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ठेकेदार मांग रहे थे 22 करोड़, हिसाब दे पाए सिर्फ पौने आठ करोड़ का
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झांसी। जल संस्थान के ठेकेदार 22.79 करोड़ रुपये का भुगतान अटका होने को लेकर लंबे समय से हाय-तौबा मचा रहे थे। लेकिन, जब उनसे बकाए का हिसाब मांगा गया तो वे सिर्फ पौने आठ करोड़ के दस्तावेज ही पेश कर पाए। जबकि, ठेकेदारों को बिल प्रस्तुत करने के लिए दी गई मियाद भी खत्म हो गई है। अब भुगतान पर फैसला होना भर बाकी है।
पाइप लाइन की मरम्मत हो या ट्यूबवेल की, जल संस्थान में ये सभी काम ठेकेदारों के जरिये ही कराए जाते हैं। ठेकेदारों का आरोप था कि जल संस्थान काम तो उनसे लगातार ले रहा है, लेकिन, भुगतान 2017 के बाद से नहीं किया गया है। उनके 22.79 करोड़ रुपये जल संस्थान के पास फंसे हुए हैं। इससे वे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। काम नियमित जारी रखने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान को लेकर ठेकेदार लगातार अफसरों की चौखट पर दस्तक दे रहे थे। इस मामले को कमिश्नर डा. अजय शंकर पांडेय ने संज्ञान में लिया। उन्होंने ठेकेदारों को बकाए से संबंधित सभी बिल प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय दिया था। ये मियाद गुजर चुकी है। ठेकेदार सिर्फ 7.78 करोड़ रुपये का ही हिसाब दे पाए हैं। अब मंडलायुक्त बकाए के भुगतान को लेकर फैसला लेंगे।
ठेकेदारों की ओर से अपने बकाए के बिल /बाऊचर शपथ पत्रों के साथ उपलब्ध कराए गए हैं। ये सभी दस्तावेज मंडलायुक्त को सौंप दिए गए हैं। अब अंतिम निर्णय उन्हीं को लेना है।
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- कुलदीप सिंह, प्रभारी महाप्रबंधक - जल संस्थान
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पाइप लाइन की मरम्मत हो या ट्यूबवेल की, जल संस्थान में ये सभी काम ठेकेदारों के जरिये ही कराए जाते हैं। ठेकेदारों का आरोप था कि जल संस्थान काम तो उनसे लगातार ले रहा है, लेकिन, भुगतान 2017 के बाद से नहीं किया गया है। उनके 22.79 करोड़ रुपये जल संस्थान के पास फंसे हुए हैं। इससे वे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। काम नियमित जारी रखने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान को लेकर ठेकेदार लगातार अफसरों की चौखट पर दस्तक दे रहे थे। इस मामले को कमिश्नर डा. अजय शंकर पांडेय ने संज्ञान में लिया। उन्होंने ठेकेदारों को बकाए से संबंधित सभी बिल प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय दिया था। ये मियाद गुजर चुकी है। ठेकेदार सिर्फ 7.78 करोड़ रुपये का ही हिसाब दे पाए हैं। अब मंडलायुक्त बकाए के भुगतान को लेकर फैसला लेंगे।
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ठेकेदारों की ओर से अपने बकाए के बिल /बाऊचर शपथ पत्रों के साथ उपलब्ध कराए गए हैं। ये सभी दस्तावेज मंडलायुक्त को सौंप दिए गए हैं। अब अंतिम निर्णय उन्हीं को लेना है।
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- कुलदीप सिंह, प्रभारी महाप्रबंधक - जल संस्थान