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बीकेडी शिक्षक की सेवा समाप्ति का आदेश स्थगित
ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2015 01:36 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड महाविद्यालय के एक शिक्षक की सेवा समाप्ति का आदेश स्थगित कर दिया गया है। प्रबंध तंत्र द्वारा साक्ष्य उपलब्ध न कराने के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
गौरतलब है कि बीकेडी के बीएड विभाग के एक सहायक प्राध्यापक पर जार पहाड़ स्थित मकान पर छात्रा के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने का आरोप लगा था। उन्हें निलंबित कर दिया गया था। निलंबन आदेश में लगे आरोपों पर जांच समिति की संस्तुति पर प्रबंधतंत्र ने शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी थी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षक के खिलाफ की गई कार्रवाई को नियमविरुद्ध मानते हुए सेवा समाप्ति का आदेश स्थगित कर दिया है। बीयू द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कुलाधिपति द्वारा 31 मार्च 2014 को बीकेडी प्रबंध समिति का अनुमोदन निरस्त कर दिया गया था। ऐसी स्थिति में प्रबंधतंत्र के पास दंडात्मक कार्रवाई का प्राधिकार नहीं बनता।
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प्रबंध तंत्र को तीन माह में जांच आख्या देने का समय दिया गया था लेकिन समिति ने ऐसा नहीं किया। शिक्षक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी का साक्ष्य व छात्रा का बयान भी उपलब्ध नहीं कराया गया। कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय का कहना है कि राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 35 के तहत नियमानुसार फैसला लिया गया है। यदि अभी भी प्रबंध तंत्र के पास कोई प्रमाणित साक्ष्य है, तो उपलब्ध कराया जा सकता है।
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गौरतलब है कि बीकेडी के बीएड विभाग के एक सहायक प्राध्यापक पर जार पहाड़ स्थित मकान पर छात्रा के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने का आरोप लगा था। उन्हें निलंबित कर दिया गया था। निलंबन आदेश में लगे आरोपों पर जांच समिति की संस्तुति पर प्रबंधतंत्र ने शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी थी।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षक के खिलाफ की गई कार्रवाई को नियमविरुद्ध मानते हुए सेवा समाप्ति का आदेश स्थगित कर दिया है। बीयू द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कुलाधिपति द्वारा 31 मार्च 2014 को बीकेडी प्रबंध समिति का अनुमोदन निरस्त कर दिया गया था। ऐसी स्थिति में प्रबंधतंत्र के पास दंडात्मक कार्रवाई का प्राधिकार नहीं बनता।
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प्रबंध तंत्र को तीन माह में जांच आख्या देने का समय दिया गया था लेकिन समिति ने ऐसा नहीं किया। शिक्षक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी का साक्ष्य व छात्रा का बयान भी उपलब्ध नहीं कराया गया। कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय का कहना है कि राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 35 के तहत नियमानुसार फैसला लिया गया है। यदि अभी भी प्रबंध तंत्र के पास कोई प्रमाणित साक्ष्य है, तो उपलब्ध कराया जा सकता है।