{"_id":"114f1fb66a2ae53188ce4daf1467d0fa","slug":"bu-fake-websites-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीयू की फर्जी वेबसाइटें बना कर बांटी जा रहीं डिग्रियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीयू की फर्जी वेबसाइटें बना कर बांटी जा रहीं डिग्रियां
ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2015 01:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। फर्जी मार्क्सशीट और डिग्रियां बनाने वाले गिरोह ने फर्जीवाड़ा करने के लिए हाईटेक तरीका अपना लिया है। जालसाज अब बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइटें बनाकर लोगों को फर्जी मार्क्सशीट व डिग्रियां बांट रहे हैं। झांसे में आने वाले लोगों को फर्जी वेबसाइटों के जरिए रोल नंबर डालकर वेरिफिकेशन करा दिया जाता है। लोग फर्जी वेबसाइट के चक्कर में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्रियां बनाने का मामला कोई नई बात नहीं है। वेरिफिकेशन के दौरान ऐसे कई मामले पकड़ में आने के बाद जालसाजों ने अब फर्जीवाड़ा करने का हाईटेक तरीका अपना लिया है। अब जालसाजों द्वारा www.bundelkhanduniversity.org.in व www.bundelkhanduniversity.net नाम से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइटें बनाई गई हैं। इसमें पहली वाली वेबसाइट खासकर प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए बनी है।
जालसाज लोगों को फर्जी मार्कशीट थमाकर इन्हीं वेबसाइटों के जरिए उनके असली होने का प्रमाणपत्र दे रहे हैं। वेबसाइट पर रिजल्ट के विकल्प में फर्जी मार्क्सशीट में दर्ज नंबर समेत अन्य जानकारियां देखकर लोग जालसाजों के जाल में फंस जाते हैं। बीयू प्रशासन को दूतावासों और विदेशों से ऐसे कई शिकायतें मिली हैं, जिसमें कूटरचित/ छद्म वेबसाइटों के जरिए छात्रों को फर्जी उपाधियां बांटने की बात कही गई है। शिकायतों के मद्देनजर बीयू प्रशासन ने छह प्राथमिकी दर्ज करवाई हैं।
विज्ञापन
यह हैं अंतर
- असली और नकली वेबसाइट में सबसे बड़ा अंतर उत्तर प्रदेश सरकार का आधिकारिक लोगो है। लोगो असली वेबसाइट में तो है लेकिन नकली में नही।
- ऑरिजनल वेबसाइट में ‘कांटेक्ट अस’ का विकल्प देकर इसके भीतर लैंडलाइन नंबर दिए हैं, जबकि फर्जी वेबसाइटों में यह ऑप्शन गायब है।
- असली वेबसाइट के मुख्य पेज पर ही मैप, वेबमेल समेत कई विकल्प मौजूद हैं, जबकि फर्जी वेबसाइटों में इनका उल्लेख नहीं किया गया है।
- ऑरिजनल वेबसाइट में होम का विकल्प दाएं साइड में सबसे ऊपर छोटे अक्षरों में दिया हुआ है, जबकि फर्जी में बाएं साइड में दिया है।
- एकेडमिक लॉगिन, ऑनलाइन वेरिफिकेशन, ऑनलाइन एफिलिएशन, आईक्यूएसी, नैक, स्टूडेंट मैनेजमेंट सिस्टम विकल्प असली साइट में हैं, नकली में नहीं।
- ऑरिजनल वेबसाइट पर लगातार नई फोटो और जानकारियां अपलोड हो रही हैं, जबकि फेक में नए कार्यक्रमों का फॉलोअप नहीं किया जा रहा।
- बीयू में इस समय प्रवेश प्रक्रिया बंद हो चुकी है, जबकि फर्जी वेबसाइट पर अभी तक प्रवेश प्रारंभ दिखाया जा रहा है।
‘बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की एकमात्र प्रमाणित वेबसाइट www.bujhansi.org है। कार्य परिषद के निर्णयानुसार सुरक्षा कारणों से इसे www.bujhansi.ac.in में रूपांतरित किया जा रहा है। - प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय, कुलपति’
विज्ञापन
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्रियां बनाने का मामला कोई नई बात नहीं है। वेरिफिकेशन के दौरान ऐसे कई मामले पकड़ में आने के बाद जालसाजों ने अब फर्जीवाड़ा करने का हाईटेक तरीका अपना लिया है। अब जालसाजों द्वारा www.bundelkhanduniversity.org.in व www.bundelkhanduniversity.net नाम से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइटें बनाई गई हैं। इसमें पहली वाली वेबसाइट खासकर प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए बनी है।
विज्ञापन
जालसाज लोगों को फर्जी मार्कशीट थमाकर इन्हीं वेबसाइटों के जरिए उनके असली होने का प्रमाणपत्र दे रहे हैं। वेबसाइट पर रिजल्ट के विकल्प में फर्जी मार्क्सशीट में दर्ज नंबर समेत अन्य जानकारियां देखकर लोग जालसाजों के जाल में फंस जाते हैं। बीयू प्रशासन को दूतावासों और विदेशों से ऐसे कई शिकायतें मिली हैं, जिसमें कूटरचित/ छद्म वेबसाइटों के जरिए छात्रों को फर्जी उपाधियां बांटने की बात कही गई है। शिकायतों के मद्देनजर बीयू प्रशासन ने छह प्राथमिकी दर्ज करवाई हैं।
विज्ञापन
यह हैं अंतर
- असली और नकली वेबसाइट में सबसे बड़ा अंतर उत्तर प्रदेश सरकार का आधिकारिक लोगो है। लोगो असली वेबसाइट में तो है लेकिन नकली में नही।
- ऑरिजनल वेबसाइट में ‘कांटेक्ट अस’ का विकल्प देकर इसके भीतर लैंडलाइन नंबर दिए हैं, जबकि फर्जी वेबसाइटों में यह ऑप्शन गायब है।
- असली वेबसाइट के मुख्य पेज पर ही मैप, वेबमेल समेत कई विकल्प मौजूद हैं, जबकि फर्जी वेबसाइटों में इनका उल्लेख नहीं किया गया है।
- ऑरिजनल वेबसाइट में होम का विकल्प दाएं साइड में सबसे ऊपर छोटे अक्षरों में दिया हुआ है, जबकि फर्जी में बाएं साइड में दिया है।
- एकेडमिक लॉगिन, ऑनलाइन वेरिफिकेशन, ऑनलाइन एफिलिएशन, आईक्यूएसी, नैक, स्टूडेंट मैनेजमेंट सिस्टम विकल्प असली साइट में हैं, नकली में नहीं।
- ऑरिजनल वेबसाइट पर लगातार नई फोटो और जानकारियां अपलोड हो रही हैं, जबकि फेक में नए कार्यक्रमों का फॉलोअप नहीं किया जा रहा।
- बीयू में इस समय प्रवेश प्रक्रिया बंद हो चुकी है, जबकि फर्जी वेबसाइट पर अभी तक प्रवेश प्रारंभ दिखाया जा रहा है।
‘बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की एकमात्र प्रमाणित वेबसाइट www.bujhansi.org है। कार्य परिषद के निर्णयानुसार सुरक्षा कारणों से इसे www.bujhansi.ac.in में रूपांतरित किया जा रहा है। - प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय, कुलपति’