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पानी के लिए आया बजट नहीं किया खर्च
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water suplly
- फोटो : water suplly
ललितपुर। एक ओर ललितपुर के कई इलाकों में भीषण जल संकट बना हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर पानी का बंदोबस्त करने के लिए सरकार की ओर से दिया गया 240 लाख रुपये का बजट एक साल से विभाग के खाते में पड़ा हुआ है। इसमें से एक पाई भी खर्च नहीं की गई है। शनिवार को जिले के प्रभारी मंत्री द्वारा की गई समीक्षा में इस बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। मंत्री ने पूरे मामले की जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। दोषी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
गर्मी की शुरुआत के साथ ही ललितपुर में जल संकट खड़ा हो जाता है। ग्रामीण इलाकों से लेकर नगर के मुहल्लों तक में पानी के त्राहि - त्राहि की स्थित पैदा हो जाती है। जल संकटग्रस्त इलाकों की आबादी को इस स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए शासन ने जुलाई 2019 में जल निगम को 240 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई थी। सामान्य मद से 110 लाख रुपये देने के साथ विशेष मद से भी 130 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। इस रकम का उपयोग हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोरिंग में किया जाना था। लेकिन, इसे सरकारी तंत्र की लापरवाही कहें या ललितपुर की जनता का दुर्भाग्य, उक्त रकम में से जल निगम ने एक पाई भी खर्च नहीं की। जनता पानी के लिए जूझती रही और अधिकारी व कर्मचारी बजट पर कुंडली जमाए बैठे रहे।
इस गंभीर लापरवाही का खुलासा जिले के प्रभारी मंत्री /आवास एवं शहरी नियोजन राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव द्वारा की गई विकास कार्यों की ऑनलाइन समीक्षा में हुआ। परत दर परत मामला खुलने के बाद मंत्री का भी माथा ठनक गया। तत्काल उन्होंने इस गड़बड़ी की जांच के आदेश जारी कर दिए। मंत्री ने निर्देशित किया कि जांच में कतई देरी न की जाए और जल्द से जल्द उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। इससे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप की स्थिति है। इस लापरवाही पर जल निगम के कई अधिकारी व कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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गर्मी की शुरुआत के साथ ही ललितपुर में जल संकट खड़ा हो जाता है। ग्रामीण इलाकों से लेकर नगर के मुहल्लों तक में पानी के त्राहि - त्राहि की स्थित पैदा हो जाती है। जल संकटग्रस्त इलाकों की आबादी को इस स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए शासन ने जुलाई 2019 में जल निगम को 240 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई थी। सामान्य मद से 110 लाख रुपये देने के साथ विशेष मद से भी 130 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। इस रकम का उपयोग हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोरिंग में किया जाना था। लेकिन, इसे सरकारी तंत्र की लापरवाही कहें या ललितपुर की जनता का दुर्भाग्य, उक्त रकम में से जल निगम ने एक पाई भी खर्च नहीं की। जनता पानी के लिए जूझती रही और अधिकारी व कर्मचारी बजट पर कुंडली जमाए बैठे रहे।
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इस गंभीर लापरवाही का खुलासा जिले के प्रभारी मंत्री /आवास एवं शहरी नियोजन राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव द्वारा की गई विकास कार्यों की ऑनलाइन समीक्षा में हुआ। परत दर परत मामला खुलने के बाद मंत्री का भी माथा ठनक गया। तत्काल उन्होंने इस गड़बड़ी की जांच के आदेश जारी कर दिए। मंत्री ने निर्देशित किया कि जांच में कतई देरी न की जाए और जल्द से जल्द उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। इससे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप की स्थिति है। इस लापरवाही पर जल निगम के कई अधिकारी व कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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