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एक्सक्लूसिव: अप्रैल में हुई कालाबाजारी, अब रखे-रखे खराब हो गए 110 रेमडेसिविर इंजेक्शन

Mon, 08 Nov 2021 10:23 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 08 Nov 2021 10:23 PM IST
सार

अब झांसी में 110 रेमडेसिविर इंजेक्शन केमिस्टों के पास रखे-रखे एक्सपायर हो गए हैं। थोक में एक इंजेक्शन की कीमत चार हजार रुपये है। मगर फुटकर में ये मनमानी दरों पर बिकते हैं। 

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Black marketing took place in April, now 110 remdesivir injections kept spoiled
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

झांसी में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल में जिस रेमडेसिविर को लेकर जबरदस्त मारामारी मची थी, अब 110 इंजेक्शन के पास रखे-रखे एक्सपायर हो गए हैं। हाल ये है कि कंपनियां तक इन इंजेक्शनों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं। थोक में इन इंजेक्शनों की कीमत साढ़े चार लाख है।  फुटकर में कई गुना कीमतों पर ये बिकते हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर ने झांसी समेत देश भर में जबरदस्त कहर बरपाया। उस समय रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग में तेजी से उछाल आया। हाल ये रहा कि मरीज के परिजन खुद डॉक्टर से रेमडेसिविर लगाने की मांग करने लगे। इंजेक्शन की एडवांस बुकिंग तक लोग कराने लगे।
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दूसरी तरफ, इंजेक्शन की जबरदस्त कालाबाजारी शुरू हो गई। झांसी में एक लाख रुपये तक ब्लैक में रेमडेसिविर इंजेक्शन बिके। मुख्यमंत्री के सामने तक भाजपा विधायकों ने ये मुद्दा उठाया था। 
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कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद इनकी मांग बिल्कुल घट गई। वहीं, अब झांसी में 110 रेमडेसिविर इंजेक्शन केमिस्टों के पास रखे-रखे एक्सपायर हो गए हैं। थोक में एक इंजेक्शन की कीमत चार हजार रुपये है। मगर फुटकर में ये मनमानी दरों पर बिकते हैं। दवा विक्रेताओं ने बताया कि अब कंपनियां इंजेक्शन वापस लेने को भी मना कर रही हैं। ऐसे में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

नकली इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह का हुआ था पर्दाफाश

कोरोना काल में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के सदस्यों ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन तक बेच दिए। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों तक की गिरफ्तारी हुई थी। गिरोह के सदस्य मेडिकल कॉलेज से इंजेक्शन की खाली शीशी चुराकर उसमें ग्लूकोज भरकर बेचते थे।

दो से छह महीने तक बढ़ी एक्यपायरी डेट
कोरोना की पहली लहर तक रेमडेसिविर इंजेक्शन की एक्सपायरी डेट दो महीने तक थी। कोविड की दूसरी लहर के दौरान एक्सपायरी की तारीख कंपनियों ने बढ़ाकर छह महीने कर दी। अब मार्च-अप्रैल में बने इंजेक्शन एक्यपायर हो गए हैं।

झांसी में आठ केमिस्टों के पास 110 रेमडेसिविर इंजेक्शन रखे-रखे एक्सपायर हो गए हैं। थोक में एक इंजेक्शन की कीमत चार हजार रुपये के करीब है। कंपनियां भी इंजेक्शन वापस लेने को तैयार नहीं हैं। - नितिन मोदी, सचिव, जिला केमिस्ट एसोसिएशन।
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