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सर्दी में गर्मी ने छुड़ाए व्यापारियों के पसीने
ब्यूरो
Updated Thu, 31 Dec 2015 02:00 AM IST
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झांसी। दिसंबर का महीना व्यापारियों का पसीना छुड़ा रहा है। मौसम में नरमी न होने से ठंड का असर भी कम हो गया है। ऐसे में गर्मी देने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, रजाई-गद्दे, गर्म वस्त्र समेत लकड़ी-कोयला का बाजार ठंडा पड़ा है। व्यापारियों के गोदामों में अभी तक 70 प्रतिशत माल जमा है, जो सर्दी में तेजी आने पर ही बिक सकेगा। इससे कारोबारी चिंतित हैं।
ठंडे पड़े गीजर, ब्लोअर्स व रूम हीटर
सर्दी के मौसम में बड़े स्तर पर रूम हीटर, ब्लोअर्स, ऑयल फिल्ड रेडिएटर आदि की उपभोक्ताओं में मांग रहती है। मानिक चौक में इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी आदेश भंडारी के अनुसार पिछले वर्ष दिसंबर तक गीजर, रूम हीटर, क्वार्टज हीटर, ब्लोअर्स आदि गर्मी पैदा करने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की बिक्री 80 प्रतिशत तक हो जाती थी।
लेकिन इस वर्ष 80 प्रतिशत माल अभी तक गोदामों में पड़ा हुआ है। उम्मीद है कि जनवरी के मध्य में सर्दी बढ़ने से बाजार में तेजी आएगी।
रुई के दाम घटे, अब ग्राहकों का इंतजार
पिछले वर्ष दिसंबर में ग्राहक हमें ढूंढते थे कि उसकी रजाई व गद्दे जल्द से जल्द भर जाएं। लेकिन इस वर्ष हमें ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है। यह कहना है रानी महल पर रजाई-गद्दे बनाने वाले मोहम्मद वसीम मंसूरी का। वह बताते हैं कि इस वर्ष तो अभी तक रजाई-गद्दे का बाजार उठा तक नहीं है।
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कुछ दिन पूर्व तक देशी रुई के दाम 180 रुपये किलो थे, आज घटकर दाम 150 रुपये किलो हो गए हैं। वहीं, रुई की रजाई 500 रुपये तक में बिकती थी, लेकिन अब 300 से 350 रुपये तक में बिक रही है। अगर सर्दी में तेजी नहीं आई तो रजाई-गद्दे का बाजार बुरी तरह प्रभावित होगा।
अब तक मात्र 15 हजार की बिक सकी लकड़ी
पौष के मौसम में गर्मी प्रदान करने में सहायक कोयला व लकड़ी का बाजार भी प्रभावित है। आशिक चौराहा पर लकड़ी का व्यापार करने वाले रतन लाल कुशवाहा के मुताबिक दिसंबर में अभी तक सिर्फ 15 हजार रुपये की बिक्री ही हुई है, जो पिछले वर्षों की अपेक्षा बेहद कम है।
उनके अनुसार कुछ दिन पूर्व तक ही लकड़ी के दाम 8 रुपये किलो थे, लेकिन सर्दी न बढ़ने से बाजार गिर गया और दाम घटकर सात रुपये प्रति किलो हो गए। इसी प्रकार न्यू रोड स्थित कोयला व्यापारी विजय गुप्ता के अनुसार 80 प्रतिशत माल गोदाम में पड़ा है।
वूलेन बिक्री में विशेष लाभ की संभावना कम
कुछ दिन पूर्व तक ही हस्तशिल्प मेले से लेकर तिब्बती मार्केट एवं स्थानीय बाजार के प्रतिष्ठानों में गर्म वस्त्रों की खूब सेल हो रही थी, लेकिन दिन में सूर्य की किरणें तेज होने से वूलेन व्यापारियों के पसीने छूट रहे हैं। तिब्बती मार्केट के वूलेन व्यापारी पेमा के मुताबिक दिसंबर के आखिरी सप्ताह ने गर्म वस्त्रों के बाजार क ो प्रभावित किया है।
वहीं, मानिक चौक में गर्म वस्त्रों के व्यापारी राम कुमार के अनुसार उम्मीद है कि जनवरी के मध्य में बाजार उठेगा, लेकिन विशेष लाभ मिलने की संभावना कम ही है।
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ठंडे पड़े गीजर, ब्लोअर्स व रूम हीटर
सर्दी के मौसम में बड़े स्तर पर रूम हीटर, ब्लोअर्स, ऑयल फिल्ड रेडिएटर आदि की उपभोक्ताओं में मांग रहती है। मानिक चौक में इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी आदेश भंडारी के अनुसार पिछले वर्ष दिसंबर तक गीजर, रूम हीटर, क्वार्टज हीटर, ब्लोअर्स आदि गर्मी पैदा करने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की बिक्री 80 प्रतिशत तक हो जाती थी।
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लेकिन इस वर्ष 80 प्रतिशत माल अभी तक गोदामों में पड़ा हुआ है। उम्मीद है कि जनवरी के मध्य में सर्दी बढ़ने से बाजार में तेजी आएगी।
रुई के दाम घटे, अब ग्राहकों का इंतजार
पिछले वर्ष दिसंबर में ग्राहक हमें ढूंढते थे कि उसकी रजाई व गद्दे जल्द से जल्द भर जाएं। लेकिन इस वर्ष हमें ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है। यह कहना है रानी महल पर रजाई-गद्दे बनाने वाले मोहम्मद वसीम मंसूरी का। वह बताते हैं कि इस वर्ष तो अभी तक रजाई-गद्दे का बाजार उठा तक नहीं है।
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कुछ दिन पूर्व तक देशी रुई के दाम 180 रुपये किलो थे, आज घटकर दाम 150 रुपये किलो हो गए हैं। वहीं, रुई की रजाई 500 रुपये तक में बिकती थी, लेकिन अब 300 से 350 रुपये तक में बिक रही है। अगर सर्दी में तेजी नहीं आई तो रजाई-गद्दे का बाजार बुरी तरह प्रभावित होगा।
अब तक मात्र 15 हजार की बिक सकी लकड़ी
पौष के मौसम में गर्मी प्रदान करने में सहायक कोयला व लकड़ी का बाजार भी प्रभावित है। आशिक चौराहा पर लकड़ी का व्यापार करने वाले रतन लाल कुशवाहा के मुताबिक दिसंबर में अभी तक सिर्फ 15 हजार रुपये की बिक्री ही हुई है, जो पिछले वर्षों की अपेक्षा बेहद कम है।
उनके अनुसार कुछ दिन पूर्व तक ही लकड़ी के दाम 8 रुपये किलो थे, लेकिन सर्दी न बढ़ने से बाजार गिर गया और दाम घटकर सात रुपये प्रति किलो हो गए। इसी प्रकार न्यू रोड स्थित कोयला व्यापारी विजय गुप्ता के अनुसार 80 प्रतिशत माल गोदाम में पड़ा है।
वूलेन बिक्री में विशेष लाभ की संभावना कम
कुछ दिन पूर्व तक ही हस्तशिल्प मेले से लेकर तिब्बती मार्केट एवं स्थानीय बाजार के प्रतिष्ठानों में गर्म वस्त्रों की खूब सेल हो रही थी, लेकिन दिन में सूर्य की किरणें तेज होने से वूलेन व्यापारियों के पसीने छूट रहे हैं। तिब्बती मार्केट के वूलेन व्यापारी पेमा के मुताबिक दिसंबर के आखिरी सप्ताह ने गर्म वस्त्रों के बाजार क ो प्रभावित किया है।
वहीं, मानिक चौक में गर्म वस्त्रों के व्यापारी राम कुमार के अनुसार उम्मीद है कि जनवरी के मध्य में बाजार उठेगा, लेकिन विशेष लाभ मिलने की संभावना कम ही है।