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घूम आइये चहुंओर, झांसी में सबसे कम रहता है शोर

Tue, 29 Mar 2022 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 12:36 AM IST
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Come roam around, the noise remains the least in Jhansi
झांसी। प्रदेश के बड़े शहरों में आप कहीं भी घूम आइये, हर जगह आपको शोर ही शोर मिलेगा। मगर झांसी में हरियाली और ज्यादा उद्योग लगे न होने, कम आबादी की वजह से झांसी में ध्वनि प्रदूषण बहुत कम है। यहां पर बड़े महानगरों की तरह चारों तरफ आवाज का शोर नहीं सुनाई देता है। कुछ स्थानों को छोड़ दें तो ध्वनि स्तर 70 डेसिबल के आसपास ही रहता है।
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यूनाइटेड नेशंस एनवायरोमेंट प्रोग्राम में दक्षिण एशिया के 61 शहरों की सूची जारी की गई है। 119 ध्वनि स्तर के साथ बांग्लादेश का ढाका शहर दुनिया में टॉप पर है। जबकि, उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद 114 ध्वनि स्तर के साथ दूसरे स्थान पर है। चूंकि, इसमें सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की गई है, ऐसे में झांसी का कोई भी स्थान नहीं है। झांसी में ध्वनि स्तर काफी बेहतर है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीत कुमार ने बताया कि जिले में औसतन ध्वनि स्तर 65 से 70 डेसिबल के बीच ही रहता है। सुबह बच्चों के स्कूल और बड़ों के ऑफिस जाने की वजह से शहर के प्रमुख चौराहों जैसे चित्रा, बीकेडी, इलाइट, कचहरी और जेल चौराहे के आसपास ध्वनि स्तर अधिकतम 75 डेसिबल तक पहुंच पाता है। फिर कम हो जाता है। शाम को पांच से छह के बीच में ऑफिस छूटने के समय दोबारा 75 के आसपास रहता है। मगर ज्यादातर समय ये 70 डेसिबल के करीब ही रहता है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण बेहद कम है। उन्होंने बताया कि ध्वनि स्तर 85 पहुंचाना वार्निंग और 90 से ऊपर जाना खतरनाक है।
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ये है मानक
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक किसी भी जिले में ध्वनि प्रदूषण का मानक अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से तय किया गया है। जिसके तहत औद्योगिक क्षेत्र में दिन में 75, रात में 70, व्यावसायिक क्षेत्र में दिन में 65 और रात में 55, आवासीय इलाकों में दिन में 55 और रात में 45 और शांत क्षेत्र में दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल होना चाहिए। हालांकि झांसी का ध्वनि प्रदूषण स्तर मानक से ज्यादा है, लेकिन बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है।
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ये हैं कारण
- कम उद्योग होना, जो हैं वो भी शहर के बाहर
- ग्रीन मफ्लर यानी अधिकांश जगहों पर हरियाली होना
- 10 बजे के बाद डीजे न बजने का सख्ती से पालन होना
- बड़े शहरों की तरह गाड़ियों में मॉडिफाइड साइसेंलर न के बराबर होना
- हाइवे पर कनेर के पौधे लगे हैं, जो 10 डेसिबल तक आवाज कम करते
ये भी जानें
डॉ. विनीत के मुताबिक ध्वनि प्रदूषण को मापने का पैमाना डेसिबल होता है। बताया कि सामान्य तौर पर हम जो बातचीत करते हैं वो 45 से 50 डेसिबल के आसपास होती है। ट्रेन के इंजन के हॉर्न की आवाज 100 डेसिबल तक होती है। 90 डेसिबल की आवाज को लगातार सुनने से श्रवण क्षमता प्रभावित हो सकती है।
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