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बीयू अब छात्रों को देगा एक से ज्यादा ऑरिजनल डिग्री
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने छात्र-छात्राओं को एक से ज्यादा ऑरिजनल डिग्री लेने का विकल्प खोल दिया है। अगले साल से इच्छुक छात्र-छात्राएं शुल्क जमा करके सुविधा का लाभ ले सकेंगे। यह व्यवस्था शुरू करने वाला बीयू प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय हो गया है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को डुप्लीकेट डिग्री निकलवाने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। बीयू में भी लगातार डुप्लीकेट डिग्री के लिए आवदेन आते रहते हैं। छात्र-छात्राओं की यह समस्या दूर करने के लिए बुंदेलखंड यूनविर्सिटी ने पहल की है। अब अगले वर्ष से विद्यार्थियों को एक से अधिक डिग्री लेने का विकल्प मिलेगा। जो भी विद्यार्थी जितनी डिग्री लेना चाहेंगे, उसका शुल्क जमा करके ले सकेंगे। बताया गया कि आईआईटी और बीएचयू में यह व्यवस्था लागू हो गई है। वहीं, प्रदेश में राज्य विश्वविद्यालय स्तर पर यह पहल करने वाला बीयू पहला विश्वविद्यालय बन गया है।
विदेश में पढ़ाई के लिए जमा करनी पड़ती
विदेश में पढ़ाई करने के लिए टॉफेल परीक्षा होती है। इसके लिए ऑरिजनल डिग्री जमा होती है। डिग्री जमा करने के बाद वापस भी नहीं मिलती है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। वहीं, कई बार डिग्री खो जाने या फट जाने से भी छात्रों को डुप्लीकेट निकलवाने के लिए विश्वविद्यालय की भागदौड़ करनी पड़ती है। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को डुप्लीकेट डिग्री निकलवाने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। बीयू में भी लगातार डुप्लीकेट डिग्री के लिए आवदेन आते रहते हैं। छात्र-छात्राओं की यह समस्या दूर करने के लिए बुंदेलखंड यूनविर्सिटी ने पहल की है। अब अगले वर्ष से विद्यार्थियों को एक से अधिक डिग्री लेने का विकल्प मिलेगा। जो भी विद्यार्थी जितनी डिग्री लेना चाहेंगे, उसका शुल्क जमा करके ले सकेंगे। बताया गया कि आईआईटी और बीएचयू में यह व्यवस्था लागू हो गई है। वहीं, प्रदेश में राज्य विश्वविद्यालय स्तर पर यह पहल करने वाला बीयू पहला विश्वविद्यालय बन गया है।
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विदेश में पढ़ाई के लिए जमा करनी पड़ती
विदेश में पढ़ाई करने के लिए टॉफेल परीक्षा होती है। इसके लिए ऑरिजनल डिग्री जमा होती है। डिग्री जमा करने के बाद वापस भी नहीं मिलती है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। वहीं, कई बार डिग्री खो जाने या फट जाने से भी छात्रों को डुप्लीकेट निकलवाने के लिए विश्वविद्यालय की भागदौड़ करनी पड़ती है। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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