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सर्दी ऊपर से कोरोना, सीओपीडी मरीजों के लिए खतरनाक समय
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झांसी। कोरोना वायरस के बीच सर्दियों का मौसम क्रोनिकल ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मौजूदा सीजन में इस बीमारी के रोगियों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। प्रतिरोधक क्षमता और फेफड़े पहले से ही कमजोर होने के कारण यदि कोरोना हो जाता है तो जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर बेहद सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
धूम्रपान व प्रदूषण के साथ ही फेफडे़ खराब होने की एक विशेष बीमारी सीओपीडी से आम लोग ग्रसित होते जा रहे हैं। यह एक प्रकार के फेफड़ों का रोग है, जो व्यक्ति के फेफड़े खराब कर देता है। इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिस कारण इसकी पहचान नहीं हो पाती है। 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इस बीमारी से ग्रसित होने की संभावना ज्यादा रहती है। सामान्य तौर पर इसकी मुख्य वजह अत्यधिक धूम्रपान है। इसके अलावा प्रदूषण, केमिकल व धुंध-धूल आदि के कारण भी यह रोग फैलता है।
ये हैं लक्षण
- जल्दी थकान
- सांस फूलना
- लंबे समय तक खांसी
- व्यायाम या सीढ़ियां चढ़ने पर बलगम आना
डब्ल्यूएचओ के आंकड़े
- 25 से 50 प्रतिशत लोगों को सीओपीडी के बारे में पता नहीं होता।
- भारत में तीन करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।
ये ध्यान दें
- गर्म खाना खाएं।
- गुनगुना पानी ही पीएं।
- अंकुरित अनाज का सेवन करें।
- सर्दियां में दिक्कत है तो सुबह न टहलें।
- ऐसी फल, सब्जी खाएं, जिससे एलर्जी न हो।
- इन्हेलर का उपयोग करते हैं तो छोड़े नहीं।
- किसी भी समस्या पर डॉक्टर से संपर्क करें।
सीओपीडी की जांच का सबसे आसान तरीका स्पिरोमेट्री टेस्ट है, जो आसानी से इस बीमारी का पता लगा देता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन नियमित दवाएं, व्यायाम आदि से इस रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है। सर्दी के सीजन में सीओपीडी के मरीजों में किसी भी प्रकार का संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को अलर्ट रहना चाहिए।
विज्ञापन
- डॉ. मधुर्मय शास्त्री, विभागाध्यक्ष, टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज।
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धूम्रपान व प्रदूषण के साथ ही फेफडे़ खराब होने की एक विशेष बीमारी सीओपीडी से आम लोग ग्रसित होते जा रहे हैं। यह एक प्रकार के फेफड़ों का रोग है, जो व्यक्ति के फेफड़े खराब कर देता है। इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिस कारण इसकी पहचान नहीं हो पाती है। 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इस बीमारी से ग्रसित होने की संभावना ज्यादा रहती है। सामान्य तौर पर इसकी मुख्य वजह अत्यधिक धूम्रपान है। इसके अलावा प्रदूषण, केमिकल व धुंध-धूल आदि के कारण भी यह रोग फैलता है।
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ये हैं लक्षण
- जल्दी थकान
- सांस फूलना
- लंबे समय तक खांसी
- व्यायाम या सीढ़ियां चढ़ने पर बलगम आना
डब्ल्यूएचओ के आंकड़े
- 25 से 50 प्रतिशत लोगों को सीओपीडी के बारे में पता नहीं होता।
- भारत में तीन करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।
ये ध्यान दें
- गर्म खाना खाएं।
- गुनगुना पानी ही पीएं।
- अंकुरित अनाज का सेवन करें।
- सर्दियां में दिक्कत है तो सुबह न टहलें।
- ऐसी फल, सब्जी खाएं, जिससे एलर्जी न हो।
- इन्हेलर का उपयोग करते हैं तो छोड़े नहीं।
- किसी भी समस्या पर डॉक्टर से संपर्क करें।
सीओपीडी की जांच का सबसे आसान तरीका स्पिरोमेट्री टेस्ट है, जो आसानी से इस बीमारी का पता लगा देता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन नियमित दवाएं, व्यायाम आदि से इस रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है। सर्दी के सीजन में सीओपीडी के मरीजों में किसी भी प्रकार का संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को अलर्ट रहना चाहिए।
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- डॉ. मधुर्मय शास्त्री, विभागाध्यक्ष, टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज।