{"_id":"614cdbe88ebc3efad53a5b10","slug":"bu-peons-cleaning-workers-made-counselors-of-students-jhansi-news-jhs2050472200","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीयू: चपरासी, सफाई कर्मियों को बना दिया छात्रों का मेंटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीयू: चपरासी, सफाई कर्मियों को बना दिया छात्रों का मेंटर
विज्ञापन
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्रों की मेंटर सूची बनाने में बड़ी लापरवाही सामने आई है। सूची में चपरासी और सफाई कर्मचारियों तक के नाम डाल दिए गए। यही नहीं, सेवानिवृत्त, नौकरी छोड़ चुके और जिन शिक्षकों का निधन हो चुका है, उन्हें भी छात्रों का मेंटर बना दिया गया। यह सूची बीयू की वेबसाइट पर अपलोड हुई। मगर, जैसे ही कैंपस के शिक्षकों के बीच सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी तो इसे हटा दिया गया।
छात्रों को शैक्षणिक, व्यक्तिगत समेत किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए मेंटर-मेंटी पॉलिसी कई बड़े शिक्षा संस्थानों में लागू है। बीयू ने भी हाल ही में मेंटर सूची तैयार कर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दी। कई लोगों ने सूची डाउनलोड की तो देखा कि उसमें चपरासी, सफाई कर्मचारियों तक को छात्रों का मेंटर बना दिया गया है। यह सूची तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होनी शुरू हो गई। यही नहीं, सूची में होटल मैनेजमेंट में विभाग से कई साल पहले नौकरी छोड़ चुके शिक्षकों के भी नाम है। इसके अलावा मैथमेटिकल साइंस एंड कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग के सेवानिवृत्त और कोरोना में जान गंवा चुके एक शिक्षक का भी नाम सूची में डाल दिया गया है। मामला तूल पकड़ने लगा तो बीयू की वेबसाइट पर ये सूची हटा दी गई। मगर इससे पहले कई लोगों ने सूची डाउनलोड कर ली थी।
एक शिक्षक को बना सकते 20 छात्रों का मेंटर
छात्रों की शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को बतौर मेंटर शिक्षक ही हल कर सकता है। ऐसे में कर्मचारियों को मेंटर बनाने का सवाल ही नहीं उठता। जानकारों ने बताया कि नैक के मानकों के अनुसार एक शिक्षक को 20 छात्रों तक का मेंटर बनाया जा सकता है।
विज्ञापन
मैंने अपने विभाग की मेंटर सूची तैयार नहीं की है। जिसने भी तैयार की है, उसने चर्चा तक नहीं की। सूची में विभाग के चपरासी से लेकर सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों के नाम है। एक शिक्षक का निधन हो चुका है, उनका भी नाम सूची में डाला गया है। - प्रो. आरके सैनी, विभागाध्यक्ष, मैथमेटिकल साइंस एंड कंप्यूटर एप्लीकेशन।
विज्ञापन
छात्रों को शैक्षणिक, व्यक्तिगत समेत किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए मेंटर-मेंटी पॉलिसी कई बड़े शिक्षा संस्थानों में लागू है। बीयू ने भी हाल ही में मेंटर सूची तैयार कर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दी। कई लोगों ने सूची डाउनलोड की तो देखा कि उसमें चपरासी, सफाई कर्मचारियों तक को छात्रों का मेंटर बना दिया गया है। यह सूची तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होनी शुरू हो गई। यही नहीं, सूची में होटल मैनेजमेंट में विभाग से कई साल पहले नौकरी छोड़ चुके शिक्षकों के भी नाम है। इसके अलावा मैथमेटिकल साइंस एंड कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग के सेवानिवृत्त और कोरोना में जान गंवा चुके एक शिक्षक का भी नाम सूची में डाल दिया गया है। मामला तूल पकड़ने लगा तो बीयू की वेबसाइट पर ये सूची हटा दी गई। मगर इससे पहले कई लोगों ने सूची डाउनलोड कर ली थी।
विज्ञापन
एक शिक्षक को बना सकते 20 छात्रों का मेंटर
छात्रों की शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को बतौर मेंटर शिक्षक ही हल कर सकता है। ऐसे में कर्मचारियों को मेंटर बनाने का सवाल ही नहीं उठता। जानकारों ने बताया कि नैक के मानकों के अनुसार एक शिक्षक को 20 छात्रों तक का मेंटर बनाया जा सकता है।
विज्ञापन
मैंने अपने विभाग की मेंटर सूची तैयार नहीं की है। जिसने भी तैयार की है, उसने चर्चा तक नहीं की। सूची में विभाग के चपरासी से लेकर सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों के नाम है। एक शिक्षक का निधन हो चुका है, उनका भी नाम सूची में डाला गया है। - प्रो. आरके सैनी, विभागाध्यक्ष, मैथमेटिकल साइंस एंड कंप्यूटर एप्लीकेशन।