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टीचिंग का 15, नॉन टीचिंग का 20 फीसदी बढ़ा मानदेय
ब्यूरो
Updated Sat, 07 Nov 2015 01:51 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को दिवाली से पहले तोहफा मिल गया है। शासनादेश के अनुपालन में कार्य परिषद ने मानदेय बढ़ाने पर अपनी मुहर लगा दी है।
गौरतलब है कि 80-20 का शासनादेश आने के बाद कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने कमेटी का गठन कर दिया था। काफी मशक्कत और जांच पड़ताल के बाद कमेटी ने एसएफएस के टीचिंग स्टाफ के मानदेय की न्यूनतम सीमा 39 हजार निर्धारित कर दी है। वहीं, इससे अधिक पाने वालों के मानदेय में 15 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई है।
हालांकि, बताया गया कि मौजूदा समय में जो शिक्षक 39 हजार रुपये से कम (करीब तेईस सौ तक कम) मानदेय पा रहे हैं, यदि उसमें पंद्रह फीसदी जोड़ने पर धनराशि 39,000 से ज्यादा हो रही है, तो उन्हें बढ़ी हुई रकम मिलेगी। कार्य परिषद के इस फैसले से सर्वाधिक लाभ कम मानदेय पाने वालों को मिलेगा।
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वहीं, नॉन टीचिंग की बात करें तो तृतीय श्रेणी के कर्मियों को अब न्यूनतम 14 हजार रुपये तथा चतुर्थ श्रेणी वालों को 12 हजार रुपये मिलेंगे। इससे ऊपर पैसा पाने वालों के मानदेय में बीस फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। अन्य विश्वविद्यालयों की अपेक्षा बीयू द्वारा लागू किया गया मानदेय बढ़ोतरी का नियम स्टाफ के लिए काफी फायदेमंद बताया जा रहा है।
इसके अलावा टीचिंग असिस्टेंट के रूप में अपने सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए भी खुशखबरी है। अब प्रति लेक्चर 150 रुपये पाने वाले शिक्षकों को ढाई सौ तथा 300 पाने वालों को चार सौ रुपये मिलेंगे। कार्य परिषद ने इसकी भी स्वीकृति दे दी है।
शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
शासन ने नैक की तैयारियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। इसमें बी से ए ग्रेड प्राप्त करने की दिशा में किन-किन कमियों को दूर किया गया है और क्या अभी शेष रह गईं हैं, सब उपलब्ध कराना होगा। हालांकि, नैक के सुझाव अनुसार अधिकांश निर्देशों को बीयू ने पूरा कर लिया है, इसलिए रिपोर्ट तैयार करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
प्राचार्य से स्पष्टीकरण तलब
सूत्रों ने बताया कि कार्य परिषद की बैठक में राजभवन की ओर से जारी निर्देशों के बाद बीकेडी प्राचार्य बाबूलाल तिवारी से विभिन्न मामलों में स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी ने राजभवन जाकर शिकायत की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है।
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गौरतलब है कि 80-20 का शासनादेश आने के बाद कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने कमेटी का गठन कर दिया था। काफी मशक्कत और जांच पड़ताल के बाद कमेटी ने एसएफएस के टीचिंग स्टाफ के मानदेय की न्यूनतम सीमा 39 हजार निर्धारित कर दी है। वहीं, इससे अधिक पाने वालों के मानदेय में 15 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई है।
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हालांकि, बताया गया कि मौजूदा समय में जो शिक्षक 39 हजार रुपये से कम (करीब तेईस सौ तक कम) मानदेय पा रहे हैं, यदि उसमें पंद्रह फीसदी जोड़ने पर धनराशि 39,000 से ज्यादा हो रही है, तो उन्हें बढ़ी हुई रकम मिलेगी। कार्य परिषद के इस फैसले से सर्वाधिक लाभ कम मानदेय पाने वालों को मिलेगा।
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वहीं, नॉन टीचिंग की बात करें तो तृतीय श्रेणी के कर्मियों को अब न्यूनतम 14 हजार रुपये तथा चतुर्थ श्रेणी वालों को 12 हजार रुपये मिलेंगे। इससे ऊपर पैसा पाने वालों के मानदेय में बीस फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। अन्य विश्वविद्यालयों की अपेक्षा बीयू द्वारा लागू किया गया मानदेय बढ़ोतरी का नियम स्टाफ के लिए काफी फायदेमंद बताया जा रहा है।
इसके अलावा टीचिंग असिस्टेंट के रूप में अपने सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए भी खुशखबरी है। अब प्रति लेक्चर 150 रुपये पाने वाले शिक्षकों को ढाई सौ तथा 300 पाने वालों को चार सौ रुपये मिलेंगे। कार्य परिषद ने इसकी भी स्वीकृति दे दी है।
शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
शासन ने नैक की तैयारियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। इसमें बी से ए ग्रेड प्राप्त करने की दिशा में किन-किन कमियों को दूर किया गया है और क्या अभी शेष रह गईं हैं, सब उपलब्ध कराना होगा। हालांकि, नैक के सुझाव अनुसार अधिकांश निर्देशों को बीयू ने पूरा कर लिया है, इसलिए रिपोर्ट तैयार करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
प्राचार्य से स्पष्टीकरण तलब
सूत्रों ने बताया कि कार्य परिषद की बैठक में राजभवन की ओर से जारी निर्देशों के बाद बीकेडी प्राचार्य बाबूलाल तिवारी से विभिन्न मामलों में स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी ने राजभवन जाकर शिकायत की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है।