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Jhansi News: फर्जी फर्म बनाने में उजागर हो चुकी सेंट्रल जीएसटी अफसरों की मिलीभगत
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सेंट्रल जीएसटी अफसरों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को चपत लगाए जाने का भी खेल काफी समय से चल रहा था। इसका भंडाफोड़ भी पिछले महीने ही हुआ। उसके बाद से ही सेंट्रल जीएसटी के अफसर सीबीआई के रडार पर आ गए थे। उस दौरान झांसी मंडल में 17 बोगस फर्म पकड़ी गई। साठगांठ करके इनको सिर्फ कागजों में बनाया गया था। इनके सहारे करीब 25 करोड़ रुपये का आरटीसी इनपुट क्रेडिट क्लेम का लेनदेन पकड़ में आया था। अभी तक की छानबीन में इस रैकेट के तार झांसी से लेकर मुरादाबाद, लखनऊ, महाराष्ट्र एवं गुजरात तक से जुडे हैं।
झांसी परिक्षेत्र में कुल 71,861 फर्म जीएसटी में पंजीकृत हैं, इनमें 41,330 फर्म राज्य जीएसटी और 30,511 फर्म सेंट्रल जीएसटी के दायरे में हैं। नवंबर में मुरादाबाद एवं लखनऊ में फर्जी फर्मों की जांच के बाद झांसी मंडल में 17 फर्में सिर्फ कागजों पर कारोबार करती पाई गईं। जांच करने पर मालूम चला कि बगैर खरीद किए ही इनकी ओर से माल बिक्री दिखाई गई थी। खरीद और बिक्री के बीच बड़ा अंतर मिला। फर्जी दस्तावेजों के सहारे इन फर्मों का सीजीएसटी के माध्यम से पंजीकरण कराया गया था। पंजीकरण के बाद से इन्होंने 25 करोड़ रुपये की चपत लगाई।
इन बोगस फर्म की पड़ताल में मालूम चला कि इनका पंजीकरण बिना सत्यापन कराए कर दिया गया जबकि नियमों के मुताबिक विभागीय जांच जैसी औपचारिकताएं भी नहीं पूरी की गईं। फार्म अपलोड होने के कुछ दिनों के भीतर ही इनको जीएसटी नंबर आवंटित हो गए। इन फर्म की आड़ में जमकर खेल हुआ।
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इन फर्मों में मिली सबसे अधिक गड़बड़ी
विजय ट्रेडर्स (पंजीकरण : मई 2025) ने रेडीमेड वस्त्र कारोबार के नाम पर पंजीकरण कराया। आधार व पैन नंबर प्रयागराज के लगाए जबकि उल्दन का पता लगाया गया। जांच में यह सही नहीं मिला। डीके इंटरप्राइजेज ने जेल चौराहा को अपना पता बताया लेकिन मौके पर फर्म नहीं मिली। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बंद मिला। फर्म ने 5.51 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई। बिक्री दर्ज नहीं की गई। इस तरह सरकारी खजाने को चपत लगाई गई। आरके इंटरप्राइजेज ने भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराया। बिजली बिल की जांच में पता किसी अन्य का मिला। खजाने को करीब तीन करोड़ की चपत लगाई। एआर इंटरप्राइजेज और एसबी इंटरप्राइजेज (राजगढ़, झांसी) चमड़ा कारोबार के नाम पर पंजीकृत थे। जीएसटी पंजीयन में उपयोग किए गए बिजली बिल फर्जी पाए गए। मौके पर कोई फर्म नहीं मिली।
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झांसी। सेंट्रल जीएसटी अफसरों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को चपत लगाए जाने का भी खेल काफी समय से चल रहा था। इसका भंडाफोड़ भी पिछले महीने ही हुआ। उसके बाद से ही सेंट्रल जीएसटी के अफसर सीबीआई के रडार पर आ गए थे। उस दौरान झांसी मंडल में 17 बोगस फर्म पकड़ी गई। साठगांठ करके इनको सिर्फ कागजों में बनाया गया था। इनके सहारे करीब 25 करोड़ रुपये का आरटीसी इनपुट क्रेडिट क्लेम का लेनदेन पकड़ में आया था। अभी तक की छानबीन में इस रैकेट के तार झांसी से लेकर मुरादाबाद, लखनऊ, महाराष्ट्र एवं गुजरात तक से जुडे हैं।
झांसी परिक्षेत्र में कुल 71,861 फर्म जीएसटी में पंजीकृत हैं, इनमें 41,330 फर्म राज्य जीएसटी और 30,511 फर्म सेंट्रल जीएसटी के दायरे में हैं। नवंबर में मुरादाबाद एवं लखनऊ में फर्जी फर्मों की जांच के बाद झांसी मंडल में 17 फर्में सिर्फ कागजों पर कारोबार करती पाई गईं। जांच करने पर मालूम चला कि बगैर खरीद किए ही इनकी ओर से माल बिक्री दिखाई गई थी। खरीद और बिक्री के बीच बड़ा अंतर मिला। फर्जी दस्तावेजों के सहारे इन फर्मों का सीजीएसटी के माध्यम से पंजीकरण कराया गया था। पंजीकरण के बाद से इन्होंने 25 करोड़ रुपये की चपत लगाई।
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इन बोगस फर्म की पड़ताल में मालूम चला कि इनका पंजीकरण बिना सत्यापन कराए कर दिया गया जबकि नियमों के मुताबिक विभागीय जांच जैसी औपचारिकताएं भी नहीं पूरी की गईं। फार्म अपलोड होने के कुछ दिनों के भीतर ही इनको जीएसटी नंबर आवंटित हो गए। इन फर्म की आड़ में जमकर खेल हुआ।
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इन फर्मों में मिली सबसे अधिक गड़बड़ी
विजय ट्रेडर्स (पंजीकरण : मई 2025) ने रेडीमेड वस्त्र कारोबार के नाम पर पंजीकरण कराया। आधार व पैन नंबर प्रयागराज के लगाए जबकि उल्दन का पता लगाया गया। जांच में यह सही नहीं मिला। डीके इंटरप्राइजेज ने जेल चौराहा को अपना पता बताया लेकिन मौके पर फर्म नहीं मिली। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बंद मिला। फर्म ने 5.51 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई। बिक्री दर्ज नहीं की गई। इस तरह सरकारी खजाने को चपत लगाई गई। आरके इंटरप्राइजेज ने भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराया। बिजली बिल की जांच में पता किसी अन्य का मिला। खजाने को करीब तीन करोड़ की चपत लगाई। एआर इंटरप्राइजेज और एसबी इंटरप्राइजेज (राजगढ़, झांसी) चमड़ा कारोबार के नाम पर पंजीकृत थे। जीएसटी पंजीयन में उपयोग किए गए बिजली बिल फर्जी पाए गए। मौके पर कोई फर्म नहीं मिली।