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बच्चों में पांच साल में पांच गुना रफ्तार से बढ़ी टाइप टू डायबिटीज
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बच्चों में पांच साल में पांच गुना रफ्तार से बढ़ी टाइप टू डायबिटीज
झांसी। हर मां-बाप के लिए यह खबर चौंकाने वाली है। सुस्त जीवनशैली, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, मोटापा आदि बच्चों को टाइप-2 मधुमेह दे रहा है। मेडिकल कॉलेज के ही आंकड़ों पर गौर करें तो पहले साल भर में जहां बच्चों में इक्का-दुक्का टाइप-2 डायबिटीज के मामले सामने आते थे, अब हर वर्ष 10 से 12 बच्चों में इसकी पुष्टि हो रही है।
अब तक बच्चों में ज्यादातर टाइप-1 डायबिटीज के मामले देखने को मिलते थे लेकिन बदली दिनचर्या के चलते टाइप-2 मधुमेह भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक टाइप-2 मधुमेह जीवनशैली विकारों से होता है। परिवारों में इकलौते बच्चे का चलन बढ़ने के साथ मोटापा और मधुमेह भी बढ़ा है। अभिभावक बच्चों को जंक फूड और चॉकलेट तो देते ही हैं। साथ में व्यायाम से भी दूर रखते हैं। कंप्यूटर, लैपटॉप, वीडियो गेम्स और मोबाइल गेम्स से ही बच्चे का खेलकूद पूरा हो जाता है। इन सब वजहों से बच्चों में अब टाइप-2 डायबिटीज के भी मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज में ही पांच सालों में सालाना दो से मामले बढ़कर 10 से 12 पहुंच गए हैं। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में भी इसी रफ्तार से मरीज बढ़ रहे हैं।
इंसुलिन बनती है पर काम नहीं करती
बच्चों में टाइप-2 प्रकाश की मधुमेह ज्यादा चिंता का विषय है। इसमें इंसुलिन बनती है, लेकिन काम नहीं करती। यह जीवनशैली के कारण होने वाली मधुमेह है। एक शोध में मेट्रो शहरों का हर चौथा बच्चा और गैर मेट्रो शहरों का हर छठा बच्चा मोटापे का शिकार पाया गया।
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ये भी जानें
- डायबिटीज टाइप-2 बहुत अधिक फैट, हाई बीपी, समय पर न सोने, सुबह देर तक सोने, बहुत अधिक नशा करना और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण भी होती है।
- डायबिटीज टाइप-2 का एक कारण शरीर में इंसुलिन कम बनना भी होता है। ऐसा कुछ शारीरिक कारणों या गलत खानपान के कारण भी हो सकता है।
- इंसुलिन कम बनने से रक्त में मौजूद कोशिकाएं इस हार्मोन के प्रति बहुत कम संवेदनशीलता दिखाती हैं। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है और व्यक्ति डायबिटीज टाइप-2 का शिकार हो जाता है।
ये ध्यान दें
- अगर बच्चे को डायबिटीज है तो उसके खानपान पर विशेष ध्यान दें।
- नियमित रूप से रक्त की जांच कराएं। दवाएं दें, डॉक्टर से संपर्क करें।
- डायट चार्ट के अनुसार बच्चों को भोजन दें।
- कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, चॉकलेट, मिठाई, चावल, आलू से परहेज करें।
- संतुलित और पौष्टिक आहार दें। ज्यादा देर तक बच्चे को खाली पेट न रखें।
- मोटे अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों में भी मधुमेह की जांच कराएं।
- बच्चा स्कूल कैंटीन या बाहर क्या खाता है, इस बारे में उससे पता करें।
ये बोले डॉक्टर
.....................
पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, अब मोबाइल पर जमे रहते हैं। यह टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है। जंक फूड, कोल्डड्रिंक, चॉकलेट खूब खाने से भी यह बीमारी पिछले पांच साल में पांच गुनी रफ्तार से बढ़ी है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
जंक फूड और कम फिजिकल एक्टिविटी, इंटरनेट पर दिनभर समय बिताने के कारण बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज अब तेजी से बढ़ रही है। पांच साल पहले तक इक्का-दुक्का मामला साल में आता था, अब हर वर्ष दस से 12 केस आ रहे हैं। - डॉ. रजत जैन, फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज।
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झांसी। हर मां-बाप के लिए यह खबर चौंकाने वाली है। सुस्त जीवनशैली, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, मोटापा आदि बच्चों को टाइप-2 मधुमेह दे रहा है। मेडिकल कॉलेज के ही आंकड़ों पर गौर करें तो पहले साल भर में जहां बच्चों में इक्का-दुक्का टाइप-2 डायबिटीज के मामले सामने आते थे, अब हर वर्ष 10 से 12 बच्चों में इसकी पुष्टि हो रही है।
अब तक बच्चों में ज्यादातर टाइप-1 डायबिटीज के मामले देखने को मिलते थे लेकिन बदली दिनचर्या के चलते टाइप-2 मधुमेह भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक टाइप-2 मधुमेह जीवनशैली विकारों से होता है। परिवारों में इकलौते बच्चे का चलन बढ़ने के साथ मोटापा और मधुमेह भी बढ़ा है। अभिभावक बच्चों को जंक फूड और चॉकलेट तो देते ही हैं। साथ में व्यायाम से भी दूर रखते हैं। कंप्यूटर, लैपटॉप, वीडियो गेम्स और मोबाइल गेम्स से ही बच्चे का खेलकूद पूरा हो जाता है। इन सब वजहों से बच्चों में अब टाइप-2 डायबिटीज के भी मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज में ही पांच सालों में सालाना दो से मामले बढ़कर 10 से 12 पहुंच गए हैं। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में भी इसी रफ्तार से मरीज बढ़ रहे हैं।
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इंसुलिन बनती है पर काम नहीं करती
बच्चों में टाइप-2 प्रकाश की मधुमेह ज्यादा चिंता का विषय है। इसमें इंसुलिन बनती है, लेकिन काम नहीं करती। यह जीवनशैली के कारण होने वाली मधुमेह है। एक शोध में मेट्रो शहरों का हर चौथा बच्चा और गैर मेट्रो शहरों का हर छठा बच्चा मोटापे का शिकार पाया गया।
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ये भी जानें
- डायबिटीज टाइप-2 बहुत अधिक फैट, हाई बीपी, समय पर न सोने, सुबह देर तक सोने, बहुत अधिक नशा करना और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण भी होती है।
- डायबिटीज टाइप-2 का एक कारण शरीर में इंसुलिन कम बनना भी होता है। ऐसा कुछ शारीरिक कारणों या गलत खानपान के कारण भी हो सकता है।
- इंसुलिन कम बनने से रक्त में मौजूद कोशिकाएं इस हार्मोन के प्रति बहुत कम संवेदनशीलता दिखाती हैं। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है और व्यक्ति डायबिटीज टाइप-2 का शिकार हो जाता है।
ये ध्यान दें
- अगर बच्चे को डायबिटीज है तो उसके खानपान पर विशेष ध्यान दें।
- नियमित रूप से रक्त की जांच कराएं। दवाएं दें, डॉक्टर से संपर्क करें।
- डायट चार्ट के अनुसार बच्चों को भोजन दें।
- कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, चॉकलेट, मिठाई, चावल, आलू से परहेज करें।
- संतुलित और पौष्टिक आहार दें। ज्यादा देर तक बच्चे को खाली पेट न रखें।
- मोटे अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों में भी मधुमेह की जांच कराएं।
- बच्चा स्कूल कैंटीन या बाहर क्या खाता है, इस बारे में उससे पता करें।
ये बोले डॉक्टर
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पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, अब मोबाइल पर जमे रहते हैं। यह टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है। जंक फूड, कोल्डड्रिंक, चॉकलेट खूब खाने से भी यह बीमारी पिछले पांच साल में पांच गुनी रफ्तार से बढ़ी है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
जंक फूड और कम फिजिकल एक्टिविटी, इंटरनेट पर दिनभर समय बिताने के कारण बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज अब तेजी से बढ़ रही है। पांच साल पहले तक इक्का-दुक्का मामला साल में आता था, अब हर वर्ष दस से 12 केस आ रहे हैं। - डॉ. रजत जैन, फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज।