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बड़ागांव में बुंदेलखंड का पहला फुट ओवरब्रिज तैयार
Sun, 05 May 2019 01:22 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sun, 05 May 2019 01:22 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। बुंदेलखंड का पहला फुट ओवरब्रिज बड़ागांव में बनकर तैयार हो गया है। इससे फोरलेन सड़क पार करना आसान हो गया है। दुर्घटना का खतरा भी नहीं रह गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) झांसी से कानपुर के बीच छह फुट ओवरब्रिज बनाने जा रहा है।
फोरलेन हाइवे पर तेज रफ्तार दौड़ते वाहनों के बीच से सड़क के इस पार से उस पार जाना बेहद जोखिम भरा होता है। बावजूद, अन्य कोई माध्यम न होने से लोगों को सड़क के बीच से ही गुजरना पड़ता है। इससे सड़क पर दौड़ रहे वाहनों को अचानक किसी के सामने आने पर ब्रेक लगाने पड़ जाते हैं। इस स्थिति में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। इससे निपटने के लिए एनएचएआई ने झांसी से उरई तक के सौ किलोमीटर के मार्ग पर छह फुट ओवरब्रिज बनाने की योजना तैयार की है। ये उन स्थानों पर बनाए जा रहे हैं, जहां लोगों का सड़क के इस पार से उस पार आवागमन में ज्यादा होता है।
इसी योजना के तहत पहला फुट ओवरब्रिज बड़ागांव में बनाया गया है। इस पर आवागमन शुरू हो गया है। इसके अलावा अमरा में फुट ओवरब्रिज का काम 90 फीसदी पूरा हो गया है। जबकि, भुजौंद और सेसा में ब्रिज का फाउंडेशन तैयार किया जाने लगे हैं। वहीं, दिगारा और बरल में भी ब्रिज के लिए जगह चिह्नित कर ली गई हैं। जल्द ही यहां काम शुरू कर दिया जाएगा।
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क्षेत्र में 21 ब्रिज बनाने की योजना
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की बुंदेलखंड क्षेत्र में 21 फुट ओवरब्रिज बनाने की योजना है। इन्हीं में से आधा दर्जन झांसी से उरई के बीच बनाए जा रहे हैं। जबकि, पंद्रह ओवरब्रिज बुंदेलखंड के अन्य जनपदों को आपस में जोड़ने वाले फोरलेन हाइवे पर बनाए जाएंगे। इसके लिए स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं।
आचार संहिता में फंसा चौराहा
ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर फोरलेन सड़क परियोजना के अंतर्गत एनएच 25 के झांसी बाईपास पर (ग्वालियर रोड सूती मिल के आगे नहर के पास) बनने वाले फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य 13 अक्तूबर 2006 को बंद कर दिया गया था। सेना की आपत्ति के चलते काम बंद हुआ था। उसके बाद से अब तक ये शुरू नहीं हो पाया। हाल ही में एनएचएआई को ओवरब्रिज की जगह चौराहा बनाने की मंजूरी मिली थी लेकिन इससे पहले कि काम शुरू हो पाता, लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। अब आचार संहिता खत्म होने के बाद काम शुरू होगा।
फुट ओवरब्रिज की वजह से सड़क पर दुर्घटना का खतरा बेहद कम हो जाएगा। इससे सड़क यातायात सुगम होगा, साथ ही आसपास के लोगों को सड़क पार करने में आसानी होगी। एक ब्रिज बनकर तैयार है, बाकी का काम भी तेजी से जारी है। - राजीव पाठक, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।
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फोरलेन हाइवे पर तेज रफ्तार दौड़ते वाहनों के बीच से सड़क के इस पार से उस पार जाना बेहद जोखिम भरा होता है। बावजूद, अन्य कोई माध्यम न होने से लोगों को सड़क के बीच से ही गुजरना पड़ता है। इससे सड़क पर दौड़ रहे वाहनों को अचानक किसी के सामने आने पर ब्रेक लगाने पड़ जाते हैं। इस स्थिति में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। इससे निपटने के लिए एनएचएआई ने झांसी से उरई तक के सौ किलोमीटर के मार्ग पर छह फुट ओवरब्रिज बनाने की योजना तैयार की है। ये उन स्थानों पर बनाए जा रहे हैं, जहां लोगों का सड़क के इस पार से उस पार आवागमन में ज्यादा होता है।
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इसी योजना के तहत पहला फुट ओवरब्रिज बड़ागांव में बनाया गया है। इस पर आवागमन शुरू हो गया है। इसके अलावा अमरा में फुट ओवरब्रिज का काम 90 फीसदी पूरा हो गया है। जबकि, भुजौंद और सेसा में ब्रिज का फाउंडेशन तैयार किया जाने लगे हैं। वहीं, दिगारा और बरल में भी ब्रिज के लिए जगह चिह्नित कर ली गई हैं। जल्द ही यहां काम शुरू कर दिया जाएगा।
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क्षेत्र में 21 ब्रिज बनाने की योजना
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की बुंदेलखंड क्षेत्र में 21 फुट ओवरब्रिज बनाने की योजना है। इन्हीं में से आधा दर्जन झांसी से उरई के बीच बनाए जा रहे हैं। जबकि, पंद्रह ओवरब्रिज बुंदेलखंड के अन्य जनपदों को आपस में जोड़ने वाले फोरलेन हाइवे पर बनाए जाएंगे। इसके लिए स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं।
आचार संहिता में फंसा चौराहा
ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर फोरलेन सड़क परियोजना के अंतर्गत एनएच 25 के झांसी बाईपास पर (ग्वालियर रोड सूती मिल के आगे नहर के पास) बनने वाले फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य 13 अक्तूबर 2006 को बंद कर दिया गया था। सेना की आपत्ति के चलते काम बंद हुआ था। उसके बाद से अब तक ये शुरू नहीं हो पाया। हाल ही में एनएचएआई को ओवरब्रिज की जगह चौराहा बनाने की मंजूरी मिली थी लेकिन इससे पहले कि काम शुरू हो पाता, लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। अब आचार संहिता खत्म होने के बाद काम शुरू होगा।
फुट ओवरब्रिज की वजह से सड़क पर दुर्घटना का खतरा बेहद कम हो जाएगा। इससे सड़क यातायात सुगम होगा, साथ ही आसपास के लोगों को सड़क पार करने में आसानी होगी। एक ब्रिज बनकर तैयार है, बाकी का काम भी तेजी से जारी है। - राजीव पाठक, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।