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दवाओं पर चल रहा जरूरी काम पर नहीं मिल रहा सटीक परिणाम

Mon, 06 Jun 2022 01:12 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 01:12 AM IST
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bundelkhand university
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग में रोग से ग्रसित शारीरिक अंग अथवा हिस्से पर ही दवाओं का असर हो। शरीर के दूसरे अंगों पर दवा का दुष्प्रभाव न पड़े। इसको लेकर काम चल रहा है। मगर बीयू में सिंगल फेज होने से बिजली चली जाने, अर्थिंग न होने से वोल्टेज कम आने से शोध के सही परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। ये सिर्फ एक विभाग का ही मामला नहीं है। बीयू के कई विभागों के शिक्षक और शोधार्थी इन्हीं समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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गर्मी के दिनों में बिजली की मांग बढ़ जाती है। दूसरी तरफ घर, कार्यालय या फिर किसी संस्थान में अर्थिंग की अलग लाइन नहीं होती है तो गर्मियों में पृथ्वी की सतह काफी सूख जाने से अर्थिंग नहीं मिल पाती है। इस कारण वोल्टेज कम हो जाता है। इसी समस्या से इन दिनों बीयू के कई विभाग जूझ रहे हैं, जहां चिप बेस्ड आधुनिक मशीनें लगी हुई हैं। बताया गया कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीसीआर मशीन से डीएनए की मल्टीपल कॉपी तैयार की जाती हैं। ग्रोथ चेंबर अथवा इंक्यूबेटर से बैक्टीरिया की ग्रोथ करते हैं। बीओडी इंक्यूबेटर में सैंपल को सुरक्षित रखा जाता है। इन दिनों लगातार वोल्टेज घटने-बढ़ने से मशीनों पर चल रहा काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, वाटर टेस्टिंग लैब में लगी फ्लैम फोटोमीटर से जल में मौजूद भारी धातु का पता लगाते हैं। स्पेक्ट्रो फोटोमीटर पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए रीडिंग लेते हैं। एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सिस्टम में एंटीना लगा हुआ है। ये सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, खतरनाक ओजोन गैस, एक्यूआई आदि का पता लगाया जाता है। वोल्टेज की समस्या से इन मशीनों से सही डाटा नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों ने बताया कि चुनिंदा जगहों को छोड़कर कहीं पर भी अर्थिंग नहीं है। इसलिए वोल्टेज कम रहता है। सिंगल फेज होने से बिजली चली जाती है। इस कारण सटीक परिणाम नहीं आ पा रहे हैं।
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इस समय पृथ्वी की सतह सूखने से नहीं मिलती अर्थिंग
बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता अनुभव कुमार ने बताया कि गर्मी में पृथ्वी की सतह बहुत सूख जाती है। इस कारण नमी न होने से अर्थिंग नहीं मिल पाती है। जहां अर्थिंग की लाइन नहीं होती है, वहां काफी दिक्कत होती है। वहीं, बारिश होने पर अर्थिंग मिलने लगती है।
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आधुनिक मशीनों को अलग से लाइन डालकर बिजली दी जा रही है। यदि फिर भी कहीं समस्या आ रही है तो इसकी जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी करवाई जाएगी। - प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति, बीयू।
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