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बीयू में पीवीसी के लिए कमरे की खोज ने गरमाया माहौल
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में नवनियुक्त प्रति कुलपति के ऑफिस के लिए कमरे की खोज ने माहौल गरमाया दिया है। प्रति कुलपति प्रशासनिक भवन में ही बैठने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए कुलसचिव से कमरा खाली करने को कहा तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। अब कमरे की खोज जारी है।
बीयू में इन दिनों काफी घमासान मचा हुआ है। वरिष्ठों को दरकिनार करते हुए कनिष्ठ प्रोफेसर को प्रति कुलपति का चार्ज मिलना कई आचार्यों को अखर रहा है। इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिरकार जूनियर को प्रति कुलपति क्यों बनाया गया? क्या उनसे वरिष्ठ प्रोफेसर अयोग्य हैं। अब विवाद उनके ऑफिस को लेकर शुरू हो गया है। सूत्रों ने बताया कि प्रति कुलपति के लिए बीयू प्रशासन ने कुलसचिव से कमरा खाली करने को कहा तो उन्होंने इंकार कर दिया। कुलसचिव ने साफ कह दिया कि वह अपनी मर्जी से इस कक्ष में नहीं बैठे। जब से उन्होंने बीयू में कार्यभार संभाला है, तब से यही कुलसचिव का कक्ष है। पहले भी कुलसचिव इसी कक्ष में बैठते थे। इसके बाद हाल में ही कार्यभार संभालने वाले परीक्षा नियंत्रक से कमरा खाली करने को कहा गया। इस पर परीक्षा नियंत्रक ने भी कह दिया कि उनके कमरे से लगा हुआ गोपनीय कक्ष बना हुआ है। ऐसे में वह उचित स्थान पर बैठे हुए हैं। अब कमरे का ये विवाद कितना खिंचता है, ये देखने वाली बात होगी।
दोबारा डीन बनाने पर भी लगी आपत्ति
पीवीसी ही डीन इंजीनियरिंग हैं। डीन का कार्यकाल तीन साल का होता है। विवि अधिनियम की धारा 27 के बिंदु चार में स्पष्ट है कि हर संकाय का डीन वरिष्ठता के क्रम में चक्रानुक्रम द्वारा प्रोफेसरों में से चुना जाएगा। सूत्रों ने बताया कि कुलसचिव के पास पीवीसी को ही दोबारा डीन इंजीनियरिंग बनाने की फाइल भेजी गई। जिस पर उन्होंने इस नियम का हवाला देते हुए फाइल वापस लौटा दी।
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धारा 14 के तहत वीसी को किसी भी प्रोफेसर को पीवीसी बनाने का अधिकार है। कमरे का कोई विवाद नहीं है। ये आंतरिक मामला है। निपट जाएगा। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बीयू।
मुझे इस प्रकरण में कुछ भी टिप्पणी नहीं करनी है। ये विश्वविद्यालय का आंतरिक मामला है। जो भी बात है, वो कुलपति के समक्ष रखी जा चुकी है। - नारायण प्रसाद, कुलसचिव, बीयू।
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बीयू में इन दिनों काफी घमासान मचा हुआ है। वरिष्ठों को दरकिनार करते हुए कनिष्ठ प्रोफेसर को प्रति कुलपति का चार्ज मिलना कई आचार्यों को अखर रहा है। इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिरकार जूनियर को प्रति कुलपति क्यों बनाया गया? क्या उनसे वरिष्ठ प्रोफेसर अयोग्य हैं। अब विवाद उनके ऑफिस को लेकर शुरू हो गया है। सूत्रों ने बताया कि प्रति कुलपति के लिए बीयू प्रशासन ने कुलसचिव से कमरा खाली करने को कहा तो उन्होंने इंकार कर दिया। कुलसचिव ने साफ कह दिया कि वह अपनी मर्जी से इस कक्ष में नहीं बैठे। जब से उन्होंने बीयू में कार्यभार संभाला है, तब से यही कुलसचिव का कक्ष है। पहले भी कुलसचिव इसी कक्ष में बैठते थे। इसके बाद हाल में ही कार्यभार संभालने वाले परीक्षा नियंत्रक से कमरा खाली करने को कहा गया। इस पर परीक्षा नियंत्रक ने भी कह दिया कि उनके कमरे से लगा हुआ गोपनीय कक्ष बना हुआ है। ऐसे में वह उचित स्थान पर बैठे हुए हैं। अब कमरे का ये विवाद कितना खिंचता है, ये देखने वाली बात होगी।
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दोबारा डीन बनाने पर भी लगी आपत्ति
पीवीसी ही डीन इंजीनियरिंग हैं। डीन का कार्यकाल तीन साल का होता है। विवि अधिनियम की धारा 27 के बिंदु चार में स्पष्ट है कि हर संकाय का डीन वरिष्ठता के क्रम में चक्रानुक्रम द्वारा प्रोफेसरों में से चुना जाएगा। सूत्रों ने बताया कि कुलसचिव के पास पीवीसी को ही दोबारा डीन इंजीनियरिंग बनाने की फाइल भेजी गई। जिस पर उन्होंने इस नियम का हवाला देते हुए फाइल वापस लौटा दी।
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धारा 14 के तहत वीसी को किसी भी प्रोफेसर को पीवीसी बनाने का अधिकार है। कमरे का कोई विवाद नहीं है। ये आंतरिक मामला है। निपट जाएगा। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बीयू।
मुझे इस प्रकरण में कुछ भी टिप्पणी नहीं करनी है। ये विश्वविद्यालय का आंतरिक मामला है। जो भी बात है, वो कुलपति के समक्ष रखी जा चुकी है। - नारायण प्रसाद, कुलसचिव, बीयू।