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ठेकेदारों ने पूल बनाकर डाले 10 करोड़ के टेंडर
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नगर निगम
- फोटो : ??? ????
झांसी। नगर निगम में एक बार फिर 10 करोड़ रुपये के टेंडर पूल होने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि निर्माण कार्यों के टेंडर ठेकेदारों ने आपसी समन्वय कर डाल दिए। इसके चलते सरकार की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। वहीं, नगर निगम के उपसभापति ने कमिश्नर और नगर आयुक्त से मामले की जांच कर टेंडर निरस्त करने की मांग की है।
नगर निगम ने पिछले दिनों सड़कों के डामरीकरण के करीब 10 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों के टेंडर निकाले थे। जिसे ठेकेदारों ने आपस में बातचीत कर पूल कर लिया। दो दिन पहले निविदा खोली गई, तो पता चला कि टेंडरों में ठेेकदारों ने चार फीसद तक कम दरें डाली हैं। सूत्र बताते हैं कि ठेकेदारों ने तीन-तीन कामों का आपस में बंटवारा कर लिया है। इसे लेकर नगर निगम में चर्चा का आलम है। मामले में उपसभापति राजेश त्रिपाठी ने नगर आयुक्त और कमिश्नर को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि निगम अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर कम प्रतिशत पर निकाले गए हैं। उन्होंने मामले में जांच की मांग की है। बता दें कि नगर निगम में टेंडर पूल होने का यह दूसरा मामला है। दिसंबर में भी करीब 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर पूल हो गए थे। जिन्हें नगर आयुक्त ने निरस्त कर दिया था। बताया जाता है कि डामरीकरण के काम करने के लिए निगम में करीब सात ठेकेदार पंजीकृत हैं। ठेकेदार आपस में बात कर टेंडर डालते हैं। इसके चलते हर बार टेंडरिंग प्रक्रिया उलझ जाती है। उपसभापति ने मामले में जांच और टेंडर निरस्त करने की मांग की है।
निर्माण कार्यों की मांगी जानकारी
उपसभापति ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर वर्ष 2018-19 और 19-20 में कराए गए निर्माण और मरम्मत कार्यों की जानकारी मांगी है। साथ ही मार्ग प्रकाश विभाग को मिले बजट और कुटेशन से कराए गए कामों की जानकारी देने के लिए कहा है।
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टेंडर पूल होने की जानकारी नहीं है। अभी निर्माण कार्यों की तकनीक और वित्तीय बिड खुली नहीं है। टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी तरह से खुली है।
एलएन सिंह, मुख्य अभियंता नगर निगम
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नगर निगम ने पिछले दिनों सड़कों के डामरीकरण के करीब 10 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों के टेंडर निकाले थे। जिसे ठेकेदारों ने आपस में बातचीत कर पूल कर लिया। दो दिन पहले निविदा खोली गई, तो पता चला कि टेंडरों में ठेेकदारों ने चार फीसद तक कम दरें डाली हैं। सूत्र बताते हैं कि ठेकेदारों ने तीन-तीन कामों का आपस में बंटवारा कर लिया है। इसे लेकर नगर निगम में चर्चा का आलम है। मामले में उपसभापति राजेश त्रिपाठी ने नगर आयुक्त और कमिश्नर को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि निगम अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर कम प्रतिशत पर निकाले गए हैं। उन्होंने मामले में जांच की मांग की है। बता दें कि नगर निगम में टेंडर पूल होने का यह दूसरा मामला है। दिसंबर में भी करीब 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर पूल हो गए थे। जिन्हें नगर आयुक्त ने निरस्त कर दिया था। बताया जाता है कि डामरीकरण के काम करने के लिए निगम में करीब सात ठेकेदार पंजीकृत हैं। ठेकेदार आपस में बात कर टेंडर डालते हैं। इसके चलते हर बार टेंडरिंग प्रक्रिया उलझ जाती है। उपसभापति ने मामले में जांच और टेंडर निरस्त करने की मांग की है।
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निर्माण कार्यों की मांगी जानकारी
उपसभापति ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर वर्ष 2018-19 और 19-20 में कराए गए निर्माण और मरम्मत कार्यों की जानकारी मांगी है। साथ ही मार्ग प्रकाश विभाग को मिले बजट और कुटेशन से कराए गए कामों की जानकारी देने के लिए कहा है।
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टेंडर पूल होने की जानकारी नहीं है। अभी निर्माण कार्यों की तकनीक और वित्तीय बिड खुली नहीं है। टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी तरह से खुली है।
एलएन सिंह, मुख्य अभियंता नगर निगम