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ठंड उखाड़ रहीं सांसें, पांच दिन में 100 को पड़ा अस्थमा का अटैक
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झांसी। ठंड में श्वांस के मरीजों की सांसें उखड़ने लगी हैं। पिछले पांच दिनों में अस्थमा का अटैक पड़ने पर लगभग 100 मरीज सरकारी, नर्सिंगहोमों में भर्ती हुए हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को मिलाकर 600 से ज्यादा मरीज सांस लेने में समस्या की शिकायत पर इलाज कराने पहुंचे हैं।
जिन मरीजों को कोल्ड एलर्जी होती है, उनकी सांस की नलियां बेहद संवेदनशील होती हैं। जो कि ठंड में सिकुड़ जाती हैं और सूजन आ जाती है। ऐसे में मरीजों की सांस फूलने लगती है। इसके अलावा अस्थमा, सीओपीडी के मरीजों को भी सांस लेने में परेशानी होने लगती हैं। पिछले पांच दिनों से झांसी में तेज ठंड बनी हुई है। इस कारण सौ से ज्यादा अस्थमा के अटैक के मरीज सरकारी और निजी अस्पताल में पहुंच चुके हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अस्थमा अटैक पड़ने पर मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। सीने से सीटी जैसी आवाज आती है। साथ ही शरीर भी नीला पड़ने लगता है। समय पर मरीज को इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है। वहीं, 16 दिसंबर से सोमवार तक मेडिकल कॉलेज में 400, जिला अस्पताल में 200 मरीजों ने सांस की दिक्कत होने पर इलाज कराया है।
जुकाम, बीपी, ह्रदय के भी मरीज बढ़े
ठंड में जुकाम, खांसी और बीपी के मरीजों की भी संख्या में दोगुना तक का इजाफा हो गया है। ऐसे में चिकित्सक ठंड से बचाव करने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि ठंडक में ब्लड प्रेशर हावी हो जाता है। दिल की नसों में भी सिकुड़न आने से ह्रदय रोगियों की परेशानी शुरू हो जाती है। इसलिए ठंड में खासकर बुजुर्गों और इनसे परेशान मरीजों को सावधानी बरतनी चाहिए। ठंडे पदार्थ का सेवन न करें।
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पांच दिनों से रोज ठंड में सांस की समस्या की शिकायत लेकर 80 मरीज आ रहे हैं। अस्थमा के अटैक के 30 मरीज आ चुके हैं। कई मरीजों को इन्हेलर की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में ठंड से बचाव जरूरी है। - डॉ. मधुर्मय शास्त्री, चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
श्वांस रोगियों की संख्या में चार गुना तक इजाफा हुआ है। रोजाना 40 मरीज आ रहे हैं। पिछले पांच दिनों में अस्थमा अटैक के 20 मरीज आ चुके हैं। जुकाम, बीपी, ह्रदय के मरीजों की संख्या भी दोगुनी तक बढ़ गई है। - डॉ. डीएस गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल।
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जिन मरीजों को कोल्ड एलर्जी होती है, उनकी सांस की नलियां बेहद संवेदनशील होती हैं। जो कि ठंड में सिकुड़ जाती हैं और सूजन आ जाती है। ऐसे में मरीजों की सांस फूलने लगती है। इसके अलावा अस्थमा, सीओपीडी के मरीजों को भी सांस लेने में परेशानी होने लगती हैं। पिछले पांच दिनों से झांसी में तेज ठंड बनी हुई है। इस कारण सौ से ज्यादा अस्थमा के अटैक के मरीज सरकारी और निजी अस्पताल में पहुंच चुके हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अस्थमा अटैक पड़ने पर मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। सीने से सीटी जैसी आवाज आती है। साथ ही शरीर भी नीला पड़ने लगता है। समय पर मरीज को इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है। वहीं, 16 दिसंबर से सोमवार तक मेडिकल कॉलेज में 400, जिला अस्पताल में 200 मरीजों ने सांस की दिक्कत होने पर इलाज कराया है।
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जुकाम, बीपी, ह्रदय के भी मरीज बढ़े
ठंड में जुकाम, खांसी और बीपी के मरीजों की भी संख्या में दोगुना तक का इजाफा हो गया है। ऐसे में चिकित्सक ठंड से बचाव करने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि ठंडक में ब्लड प्रेशर हावी हो जाता है। दिल की नसों में भी सिकुड़न आने से ह्रदय रोगियों की परेशानी शुरू हो जाती है। इसलिए ठंड में खासकर बुजुर्गों और इनसे परेशान मरीजों को सावधानी बरतनी चाहिए। ठंडे पदार्थ का सेवन न करें।
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पांच दिनों से रोज ठंड में सांस की समस्या की शिकायत लेकर 80 मरीज आ रहे हैं। अस्थमा के अटैक के 30 मरीज आ चुके हैं। कई मरीजों को इन्हेलर की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में ठंड से बचाव जरूरी है। - डॉ. मधुर्मय शास्त्री, चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
श्वांस रोगियों की संख्या में चार गुना तक इजाफा हुआ है। रोजाना 40 मरीज आ रहे हैं। पिछले पांच दिनों में अस्थमा अटैक के 20 मरीज आ चुके हैं। जुकाम, बीपी, ह्रदय के मरीजों की संख्या भी दोगुनी तक बढ़ गई है। - डॉ. डीएस गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल।