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बीयू: कंप्यूटर पार्ट्स चोरी होने की नहीं कराई जांच
ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2015 01:10 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कंप्यूटरों से पार्ट्स चोरी होने की जांच अभी तक नहीं कराई जा सकी है। कुलपति बदलने के बाद इस पर किसी का ध्यान ही नहीं गया है।
गौरतलब है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की टीम द्वारा विश्वविद्यालय का निरीक्षण करने के पूर्व विज्ञान भवन स्थित लैब में रखे कंप्यूटरों को वहां से हटाकर लॉ विभाग में शिफ्ट करवाया गया था। जब इन कंप्यूटरों को चलाने की बारी आई, तब पता चला कि कई कंप्यूटर्स से पार्ट्स ही गायब हैं।
कंप्यूटरों को खोलने पर पता चला कि किसी में रैम, किसी में हार्ड डिस्क तो किसी में प्लग कनेक्टर गायब था। इसके बाद उन कंप्यूटर्स को वहां से हटवा दिया गया। सूत्रों ने बताया कि अलग-अलग कंप्यूटर्स से पार्ट्स चोरी होना यह दर्शा रहा है कि कोई तकनीकी जानकार इनके जरिए एसेंबर्ल्ड कंप्यूटर्स तैयार कर रहा है।
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पार्ट्स चोरी होने की जानकारी विश्वविद्यालय के अधिकारियों को होने के बावजूद इसकी जांच के निर्देश नहीं दिए गए। विश्वविद्यालय के कुलपति बदलने के बाद तो इस मामले में कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। वहीं, लैब के जिम्मेदार अधिकारी ने भी इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
सब चुप्पी साध कर मामला दबाने की कोशिश में लगे हैं। यदि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तो आरोपी के हौसले और बुलंद हो जाएंगे। फिर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होगी।
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गौरतलब है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की टीम द्वारा विश्वविद्यालय का निरीक्षण करने के पूर्व विज्ञान भवन स्थित लैब में रखे कंप्यूटरों को वहां से हटाकर लॉ विभाग में शिफ्ट करवाया गया था। जब इन कंप्यूटरों को चलाने की बारी आई, तब पता चला कि कई कंप्यूटर्स से पार्ट्स ही गायब हैं।
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कंप्यूटरों को खोलने पर पता चला कि किसी में रैम, किसी में हार्ड डिस्क तो किसी में प्लग कनेक्टर गायब था। इसके बाद उन कंप्यूटर्स को वहां से हटवा दिया गया। सूत्रों ने बताया कि अलग-अलग कंप्यूटर्स से पार्ट्स चोरी होना यह दर्शा रहा है कि कोई तकनीकी जानकार इनके जरिए एसेंबर्ल्ड कंप्यूटर्स तैयार कर रहा है।
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पार्ट्स चोरी होने की जानकारी विश्वविद्यालय के अधिकारियों को होने के बावजूद इसकी जांच के निर्देश नहीं दिए गए। विश्वविद्यालय के कुलपति बदलने के बाद तो इस मामले में कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। वहीं, लैब के जिम्मेदार अधिकारी ने भी इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
सब चुप्पी साध कर मामला दबाने की कोशिश में लगे हैं। यदि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तो आरोपी के हौसले और बुलंद हो जाएंगे। फिर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होगी।