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रेलवे इंस्टीट्यूट के टावर पर फिर लगेंगी घड़ियां
jhansi
Updated Tue, 04 Dec 2018 01:42 AM IST
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रेलवे इंस्टीट्यूट
- फोटो : demo
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सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट भवन के टावर पर ढाई दशक बाद फिर से विशाल घड़ियां नजर आएंगी। टावर की चारों दिशाओं में लगने वाली इन घड़ियों का आकार सवा चार फीट का होगा। संकेत एवं दूरसंचार विभाग से स्वीकृति मिल गई है। प्रस्ताव मुंबई रेलवे के बायखला वर्कशॉप भेज दिया गया है, जिसे जल्द अनुमति मिलने की उम्मीद है।
सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट 100 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। यहां अंग्रेज और रेलवे के अधिकारी हॉकी, क्रिकेट समेत विभिन्न खेल खेलते थे। यूरोपीय वास्तु शैली में बने इंस्टीट्यूट के मुख्य भवन के टावर पर लगभग 25 वर्ष पहले चार - चार फीट की विशाल घड़ियां लगी थीं, जो पांच साल चलने के बाद खराब होने पर हटा दी गईं। ज्यादातर लोग अब इन घड़ियों को भूल चुके हैं लेकिन अब फिर से टावर पर विशाल घड़ियां लगी दिखेंगी। रेलवे प्रशासन नवंबर 2017 से इंस्टीट्यूट के भवन का रंगरोगन, मरम्मत आदि काम करा रहा है। इंस्टीट्यूट की तरफ से भेजे गए टावर पर घड़ी लगाने के प्रस्ताव को 30 अक्तूबर 2018 को संकेत एवं दूरसंचार विभाग से स्वीकृति मिल गई है। अब प्रस्ताव मुंबई रेलवे के बायखला वर्कशॉप भेजा गया है। इंस्टीट्यूट के सचिव मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि इन घड़ियों को रेलवे का एसएनटी विभाग खरीदेगा। मुंबई के बायखला वर्कशॉप से प्रस्ताव को जल्द हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
बाक्स..
इंस्टीट्यूट के पार्क में देखें भाप वाला इंजन
आपको भाप वाला इंजन देखना है, तो सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट के पार्क आएं। यह इंजन कभी पंजाब मेल में लगता था, जिसे वर्ष 1990 में लोगों को देखने के लिए पार्क में रखा गया। हालांकि, देखरेख के अभाव में इस इंजन का स्वरूप बहुत बदल चुका था लेकिन अब इसकी मरम्मत व रंगरोगन किया गया है। जानकारों के अनुसार यह इंजन रेलवे की महत्वपूर्ण विरासत है। जो अब ट्रैक पर नजर नहीं आते हैं। ऐसा भाप वाला इंजन वर्तमान में सिर्फ डीआरएम आफिस के सामने और रेलवे वर्कशॉप में देखा जा सकता है।
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सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट 100 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। यहां अंग्रेज और रेलवे के अधिकारी हॉकी, क्रिकेट समेत विभिन्न खेल खेलते थे। यूरोपीय वास्तु शैली में बने इंस्टीट्यूट के मुख्य भवन के टावर पर लगभग 25 वर्ष पहले चार - चार फीट की विशाल घड़ियां लगी थीं, जो पांच साल चलने के बाद खराब होने पर हटा दी गईं। ज्यादातर लोग अब इन घड़ियों को भूल चुके हैं लेकिन अब फिर से टावर पर विशाल घड़ियां लगी दिखेंगी। रेलवे प्रशासन नवंबर 2017 से इंस्टीट्यूट के भवन का रंगरोगन, मरम्मत आदि काम करा रहा है। इंस्टीट्यूट की तरफ से भेजे गए टावर पर घड़ी लगाने के प्रस्ताव को 30 अक्तूबर 2018 को संकेत एवं दूरसंचार विभाग से स्वीकृति मिल गई है। अब प्रस्ताव मुंबई रेलवे के बायखला वर्कशॉप भेजा गया है। इंस्टीट्यूट के सचिव मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि इन घड़ियों को रेलवे का एसएनटी विभाग खरीदेगा। मुंबई के बायखला वर्कशॉप से प्रस्ताव को जल्द हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
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इंस्टीट्यूट के पार्क में देखें भाप वाला इंजन
आपको भाप वाला इंजन देखना है, तो सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट के पार्क आएं। यह इंजन कभी पंजाब मेल में लगता था, जिसे वर्ष 1990 में लोगों को देखने के लिए पार्क में रखा गया। हालांकि, देखरेख के अभाव में इस इंजन का स्वरूप बहुत बदल चुका था लेकिन अब इसकी मरम्मत व रंगरोगन किया गया है। जानकारों के अनुसार यह इंजन रेलवे की महत्वपूर्ण विरासत है। जो अब ट्रैक पर नजर नहीं आते हैं। ऐसा भाप वाला इंजन वर्तमान में सिर्फ डीआरएम आफिस के सामने और रेलवे वर्कशॉप में देखा जा सकता है।
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