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बिना टीटीई के दौड़ रहे रेलवे के सात सौ कोच
Wed, 02 Jan 2019 01:42 AM IST
देवेंद्र कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Wed, 02 Jan 2019 01:42 AM IST
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टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी के कारण मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों के 700 से अधिक कोचों की निगरानी नहीं हो पा रही है। दरअसल, ट्रेनों की संख्या के हिसाब से 1900 टिकट चेकिंग कर्मियाें की आवश्यकता है, जबकि सिर्फ 743 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी से अधिकांश ट्रेनों में दो ही कर्मचारी चल पा रहे हैं। जबकि, कोचों की संख्या के हिसाब से एक ट्रेन में पांच कर्मचारियों का होना जरूरी है।
रेल मंडल प्रशासन ने प्रतिदिन 100 ट्रेनों में चलने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए एम्युनिटी डिटेल लिंक बना रखा है। यह स्टाफ झांसी स्टेशन से अप और डाउन की ट्रेनों में निजामुद्दीन, इटारसी, कानपुर और बांदा के लिए चलता है। शताब्दी एक्सप्रेस व वीकली ट्रेनों के लिए अलग-अलग टीमें हैं। इसके अलावा स्पेशल स्क्वॉड और ओपेन डिटेल में अलग कर्मचारी तैनात हैं। इस हिसाब से 1900 कर्मचारियों की जरूरत है, जबकि 743 उपलब्ध हैं। साथ ही हर महीने चार से छह कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इससे संख्या और घटती जा रही है।
नतीजतन, अधिकांश ट्रेनों में वन प्लस टू या थ्री का स्टाफ चल रहा है। नियम के हिसाब से एक टीटीई को तीन स्लीपर या पांच एसी कोच एक साथ देखने पड़ते हैं। जबकि, तीन स्लीपर कोच एक टीटीई के पास होने के हिसाब से टीम में कम से कम वन प्लस फाइव या सिक्स का स्टाफ होना चाहिए। स्टाफ की कमी के कारण यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है, क्योंकि 22 या 24 डिब्बों की ट्रेन में दो या तीन टीटीई ही चल रहे हैं। साथ ही ट्रेनों की संख्या के हिसाब से 700 से अधिक कोचों में कोई स्टाफ नहीं चल रहा है। दूसरा, इससे बेटिकट यात्रियों को पकड़ने का अभियान प्रभावित होने से राजस्व की क्षति तो हो ही रही है, यात्रियों को भी परेशानी होती है। मंडल प्रशासन किसी तरह काम चला रहा है।
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टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए मुख्यालय को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही नए कर्मचारी मिलेंगे। - विपिन कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम।
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रेल मंडल प्रशासन ने प्रतिदिन 100 ट्रेनों में चलने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए एम्युनिटी डिटेल लिंक बना रखा है। यह स्टाफ झांसी स्टेशन से अप और डाउन की ट्रेनों में निजामुद्दीन, इटारसी, कानपुर और बांदा के लिए चलता है। शताब्दी एक्सप्रेस व वीकली ट्रेनों के लिए अलग-अलग टीमें हैं। इसके अलावा स्पेशल स्क्वॉड और ओपेन डिटेल में अलग कर्मचारी तैनात हैं। इस हिसाब से 1900 कर्मचारियों की जरूरत है, जबकि 743 उपलब्ध हैं। साथ ही हर महीने चार से छह कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इससे संख्या और घटती जा रही है।
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नतीजतन, अधिकांश ट्रेनों में वन प्लस टू या थ्री का स्टाफ चल रहा है। नियम के हिसाब से एक टीटीई को तीन स्लीपर या पांच एसी कोच एक साथ देखने पड़ते हैं। जबकि, तीन स्लीपर कोच एक टीटीई के पास होने के हिसाब से टीम में कम से कम वन प्लस फाइव या सिक्स का स्टाफ होना चाहिए। स्टाफ की कमी के कारण यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है, क्योंकि 22 या 24 डिब्बों की ट्रेन में दो या तीन टीटीई ही चल रहे हैं। साथ ही ट्रेनों की संख्या के हिसाब से 700 से अधिक कोचों में कोई स्टाफ नहीं चल रहा है। दूसरा, इससे बेटिकट यात्रियों को पकड़ने का अभियान प्रभावित होने से राजस्व की क्षति तो हो ही रही है, यात्रियों को भी परेशानी होती है। मंडल प्रशासन किसी तरह काम चला रहा है।
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टिकट चेकिंग कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए मुख्यालय को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही नए कर्मचारी मिलेंगे। - विपिन कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम।