जरा सी आंधी व पानी गिरने पर शहर की बिजली पटरी से उतर जाती है। पेड़ों की डालियां जहां तहां पावर कट कर देती हैँ। हंसारी पावर हाउस से निकली 33 केवी लाइन में यह समस्या सबसे ज्यादा आती है। हंसारी ट्रांसमिशन पावर हाउस से नगर के दस सब स्टेशन जुड़े हुए हैं। इनमें जेल चौराहा, रानी महल, मुन्नालाल, सीपरी बाजार, हाइडिल, पुलिया नंबर नौ, प्रेमनगर, खातीबाबा, हंसारी व बिजौली शामिल हैं। बारिश या आंधी आने पर हंसारी से आने वाली लाइन सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। चूंकि, जो भी लाइनें सब स्टेशनों तक पहुंचती हैं, वह जंगलों के रास्तों से होकर आती हैं। पानी गिरते ही पेड़ों की डालियां तारों पर गिरने लगती हैं, जिससे फाल्ट हो जाते हैं। दूसरा हंसारी से निकली 33 केवी लाइन से एक की जगह दो- दो सब स्टेशन भी जुड़े हैं। फाल्ट आने पर एक साथ दो सब स्टेशनों की बिजली गुल हो जाती है। जैसे कि प्रेमनगर के साथ खातीबाबा, जेल चौराहा के साथ रानी महल, गल्ला मंडी के साथ बरुआसागर को जोड़ा गया है। वहीं महानगर में लगे विद्युत खंभे ढाई- तीन दशक पुराने हैं। तार भी उसी अवधि के हैं। लंबे समय से धूप, बरसात और सर्दी को सह रहे यह खंभे और तार जर्जर हो चुके हैं। विद्युत प्रवाह को कायम रखने में इस्तेमाल किए जाने वाले इंसुलेटर भी समय सीमा पार करने के कारण अक्सर बर्स्ट हो जाते हैं, जिससे आपूर्ति ठप पड़ जाती है। हालांकि, इस संबंध में विद्युत अफसरों का कहना है कि महानगर में स्काडा के अंतर्गत 237 करोड़ की योजना के तहत विद्युत ढांचे को मजबूत करने का काम पूरा हो चुका है। ऐसी समस्या अब कम बची है।