{"_id":"600730468ebc3e2c542f133b","slug":"bundelkhand-30-carore-package-not-return-jhansi-news-jhs1864942128","type":"story","status":"publish","title_hn":"लौटकर नहीं आया बुंदेलखंड पैकेज का तीस करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लौटकर नहीं आया बुंदेलखंड पैकेज का तीस करोड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। बुंदेलखंड पैकेज के जरिए लघु सिंचाई विभाग को मिले तीस करोड़ रुपये एक वर्ष बाद भी वापस नहीं मिले। जबकि पैसा मिलने की उम्मीद में महकमा तीन बार टेंडर करा चुका। अब वित्तीय वर्ष खत्म होने में महज दो माह शेष हैं, इस दौरान भी पैसा मिलने की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है।
सूखे की समस्या से निपटने के लिए झांसी को बुंदेखलंड राहत पैकेज के जरिए दो वर्ष में 30 करोड़ रुपये मिले थे। इसके जरिए 40 चैकडैम एवं 30 तालाबों का गहरीकरण कराना था। प्रोजेक्ट के मुताबिक कुरैचा, गुढ़ा, नोटा, लठेसरा, खिसनी, सरवां, डगरवाहा, अठौदना, बघौरा, दुरखरू, ककरबई, धनौरा, ठर्रो, लकारा, बसरिया, धमना, बसरिया, धौर्रा, वीरा, बिजरवारा, पूछ, शहजहांपुर, तालोड, बिठरी, पच्चरगढ़, फुलखिरीया, काडोर, बरहेटा, रानापुरा, कछीयामऊ, पसौरा, सुजवा एवं लकरा में चेकडैम बनने थे। जबकि घुराट, सिकार, सिद्घेश्वर, यारा तालाब, भुजरिया, पुतनीया बंधा, अशोकर, बड़ा तालाब, भमौरा, हनुमान मंदिर तालाब, सेमरी, शिव मंदिर तालाब, बुखारा, कुगा तालाब, फुटा तालाब, आदर्श तालब, पलरा में तालाबों का गहरीकरण होना था।
काम शुरू होने से पहले ही अभियंताओं ने ठेकेदारों के साथ मिलकर ठेकों को पूल कर दिया। हालांकि मामले का भंडा फूटते ही तत्कालीन अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया गया लेकिन, पूरा पैसा भी शासन को वापस लौटा देना पड़ा। सरकार ने इसे वित्तीय वर्ष की शुरुआत में देने की बात कही थी। इसको देखते हुए विभाग ने इन कार्यों के लिए तीन बार टेंडर भी करा दिए लेकिन, वित्तीय वर्ष खत्म होने के बावजूद पैसा नहीं आया। पैसा न आने से कराए गए टेंडर भी निरस्त कराने पड़ेंगे। अधीक्षण अभियंता आलोक सिन्हा ने जानकारी से इंकार किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूखे की समस्या से निपटने के लिए झांसी को बुंदेखलंड राहत पैकेज के जरिए दो वर्ष में 30 करोड़ रुपये मिले थे। इसके जरिए 40 चैकडैम एवं 30 तालाबों का गहरीकरण कराना था। प्रोजेक्ट के मुताबिक कुरैचा, गुढ़ा, नोटा, लठेसरा, खिसनी, सरवां, डगरवाहा, अठौदना, बघौरा, दुरखरू, ककरबई, धनौरा, ठर्रो, लकारा, बसरिया, धमना, बसरिया, धौर्रा, वीरा, बिजरवारा, पूछ, शहजहांपुर, तालोड, बिठरी, पच्चरगढ़, फुलखिरीया, काडोर, बरहेटा, रानापुरा, कछीयामऊ, पसौरा, सुजवा एवं लकरा में चेकडैम बनने थे। जबकि घुराट, सिकार, सिद्घेश्वर, यारा तालाब, भुजरिया, पुतनीया बंधा, अशोकर, बड़ा तालाब, भमौरा, हनुमान मंदिर तालाब, सेमरी, शिव मंदिर तालाब, बुखारा, कुगा तालाब, फुटा तालाब, आदर्श तालब, पलरा में तालाबों का गहरीकरण होना था।
विज्ञापन
काम शुरू होने से पहले ही अभियंताओं ने ठेकेदारों के साथ मिलकर ठेकों को पूल कर दिया। हालांकि मामले का भंडा फूटते ही तत्कालीन अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया गया लेकिन, पूरा पैसा भी शासन को वापस लौटा देना पड़ा। सरकार ने इसे वित्तीय वर्ष की शुरुआत में देने की बात कही थी। इसको देखते हुए विभाग ने इन कार्यों के लिए तीन बार टेंडर भी करा दिए लेकिन, वित्तीय वर्ष खत्म होने के बावजूद पैसा नहीं आया। पैसा न आने से कराए गए टेंडर भी निरस्त कराने पड़ेंगे। अधीक्षण अभियंता आलोक सिन्हा ने जानकारी से इंकार किया है।
विज्ञापन