाएगा। उनका कहना है कि बकायेदारों की सूची तैयार की जा रही है। अब सभी बकाएदारों को इसका नोटिस भेजा जाएगा।
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खाद, बीज समेत अपनी अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सहकारी समितियां सदस्यों को अधिकतम तीन लाख रुपये तक का ऋण मुहैया कराती हैं। इस ऋण पर कुल सात प्रतिशत ब्याज देना होता है। लेकिन फसली सीजन के भीतर इसे चुका देने पर ब्याज में चार फीसदी की छूट मिलती है। ऋण सिर्फ तीन फीसदी ब्याज के साथ ही जमा करना होता है। लेकिन इसके बावजूद कर्ज लेने वाले सदस्य समिति के ऋण को चुकाने में आनाकानी कर रहे हैं। पिछले दो माह के दौरान कोरोना के चरम पर पहुंचने का भी असर कर्ज वापसी पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 58 सहकारी समितियों से 14492 सदस्यों ने 107. 31 करोड़ का ऋण लिया इनमें से 40.88 करोड़ रुपये समितियों को वापस मिल गए। लेकिन 67 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। भारी-भरकम बकाया हो जाने से समितियां अब चरमराने लगी हैं। कर्ज में डूब जाने से कई समितियों के सामने अस्तित्व का भी संकट पैदा हो गया। बता दें, समितियां हर फसली सीजन के दौरान 65 करोड़ का ऋण सदस्यों के बीच वितरित करती हैं।
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इसके पहले पंचायत चुनाव के दौरान इसे वापस पाने के लिए बकाएदारों को चुनाव न लड़ने देने की बात कही गई थी लेकिन, विवाद होने के बाद इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। अब इन बकायेदारों की फिर से तलाश शुरू कराई गई है। एआर सहकारिता अनूप द्विवेदी के मुताबिक 30 जून से पहले कर्ज वापस कर देने वालों को सिर्फ तीन फीसदी ब्याज ही देना पड़ेगा। इसके बाद 17.70 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा। इसमें बकाये पर 10.70 प्रतिशत, 2 प्रतिशत पैनल ब्याज एवं 5 प्रतिशत संग्रह शुल्क जोड़ा जाएगा। उनका कहना है कि बकायेदारों की सूची तैयार की जा रही है। अब सभी बकाएदारों को इसका नोटिस भेजा जाएगा।
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