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42 गांवों में धधक रहीं कच्ची शराब की भट्टियां

Thu, 30 Jan 2020 01:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2020 01:06 AM IST
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brewery work done in 42 village
brewery work done in 42 village
झांसी। मंडल के 42 गांवों में मौत का सामान तैयार किया जा रहा है। इन गांवों में कच्ची शराब बनाने के लिए धड़ल्ले से भट्ठियां धधक रही हैं। बेखौफ कारोबारी पुलिस - प्रशासन को चुनौती देने के अंदाज में अपने काम को अंजाम देने में जुटे हुए हैं। लेकिन, अब इस स्थिति पर मंडलायुक्त ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने इस अवैध कारोबार को उखाड़ फेंकने के निर्देश जारी किए हैं।
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महुए से बनने वाली कच्ची शराब में नशा गहरा करने के लिए ऑक्सिटोसिन व यूरिया मिलाई जाती है। इनके लगातार इस्तेमाल से ये स्लो पाइजन का काम करती है। ये शराब शरीर के अंगों को एक-एक कर खराब कर मौत के अंजाम तक ले जाती है। आबकारी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मंडल में 42 गांवों में कच्ची शराब बनाई जा रही है। इनमें झांसी जिले के 22, जालौन के 11 और ललितपुर के नौ गांवों में कच्ची शराब का अवैध ढंग से निर्माण किया जा रहा है।
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इस पर मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने तीनों जनपदों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व आबकारी विभाग के अधिकारियों को संयुक्त टीम बनाकर इस कारोबार पर नकेल कसने के निर्देश जारी किए हैं।
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यहां तैयार हो रहा है मौत का सामान
झांसी जिले में परवई, नयाखेड़ा, गोरामछिया, तैंदोल, महेबा, बम्हरौली, डेरा कृषि फार्म, डेरा समथर, पनारी, भकौरा, बसरिया, कनकना, देवरी सिंह पुरा, रोरा, इटायल, सकरार डेरा, अड़जार, कटेरा, गरौठा डेरा, झबरा, अशोक नगर डेरा व राजापुर में कच्ची शराब बनाई जा रही है। जालौन में उमरारखेड़ा, चौरसी डेरा, विरासनी डेरा, कंचड़ कॉलोनी, सिरसा कलार, घुसिया, बसोव, गिरवर, कालपी डेरा, बबीना व चौरासी डेरा तथा ललितपुर में चीरा, मऊमाफी, घटवार, लड़ैयामार धौर्रा, रजौरा, सिद्ध की टोरिया, उगरपुर, टकटकी व गणेशपुरा टपरियन में कच्ची शराब बनाई जा रही है।

सरकार को रोजाना 23 लाख की चपत
मंडल में रोजाना दस हजार लीटर से अधिक कच्ची शराब खपाई जा रही है। इनकी बिक्री दो सैकड़ा से अधिक स्थानों पर खुलेआम की जा रही है। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। 36 डिग्री की एक लीटर देसी शराब पर सरकार को 234 रुपये राजस्व मिलता है। इस हिसाब से देखा जाए तो कच्ची शराब मंडल में रोजाना सरकार को 23 लाख रुपये के राजस्व की चपत लगा रही है।
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