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UP: ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन... सरहद पर तैनात सैनिक की सेहत का ख्याल रखेगी ये खास जैकेट; ऐसे करेगी काम
Fri, 02 May 2025 02:38 PM IST
शाहरुख खान
नीरज वर्मा, अमर उजाला, झांसी
नीरज वर्मा, अमर उजाला, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 02 May 2025 02:38 PM IST
सार
सरहद पर तैनात सैनिक की सेहत का बुलेट प्रूफ जैकेट खास ख्याल रखेगी। जैकेट से ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन और ऑक्सीजन स्तर के बारे में कंट्रोल रूम को पता चल जाएगा। बीआईईटी की प्रोफेसर शहनाज अयूब ने यह शोध किया है।
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फौजियों की जैकेट में लगने वाली हेल्था पैरामीटर डिवाइस
- फोटो : संस्थान
विस्तार
सरहद पर तैनात सैनिक की सेहत का ख्याल बुलेट प्रूफ जैकेट रखेगी। यदि सैनिक के स्वास्थ्य में कोई गड़बड़ी होती है तो इसकी जानकारी कंट्रोल रूम को हो जाएगी। यही नहीं फौजी के ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और ऑक्सीजन लेवल की भी जानकारी मिलेगी।
यह जैकेट बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बीआईईटी) की प्रो. शहनाज अयूब ने शोध करके तैयार की है। इसकी रिपोर्ट रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) कानपुर को भेज दी गई है।
बीआईईटी के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. अयूब ने बताया कि डीएमएसआरडीई कानपुर में भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला है। यहां सैन्य सामग्री पर अनुसंधान किया जाता है।
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इसके इंटीग्रेशन ऑफ सेंसर मैट्रिक्स एंड डेमेज डिटेक्शन मॉड्यूल फॉर बैलेस्टिक रेजिस्टेंस कंपोजिट पैनल प्रोजेक्ट के तहत उन्हें अत्याधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने का काम मिला। करीब एक साल चले शोध के दौरान जैकेट में हेल्थ पैरामीटर मॉनीटरिंग के लिए कई सेंसर डिवाइस लगाई गई।
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यह जैकेट बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बीआईईटी) की प्रो. शहनाज अयूब ने शोध करके तैयार की है। इसकी रिपोर्ट रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) कानपुर को भेज दी गई है।
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बीआईईटी के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. अयूब ने बताया कि डीएमएसआरडीई कानपुर में भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला है। यहां सैन्य सामग्री पर अनुसंधान किया जाता है।
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इसके इंटीग्रेशन ऑफ सेंसर मैट्रिक्स एंड डेमेज डिटेक्शन मॉड्यूल फॉर बैलेस्टिक रेजिस्टेंस कंपोजिट पैनल प्रोजेक्ट के तहत उन्हें अत्याधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने का काम मिला। करीब एक साल चले शोध के दौरान जैकेट में हेल्थ पैरामीटर मॉनीटरिंग के लिए कई सेंसर डिवाइस लगाई गई।
इनको कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। खास बात यह कि जैकेट का वजन 9.5 किग्रा से ज्यादा नहीं होगा। जैकेट में लगी हेल्थ पैरामीटर डिवाइस हल्की बनाई गई है। उन्होंने बताया कि परीक्षण सफल हो गया है। जैसे ही फौजी का हेल्थ पैरामीटर गड़बड़ होगा। वैसे ही सेंसर एक्टिव होकर कंट्रोल रूम में रिपोर्ट भेज देंगे।
तापमान के अनुकूल काम करेगी जैकेट
डॉ. अयूब ने बताया कि बुलेट प्रूफ जैकेट तापमान के अनुकूल बनाई जा रही है। तापमान बहुत ज्यादा होने या बहुत कम होने पर फौजी परेशान होता है। इस जैकेट में सेंसर लगाए गए हैं, जो तेज गर्मी होते ही फौजी को ठंडक का अहसास कराएगा। यदि फौजी बर्फीले क्षेत्र में में पहुंच जाता है, तो जैकेट का तापमान सामान्य रहेगा।
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डॉ. अयूब ने बताया कि बुलेट प्रूफ जैकेट तापमान के अनुकूल बनाई जा रही है। तापमान बहुत ज्यादा होने या बहुत कम होने पर फौजी परेशान होता है। इस जैकेट में सेंसर लगाए गए हैं, जो तेज गर्मी होते ही फौजी को ठंडक का अहसास कराएगा। यदि फौजी बर्फीले क्षेत्र में में पहुंच जाता है, तो जैकेट का तापमान सामान्य रहेगा।
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