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वेंटिलेटर पर रहकर कोविड से जंग जीतकर लौटा मरीज, परिजन बोले-दूसरा जीवन मिला
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झांसी। कोरोना से जंग जीतकर लौटने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ साधना कौशिक को पत्र लिखकर डॉक्टरों और स्टाफ का आभार जताया है। वहीं, एक मरीज के सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद स्वस्थ होकर घर लौटने पर परिजन खुशी से फूले नहीं समाए और बोल पड़े कि डॉक्टरों ने दूसरा जीवन दिया है।
कोविड महामारी कई मरीजों की जान ले चुकी है लेकिन कइयों की जोखिम भरे हालात में डॉक्टर मौत के मुंह से निकाल भी आए हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है। मेडिकल कॉलेज में 18 जून को भर्ती किए गए कोविड पॉजिटिव मरीज की हालत बेहद खराब होने पर आईसीयू में भर्ती किया गया था। कुछ ही समय में सेहत और खराब हुई तो वेंटिलेटर पर रखना पड़ गया। परिजनों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई तो उनका दिल बैठ गया। परिजन काफी डरे हुए थे लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की मेहनत रंग लाने लगी।
एक सप्ताह तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद मरीज को उससे हटा लिया गया। एक महीने तक इलाज चलने के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए और शुक्रवार को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। इस पर मरीज की बेटी ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र लिखकर आभार डॉक्टर, कर्मचारियों का जताया है। वहीं, कोविड से जंग जीतकर लौटीं बैंक मैनेजर ने भी बेहतर देखभाल, समय से खानपान मिलने पर कॉलेज के डॉक्टरों, स्टाफ को धन्यवाद दिया है। इसके अलावा कोरोना से स्वस्थ होकर लौटे मां-बेटे ने भी कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि कॉलेज में इतना बेहतर इलाज मिलेगा। सरकार की तरफ से यहां काफ ी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसका लाभ मरीजों को मिल रहा है।
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हर मरीज हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है। हमारा चिकित्सीय स्टाफ समर्पण और सेवाभाव के साथ रोगियों के इलाज में जुटा हुआ है। यही वजह है कि कोरोना के मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं और उन्हें लगातार अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है। वेंटीलेटर पर पहुंचने वाले मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री तैयार की जा रही है। - आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
कोविड महामारी में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, कर्मचारी खुद की जान की परवाह किए बगैर पूरी मेहनत से मरीजों को स्वस्थ करने में जुटे हुए हैं। कई ऐसे मरीज भी ठीक किए जा चुके हैं, जो आईसीयू या वेंटिलेटर पर थे। कोविड के हर मरीज का बेहतर ध्यान व सुविधाएं दी जा रही हैं। - डॉ एनएस सेंगर, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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कोविड महामारी कई मरीजों की जान ले चुकी है लेकिन कइयों की जोखिम भरे हालात में डॉक्टर मौत के मुंह से निकाल भी आए हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है। मेडिकल कॉलेज में 18 जून को भर्ती किए गए कोविड पॉजिटिव मरीज की हालत बेहद खराब होने पर आईसीयू में भर्ती किया गया था। कुछ ही समय में सेहत और खराब हुई तो वेंटिलेटर पर रखना पड़ गया। परिजनों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई तो उनका दिल बैठ गया। परिजन काफी डरे हुए थे लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की मेहनत रंग लाने लगी।
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एक सप्ताह तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद मरीज को उससे हटा लिया गया। एक महीने तक इलाज चलने के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए और शुक्रवार को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। इस पर मरीज की बेटी ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र लिखकर आभार डॉक्टर, कर्मचारियों का जताया है। वहीं, कोविड से जंग जीतकर लौटीं बैंक मैनेजर ने भी बेहतर देखभाल, समय से खानपान मिलने पर कॉलेज के डॉक्टरों, स्टाफ को धन्यवाद दिया है। इसके अलावा कोरोना से स्वस्थ होकर लौटे मां-बेटे ने भी कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि कॉलेज में इतना बेहतर इलाज मिलेगा। सरकार की तरफ से यहां काफ ी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसका लाभ मरीजों को मिल रहा है।
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हर मरीज हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है। हमारा चिकित्सीय स्टाफ समर्पण और सेवाभाव के साथ रोगियों के इलाज में जुटा हुआ है। यही वजह है कि कोरोना के मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं और उन्हें लगातार अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है। वेंटीलेटर पर पहुंचने वाले मरीजों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री तैयार की जा रही है। - आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
कोविड महामारी में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, कर्मचारी खुद की जान की परवाह किए बगैर पूरी मेहनत से मरीजों को स्वस्थ करने में जुटे हुए हैं। कई ऐसे मरीज भी ठीक किए जा चुके हैं, जो आईसीयू या वेंटिलेटर पर थे। कोविड के हर मरीज का बेहतर ध्यान व सुविधाएं दी जा रही हैं। - डॉ एनएस सेंगर, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।