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किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होंगे एक और दो कक्ष वाले स्कूल

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 06:48 PM IST
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big challenge for schools with one or two classrooms.
कोरोना वायरस का प्रकोप कम अथवा समाप्त होने के बाद ही बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल खोले जाएंगे। तब सबसे अधिक चुनौती एकल कक्षा वाले विद्यालयों से होगी। जिले में अधिकांश ऐसे स्कूल हैं, जो एक अथवा दो कक्ष वाले हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के मानक किस तरह से पूरे होंगे। यह अधिकारियों एवं शिक्षकों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा। कोरोना वायरस के कारण प्रदेश सरकार ने विशेष सावधानी बरतते हुए सभी स्कूल कालेज बंद कराए रखे हैं। लॉकडाउन के चलते बेसिक के स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं भी नहीं हुई थी। विद्यार्थियों को प्रोन्नत कर अगली कक्षा में भेजा गया था। विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा की भी व्यवस्था की गई। हालांकि स्मार्ट फोन न होने के कारण कई बच्चे इसका लाभ भी नहीं उठा पा रहे हैं। वहीं, कोरोना वायरस के थमने के बाद संभव है कि स्कूल कॉलेज खोल दिए जाएंगे। लेकिन इससे सबसे अधिक परेशानी उन स्कूलों के लिए होगी, जहां के बच्चों को बैठने की पर्याप्त जगह नहीं है। जिले में कई स्कूल हैं, जो एक अथवा दो कक्ष में संचालित हैं। इसके अलावा 36 स्कूलों के जीर्णशीर्ण भवन भी ढहाकर नए सिरे बनाए जा रहे हैं। कायाकल्प योजना के तहत भी कई स्कूलों में निर्माण कार्य हो रहे हैं। बीएसए हरिवंश कुमार ने बताया कि स्कूलों का संविलियन हो रहा है। पर्याप्त जगह है, ऐसे में सभी बच्चों को सुविधा से बैठाया जाएगा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा।
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