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छात्रों ने जानी बुंदेलखंड की वास्तुकला
Jhansi
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:12 AM IST
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BU Univercity
- फोटो : demo
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विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से राजकीय महिला महाविद्यालय और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को बुंदेलखंड के एतिहासिक किलों, भवनों की वास्तुकला से अवगत कराया गया।
विश्वविद्यालय में पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने विद्यार्थियों को बुंदेलखंड के सैकड़ों वर्ष पुराने और मंदिरों व किलों के बारे में प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया। उनकी वास्तुकला व बनावट की बारीकियों से परिचय कराया। उन्होंने कहा कि किसी भी भवन के निर्माण के लिए बनायी जाने वाली योजना में पुरानी डिजाइनों क ा उपयोग कर उसे और अधिक भव्य बनाया जा सकता है।
वहीं राजकीय संग्रहालय में लगी प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र कालिंजर से आयी गुरु गोरखनाथ व मत्स्येंद्र नाथ की एक हजार वर्ष पुरानी प्रतिमा रही। जिसका निर्माण पत्थर की चट्टान पर चंदेल राजाओं ने कराया। इसके अलावा टोड़ी के राजा भानु प्रताप द्वारा लगाए गए रानी लक्ष्मीबाई के पत्र भी आकर्षण का केंद्र रहा। प्रदर्शनी का समापन 25 नवंबर को होगा।
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विश्वविद्यालय में पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे ने विद्यार्थियों को बुंदेलखंड के सैकड़ों वर्ष पुराने और मंदिरों व किलों के बारे में प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया। उनकी वास्तुकला व बनावट की बारीकियों से परिचय कराया। उन्होंने कहा कि किसी भी भवन के निर्माण के लिए बनायी जाने वाली योजना में पुरानी डिजाइनों क ा उपयोग कर उसे और अधिक भव्य बनाया जा सकता है।
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वहीं राजकीय संग्रहालय में लगी प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र कालिंजर से आयी गुरु गोरखनाथ व मत्स्येंद्र नाथ की एक हजार वर्ष पुरानी प्रतिमा रही। जिसका निर्माण पत्थर की चट्टान पर चंदेल राजाओं ने कराया। इसके अलावा टोड़ी के राजा भानु प्रताप द्वारा लगाए गए रानी लक्ष्मीबाई के पत्र भी आकर्षण का केंद्र रहा। प्रदर्शनी का समापन 25 नवंबर को होगा।
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