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रेलवे पार्क हुआ बेजार, नहीं आती बहार
jhansi
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:46 AM IST
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- फोटो : demo pic
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झांसी। सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट का पार्क कभी गुलजार था पर अब बेजार है। खूबसूरत फूलों की जगह बेतरतीब झाड़ियां नजर आती हैं। रखरखाव न होने के कारण झूले जाम हो गए हैं। खेल के उपकरण भी गायब हैं और अब तो यहां सन्नाटा ही पसरा रहता है।
सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट बिल्डिंग के पीछे बने पार्क का उद्घाटन 27 मार्च 1994 को तत्कालीन रेलवे बोर्ड अध्यक्ष आनंद नारायण शुक्ल ने किया था। पार्क बनाने का उद्देश्य कर्मचारियों के बच्चों को मनोरंजन व खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना था। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी कार्मिक विभाग को सौंपी गई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद कार्मिक विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। नतीजा यह रहा कि रखरखाव के अभाव में पार्क अपनी पहचान खोने लगा। इसके बाद उत्तर मध्य रेलवे महिला समाज सेवा समिति की तत्कालीन अध्यक्ष शिखा चोपड़ा ने रुचि ली। एक मई 2014 को पार्क को दुबारा फिर हराभरा किया गया और पार्क में बहार आ गई।
कुछ दिन बाद फिर वही हाल हो गया। दरअसल इसके रखरखाव के मुकम्मल इंतजाम नहीं हैं। झूले और अन्य खेल उपकरणों में जंग लगने के कारण वे जाम हो गए हैं। फिसलपट्टियां गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। रेल इंजन, सीमेंट के हाथी और जिराफ बदरंग हो गए हैं। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि शीघ्र ही पार्क को फिर दुरुस्त किया जाएगा।
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रात में सुरक्षा नहीं
अंधेरा पसरते ही सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट असुरक्षित हो जाता है। शाम ढलते ही सड़क पर आवाजाही कम हो जाती है। इस कारण अभिभावक शाम के समय बच्चों को साथ लेकर सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में आने से बचते हैं। रात में यहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।
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सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट बिल्डिंग के पीछे बने पार्क का उद्घाटन 27 मार्च 1994 को तत्कालीन रेलवे बोर्ड अध्यक्ष आनंद नारायण शुक्ल ने किया था। पार्क बनाने का उद्देश्य कर्मचारियों के बच्चों को मनोरंजन व खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना था। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी कार्मिक विभाग को सौंपी गई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद कार्मिक विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। नतीजा यह रहा कि रखरखाव के अभाव में पार्क अपनी पहचान खोने लगा। इसके बाद उत्तर मध्य रेलवे महिला समाज सेवा समिति की तत्कालीन अध्यक्ष शिखा चोपड़ा ने रुचि ली। एक मई 2014 को पार्क को दुबारा फिर हराभरा किया गया और पार्क में बहार आ गई।
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कुछ दिन बाद फिर वही हाल हो गया। दरअसल इसके रखरखाव के मुकम्मल इंतजाम नहीं हैं। झूले और अन्य खेल उपकरणों में जंग लगने के कारण वे जाम हो गए हैं। फिसलपट्टियां गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। रेल इंजन, सीमेंट के हाथी और जिराफ बदरंग हो गए हैं। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि शीघ्र ही पार्क को फिर दुरुस्त किया जाएगा।
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रात में सुरक्षा नहीं
अंधेरा पसरते ही सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट असुरक्षित हो जाता है। शाम ढलते ही सड़क पर आवाजाही कम हो जाती है। इस कारण अभिभावक शाम के समय बच्चों को साथ लेकर सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में आने से बचते हैं। रात में यहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।