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Jhansi News: अनुबंध 485 का... उपस्थिति 506 की, अब मानदेय के लिए भटक रहे 21 आउटसोर्स कर्मी
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। बिजली अफसरों की गलती का खामियाजा 21 आउटसोर्सकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। 485 का अनुबंध होने के बाद भी 506 कर्मचारियों से काम कराया गया। ऐसे में अब शेष कर्मचारी अपने मानदेय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
बिजली विभाग ने आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती के लिए पटना की कंपनी उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज प्रा. लि. से अनुबंध किया। कंपनी ने एक मार्च से कार्यभार संभाला और 485 कर्मचारियों के रखने की जिम्मेदारी ली। साथ ही 506 कर्मियों में 21 कर्मचारियों को बाहर करने का निर्देश विभाग की ओर से दिया गया। कंपनी की ओर से जिम्मेदार अफसरों को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भी दिया गया लेकिन बिजली उपकेंद्रों पर कर्मचारियों की संख्या में कोई कटौती नहीं की गई। पूर्व में तैनात 506 कर्मियों से ही कार्य कराया गया। कंपनी ने निर्धारित अनुबंध के मुताबिक 485 कर्मियों का ही मानदेय देने पर सहमति जताई है। ऐसे में अब 21 कर्मचारी मानदेय की मांग को लेकर उच्चाधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
कार्यालय में किया था धरना प्रदर्शन
- मानदेय न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने पिछले दिनों अधीक्षण अभियंता ग्रामीण कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया था। उन्होंने मांग उठाई थी कि उनसे जो काम लिया गया है, उसका मानदेय उन्हें दिलाया जाए। अन्यथा वह उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। यहां एसई के आश्वासन पर कर्मचारियों ने अपना धरना-प्रदर्शन खत्म तो कर दिया लेकिन मानदेय कैसे और किस तरीके से दिया जाएगा, यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
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क्या बोले जिम्मेदार
विभाग से उन्होंने 485 कर्मियों का अनुबंध किया और इतने ही कर्मचारियों का मानदेय देने के लिए वह जिम्मेदार है। इस संबंध में बाकायदा अधिकारियों को पत्र लिखकर कर्मचारियों को कम करने के लिए कहा गया था लेकिन कर्मचारियों को कम नहीं किया गया। अतिरिक्त कर्मियों के मानदेय के लिए वही अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने उनसे कार्य कराया। - हरेंद्र परमार, उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज
अनुबंध के हिसाब से कर्मचारियों को तैनात किए जाने के निर्देश अवर अभियंताओं को दिए गए थे। उन्होंने कर्मचारियों को कम नहीं किया है तो इसके लिए उपकेंद्र पर कार्य कराने वाले अधिकारियों का दोष है। - ऐनुल होदा, अधीक्षण अभियंता ग्रामीण, विद्युत वितरण मंडल, झांसी
झांसी। बिजली अफसरों की गलती का खामियाजा 21 आउटसोर्सकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। 485 का अनुबंध होने के बाद भी 506 कर्मचारियों से काम कराया गया। ऐसे में अब शेष कर्मचारी अपने मानदेय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
बिजली विभाग ने आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती के लिए पटना की कंपनी उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज प्रा. लि. से अनुबंध किया। कंपनी ने एक मार्च से कार्यभार संभाला और 485 कर्मचारियों के रखने की जिम्मेदारी ली। साथ ही 506 कर्मियों में 21 कर्मचारियों को बाहर करने का निर्देश विभाग की ओर से दिया गया। कंपनी की ओर से जिम्मेदार अफसरों को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भी दिया गया लेकिन बिजली उपकेंद्रों पर कर्मचारियों की संख्या में कोई कटौती नहीं की गई। पूर्व में तैनात 506 कर्मियों से ही कार्य कराया गया। कंपनी ने निर्धारित अनुबंध के मुताबिक 485 कर्मियों का ही मानदेय देने पर सहमति जताई है। ऐसे में अब 21 कर्मचारी मानदेय की मांग को लेकर उच्चाधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
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कार्यालय में किया था धरना प्रदर्शन
- मानदेय न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने पिछले दिनों अधीक्षण अभियंता ग्रामीण कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया था। उन्होंने मांग उठाई थी कि उनसे जो काम लिया गया है, उसका मानदेय उन्हें दिलाया जाए। अन्यथा वह उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। यहां एसई के आश्वासन पर कर्मचारियों ने अपना धरना-प्रदर्शन खत्म तो कर दिया लेकिन मानदेय कैसे और किस तरीके से दिया जाएगा, यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
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क्या बोले जिम्मेदार
विभाग से उन्होंने 485 कर्मियों का अनुबंध किया और इतने ही कर्मचारियों का मानदेय देने के लिए वह जिम्मेदार है। इस संबंध में बाकायदा अधिकारियों को पत्र लिखकर कर्मचारियों को कम करने के लिए कहा गया था लेकिन कर्मचारियों को कम नहीं किया गया। अतिरिक्त कर्मियों के मानदेय के लिए वही अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने उनसे कार्य कराया। - हरेंद्र परमार, उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज
अनुबंध के हिसाब से कर्मचारियों को तैनात किए जाने के निर्देश अवर अभियंताओं को दिए गए थे। उन्होंने कर्मचारियों को कम नहीं किया है तो इसके लिए उपकेंद्र पर कार्य कराने वाले अधिकारियों का दोष है। - ऐनुल होदा, अधीक्षण अभियंता ग्रामीण, विद्युत वितरण मंडल, झांसी