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चार बाधाओं ने रोकी निर्माण की रफ्तार

Sat, 15 Oct 2016 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 15 Oct 2016 12:30 AM IST
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 Construction stopped at the four barriers
construction news jhansi - फोटो : demo
सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण की रफ्तार को चार बाधाओं ने धीमा कर दिया है। इस कारण रेलवे की टीम काम संभलकर कर रही है, ताकि कोई दिक्कत न हो। निर्माण मई 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन काम की गति बता रही है कि इसमें तीन-चार महीने और लग सकते हैं।  
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सीपरी बाजार में 86.19 करोड़ की लागत से रोड ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है। काम मई 2014 में शुरू हुआ था और लक्ष्य था कि इसे मार्च 2016 तक पूरा कर लिया जाएगा। सेतु निगम ने अपने हिस्से का काम लगभग पूरा कर लिया, लेकिन रेलवे की गति धीमी है। रेलवे ने काम का ठेका नोएडा की आउट मैक्स कंपनी को सौंपा है। रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में 18 माह का लक्ष्य बनाकर चलता है। इस हिसाब मई 2017 में रेलवे को अपना काम पूरा हो जाना चाहिए। रेलवे को 36-36 मीटर और 50- 50 मीटर की दूरी पर दो-दो पिलर बनाने हैं। इस हिसाब से कुल चार पिलर बनने हैं, जबकि ग्यारह माह बीतने के बाद सिर्फ दो पिलर 36- 36 मीटर की दूरी पर बन सके हैं। जाहिर है कि काम की गति बेहद धीमी है। निर्माण शाखा के अधिकारियों की माने तो पुल बनाने में चार ऐसी बाधाएं सामने आ रही हैं, जिससे काम को तेजी से नहीं किया जा सकता है। इन बाधाओं के कारण काम संभलकर करना पड़ रहा है। 
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‘ओवरब्रिज निर्माण में आ रही बाधाओं के कारण तेजी से काम नहीं किया जा सकता है। पिलर बनाने का काम पूरा हो जाए तो उसके ऊपर गार्डर लगाने का काम एक माह में ही पूरा हो जाएगा।’
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डी के मिश्रा, डिप्टी चीफ इंजीनियर (निर्माण)। 

ये हैं बाधाएं 
एक -अमूमन जहां भी रेलवे रोड ओवरब्रिज बनाता है, वहां नीचे दो ही पटरियां होती हैं। मगर, इस ब्रिज के नीचे सात पटरियां आ रही हैं। इस कारण नॉन स्टैंडर्ड डिजाइन (निर्धारित से हटकर) तैयार करनी पड़ी। इसमें विलंब हुआ।  

दो -नीचे पथरीली जमीन है, जिसको ब्लास्टिंग कर नहीं तोड़ा जा सकता है। इस कारण पिलर के लिए गड्ढा खोदने में समय लग रहा है।  

तीन -ब्रिज निर्माण के स्थान पर बाजार का हेवी ट्रैफिक निकलता है, जो निर्माण में सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। जरा से गलती से कोई हादसा हो सकता है। 

चार -पुल के नीचे दो रेल लाइन होने पर स्पाइन छोटे बनाने पकड़ते हैं। मगर यहां पटरियों की संख्या अधिक होने के कारण स्पाइन लंबे बनाना पड़े रहे हैं। स्पाइन लंबा न होता पर दो ही पिलर से काम बन जाता।  


उत्तराखंड में बन रहे गार्डर 
रेलवे पटरियों के ऊपर लगने वाले गार्डरों (ढांचे) को उत्तराखंड में तैयार करवा रहा है। इसका ठेका उत्तराखंड की रिचा इंडस्ट्रीज को दिया गया है। इन गार्डरों को क्रेनों की मदद से शिफ्ट किया जाएगा।  
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