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सर्किल रेट ने बढ़ाए दुकानों के दाम, सिकमी किरायेदारों ने नहीं कराई अपने नाम
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झांसी। नगर निगम की दुकानों पर जमे बैठे सिकमी दुकानदारों ने नामांतरण कराने से हाथ खींच लिए हैं। सर्किल रेट से 250 रुपये प्रतिमाह का किराया करीब तीन हजार रुपये और नामांतरण के लिए करीब 20 से 30 लाख रुपये खर्च होने के चलते दुकानदार आगे ही नहीं आए। हालात यह हुए कि 253 दुकानदारों में से महज दो दुकानदारों ने ही नामांतरण कराया। जबकि नगर निगम को सिकमी दुकानदारों से आय होने की बड़ी उम्मीद थी।
पूरे महानगर में नगर निगम की करीब 1200 दुकानें हैं। जिनको नगर निगम ने किराये पर लोगों को व्यापार करने के लिए दिया हुआ है। कुछ जगहों पर दुकान के मूल आवंटियों ने दुकान किरायेदारों को दे दी। जिन्हें सिकमी किरायेदार कहा गया। नगर निगम ने कुछ महीने पहले दुकानों का सर्वे कराया, तो पता लगा कि नगर निगम की 253 दुकानें सिकमी किरायेदारों के हवाले हैं।
नगर निगम की बैठक में सिकमी किरायेदारों से किराया लेने का मुद्दा उठा, तो तय किया गया कि सर्किल रेट के आधार पर किराया तय करके सिकमी किरायेदार को मूल दुकानदार बना दिया जाएगा। इससे नगर निगम को भी बड़ी आय की उम्मीद थी। सिकमी किरायेदारों ने जब नामांतरण प्रक्रिया को लेकर पड़ताल शुरू की, तो पता लगा कि एक दुकान के लिए सर्किल रेट के हिसाब से 20 से 30 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। जबकि फड़ का शुल्क तो 80 लाख रुपये तक है। इसके साथ ही 250 से 500 रुपये प्रतिमाह वाला किराया भी सर्किल रेट के हिसाब से बढ़कर तीन से चार हजार रुपये तक हो जाएगा।
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ऐसे में 253 में से महज दो सिकमी किरायेदारों ने ही नामांतरण कराया है। इससे नगर निगम की आय की मंशा पर भी पानी फिर गया। संपत्ति अधिकारी एनएन वाजपेई का कहना है अब इस संबंध में नया फैसला होने के बाद ही अगली कार्रवाई होगी।
महानगर की प्राइम लोकेशन पर हैं दुकानें
नगर निगम की इन दुकानोें के रेट इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि ये सभी दुकानें महानगर की प्राइम लोकेशन पर हैं। इनमें इलाइट चौराहा, जीवनशाह तिराहा, सुभाषगंज, सीपरी बाजार, मंडी समिति, बिजौली, नई तहसील पास शामिल हैं।
जुर्माना भी नहीं वसूल सका निगम प्रशासन
नगर निगम की कई दुकानों में बदलाव करके कई नई दुकानें बना लीं गईं। दुकानों में बेसमेंट बनाकर उसका इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। एक दुकान की जगह चार किरायेदारों को दुकान थमा दी गई, लेकिन निगम के किराये में बढ़ोतरी नहीं हुई। ऐसे दुकानदारों से 50 हजार रुपया जुर्माना वसूलने का भी निर्णय हुआ, लेकिन इनसे जुर्माना नहीं वसूला जा सका।
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पूरे महानगर में नगर निगम की करीब 1200 दुकानें हैं। जिनको नगर निगम ने किराये पर लोगों को व्यापार करने के लिए दिया हुआ है। कुछ जगहों पर दुकान के मूल आवंटियों ने दुकान किरायेदारों को दे दी। जिन्हें सिकमी किरायेदार कहा गया। नगर निगम ने कुछ महीने पहले दुकानों का सर्वे कराया, तो पता लगा कि नगर निगम की 253 दुकानें सिकमी किरायेदारों के हवाले हैं।
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नगर निगम की बैठक में सिकमी किरायेदारों से किराया लेने का मुद्दा उठा, तो तय किया गया कि सर्किल रेट के आधार पर किराया तय करके सिकमी किरायेदार को मूल दुकानदार बना दिया जाएगा। इससे नगर निगम को भी बड़ी आय की उम्मीद थी। सिकमी किरायेदारों ने जब नामांतरण प्रक्रिया को लेकर पड़ताल शुरू की, तो पता लगा कि एक दुकान के लिए सर्किल रेट के हिसाब से 20 से 30 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। जबकि फड़ का शुल्क तो 80 लाख रुपये तक है। इसके साथ ही 250 से 500 रुपये प्रतिमाह वाला किराया भी सर्किल रेट के हिसाब से बढ़कर तीन से चार हजार रुपये तक हो जाएगा।
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ऐसे में 253 में से महज दो सिकमी किरायेदारों ने ही नामांतरण कराया है। इससे नगर निगम की आय की मंशा पर भी पानी फिर गया। संपत्ति अधिकारी एनएन वाजपेई का कहना है अब इस संबंध में नया फैसला होने के बाद ही अगली कार्रवाई होगी।
महानगर की प्राइम लोकेशन पर हैं दुकानें
नगर निगम की इन दुकानोें के रेट इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि ये सभी दुकानें महानगर की प्राइम लोकेशन पर हैं। इनमें इलाइट चौराहा, जीवनशाह तिराहा, सुभाषगंज, सीपरी बाजार, मंडी समिति, बिजौली, नई तहसील पास शामिल हैं।
जुर्माना भी नहीं वसूल सका निगम प्रशासन
नगर निगम की कई दुकानों में बदलाव करके कई नई दुकानें बना लीं गईं। दुकानों में बेसमेंट बनाकर उसका इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। एक दुकान की जगह चार किरायेदारों को दुकान थमा दी गई, लेकिन निगम के किराये में बढ़ोतरी नहीं हुई। ऐसे दुकानदारों से 50 हजार रुपया जुर्माना वसूलने का भी निर्णय हुआ, लेकिन इनसे जुर्माना नहीं वसूला जा सका।