{"_id":"604bcb738ebc3ec4ac0686ab","slug":"central-laparwahi-jhansi-news-jhs190716958","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंकों की लापरवाही ने डुबाया 32 हजार किसानों का फसली बीमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंकों की लापरवाही ने डुबाया 32 हजार किसानों का फसली बीमा
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झांसी। बैंकों की लापरवाही से 32 हजार से अधिक किसानों का फसली बीमा डूबने की कगार पर पहुंच चुका है। बैंकों ने इन किसानों के खाते से प्रीमियम राशि काट ली लेकिन, उसे बीमा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। अब इसकी आड़ लेकर बीमा कंपनी ने किसानों को भुगतान करने से पल्ला झाड़ लिया। नुकसान से परेशान किसान अफसरोें के चक्कर काट रहे हैं लेकिन, बीमा मिलने की बात कोई भी अफसर नहीं बता पा रहा।
फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आरंभ की। इसमें केंद्र एवं राज्य सरकार की हिस्सेदारी के साथ ही किसानों को भी प्रीमियम में अंशदान करना होता है। खरीफ बीमा 2019 के लिए जनपद के 205160 किसानों ने बीमा कराया लेकिन, सितंबर माह में भारी बारिश हो गई। इस वजह से मूंगफली, उर्द, मूंग की फसल को बुरी तरह नुकसान हुआ। किसानों के पास बीज निकालने लायक फसल भी नहीं बची। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने सत्यापन शुरू कराया। कंपनी ने पोर्टल के मुताबिक 1.30 लाख किसानों के दावे को सही पाया। बड़ी संख्या में किसान दायरे में ही नहीं आए। इस मामले की जब जांच शुरू हुई तब बैंकों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई। मालूम चला कि 32727 किसानों का डेटा प्रीमियम काटने के बावजूद उसको पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया।
इतनी बड़ी गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद अफसरों में हड़कंप मच गया। अपनी गर्दन बचाने को बीमा कंपनी, बैंक एवं कृषि अधिकारी एक दूसरे पर आरोप मढ़ने लगे। अक्तूबर माह में केंद्रीय पोर्टल खोले जाने को लेकर शासन को पत्र भेजा गया लेकिन, उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। शासन ने पोर्टल नहीं खोला। इस वजह से अभी तक इन किसानों के नाम पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सके। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद बैंकोें को गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इन किसानों के नुकसान की भरपाई के निर्देश दिए गए लेकिन, अभी तक बैंकोें की ओर से कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया गया। उधर, पिछले करीब डेढ़ साल से मुआवजा का पैसा न मिलने से किसान परेशान हैं। रोजाना किसान अफसरों के चक्कर काट रहे लेकिन, अफसर भी उनको बीमा की रकम कब तक मिल पाएगी, इस बारे में कुूछ नहीं बता पा रहे हैं।
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डेटा न मिलने से 19 हजार किसान हुए बाहर
खरीफ-2019 में बीमा का प्रीमियम देने के बाद किसानों के विवरण सही न होने पर 19155 किसानोें को भी योजना से बाहर कर दिया गया। इन किसानों के नाम तो पोर्टल पर अपलोड हैं लेकिन, किसान बही, आधार, बैंक खाता संख्या जैसे विवरण अपलोड नहीं हो सके। इस वजह से 19 हजार किसानों को भी योजना से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
एक नजर में आंकड़े
कुल बीमित किसान 205160
बीमित क्षेत्रफल 165516.04 हेक्टेयर
बीमा कंपनी को मिली धनराशि 49.26 करोड़
लाभान्वित किसानों की संख्या 155026
केंद्र सरकार ने इस योजना का सबसे ज्यादा प्रचार किया लेकिन, बुंदेलखंड के किसानों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा। उनसे प्रीमियम भी वसूला गया और डेढ़ साल बाद भी फसल क्षतिपूर्ति नहीं मिली। क्षतिपूर्ति न मिलने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
शिवनारायण परिहार, प्रदेश किसान कांग्रेस अध्यक्ष
इस मामले को लेकर बीमा कंपनी एवं बैंक अधिकारियों से बात की गई है। अब बैंकों को क्षतिपूर्ति के भुगतान के लिए कहा गया है। उनकी ओर से जल्द ही भुगतान कराया जाएगा।
कमलेश सिंह
प्रभारी डीडी, कृषि
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फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आरंभ की। इसमें केंद्र एवं राज्य सरकार की हिस्सेदारी के साथ ही किसानों को भी प्रीमियम में अंशदान करना होता है। खरीफ बीमा 2019 के लिए जनपद के 205160 किसानों ने बीमा कराया लेकिन, सितंबर माह में भारी बारिश हो गई। इस वजह से मूंगफली, उर्द, मूंग की फसल को बुरी तरह नुकसान हुआ। किसानों के पास बीज निकालने लायक फसल भी नहीं बची। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने सत्यापन शुरू कराया। कंपनी ने पोर्टल के मुताबिक 1.30 लाख किसानों के दावे को सही पाया। बड़ी संख्या में किसान दायरे में ही नहीं आए। इस मामले की जब जांच शुरू हुई तब बैंकों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई। मालूम चला कि 32727 किसानों का डेटा प्रीमियम काटने के बावजूद उसको पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया।
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इतनी बड़ी गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद अफसरों में हड़कंप मच गया। अपनी गर्दन बचाने को बीमा कंपनी, बैंक एवं कृषि अधिकारी एक दूसरे पर आरोप मढ़ने लगे। अक्तूबर माह में केंद्रीय पोर्टल खोले जाने को लेकर शासन को पत्र भेजा गया लेकिन, उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। शासन ने पोर्टल नहीं खोला। इस वजह से अभी तक इन किसानों के नाम पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सके। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद बैंकोें को गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इन किसानों के नुकसान की भरपाई के निर्देश दिए गए लेकिन, अभी तक बैंकोें की ओर से कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया गया। उधर, पिछले करीब डेढ़ साल से मुआवजा का पैसा न मिलने से किसान परेशान हैं। रोजाना किसान अफसरों के चक्कर काट रहे लेकिन, अफसर भी उनको बीमा की रकम कब तक मिल पाएगी, इस बारे में कुूछ नहीं बता पा रहे हैं।
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डेटा न मिलने से 19 हजार किसान हुए बाहर
खरीफ-2019 में बीमा का प्रीमियम देने के बाद किसानों के विवरण सही न होने पर 19155 किसानोें को भी योजना से बाहर कर दिया गया। इन किसानों के नाम तो पोर्टल पर अपलोड हैं लेकिन, किसान बही, आधार, बैंक खाता संख्या जैसे विवरण अपलोड नहीं हो सके। इस वजह से 19 हजार किसानों को भी योजना से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
एक नजर में आंकड़े
कुल बीमित किसान 205160
बीमित क्षेत्रफल 165516.04 हेक्टेयर
बीमा कंपनी को मिली धनराशि 49.26 करोड़
लाभान्वित किसानों की संख्या 155026
केंद्र सरकार ने इस योजना का सबसे ज्यादा प्रचार किया लेकिन, बुंदेलखंड के किसानों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा। उनसे प्रीमियम भी वसूला गया और डेढ़ साल बाद भी फसल क्षतिपूर्ति नहीं मिली। क्षतिपूर्ति न मिलने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
शिवनारायण परिहार, प्रदेश किसान कांग्रेस अध्यक्ष
इस मामले को लेकर बीमा कंपनी एवं बैंक अधिकारियों से बात की गई है। अब बैंकों को क्षतिपूर्ति के भुगतान के लिए कहा गया है। उनकी ओर से जल्द ही भुगतान कराया जाएगा।
कमलेश सिंह
प्रभारी डीडी, कृषि