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भाई - बहन के प्रेम में नहीं रहेगी भद्रा
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भाई - बहन के प्रेम में नहीं रहेगी भद्रा
झांसी। भाई- बहन के प्रेम का अटूट पर्व रक्षाबंधन 15 अगस्त गुरुवार को मनाया जाएगा। पर्व पर इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें सुबह से लेकर रात तक किसी भी वक्त अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
सनातन धर्म में रक्षाबंधन का विशेष सामाजिक एवं धार्मिक महत्व है। इस त्योहार से जुड़ी कई कहानियां पौराणिक एवं ऐतिहासिक ग्रंथों में हैं। श्रावण पूर्णिमा रक्षा बंधन को लेकर हर साल बहनों एवं भाइयों में विशेष उत्साह रहता है। बहनें अपने भाइयों का तिलक कर उनकी लंबी आयु की कामना ईश्वर से करती हैं। जबकि भाई अपनी बहन क ी रक्षा का संकल्प लेते हैं और उन्हें अनमोल उपहार भी देते हैं।
धर्माचार्यों के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं है। ऐसे में संपूर्ण वर्ष मंगलमय रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा में शुभ कार्य वर्जित रहता है। भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनि देव की बहन है, जो कि शनिदेव की तरह स्वभाव से क्रोधी है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार भद्रा न होने से बहनें किसी भी समय अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। इस दिन ध्वज योग भी है। पंडित शांतनू पांडेय ने बताया कि भद्रा 14 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट से रात 3 : 30 बजे तक है। ऐसे में पर्व पर इसका कोई प्रभाव नहीं है। मकर राशि में चंद्रमा का भ्रमण रहेगा। वहीं श्रावण पूर्णिमा होने से इस दिन लोग नये जनेऊ की पूजा कर उसे धारण भी करेंगे। इस दिन संस्कृत दिवस भी मनाया जाएगा।
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झांसी। भाई- बहन के प्रेम का अटूट पर्व रक्षाबंधन 15 अगस्त गुरुवार को मनाया जाएगा। पर्व पर इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें सुबह से लेकर रात तक किसी भी वक्त अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
सनातन धर्म में रक्षाबंधन का विशेष सामाजिक एवं धार्मिक महत्व है। इस त्योहार से जुड़ी कई कहानियां पौराणिक एवं ऐतिहासिक ग्रंथों में हैं। श्रावण पूर्णिमा रक्षा बंधन को लेकर हर साल बहनों एवं भाइयों में विशेष उत्साह रहता है। बहनें अपने भाइयों का तिलक कर उनकी लंबी आयु की कामना ईश्वर से करती हैं। जबकि भाई अपनी बहन क ी रक्षा का संकल्प लेते हैं और उन्हें अनमोल उपहार भी देते हैं।
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धर्माचार्यों के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं है। ऐसे में संपूर्ण वर्ष मंगलमय रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा में शुभ कार्य वर्जित रहता है। भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनि देव की बहन है, जो कि शनिदेव की तरह स्वभाव से क्रोधी है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार भद्रा न होने से बहनें किसी भी समय अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। इस दिन ध्वज योग भी है। पंडित शांतनू पांडेय ने बताया कि भद्रा 14 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट से रात 3 : 30 बजे तक है। ऐसे में पर्व पर इसका कोई प्रभाव नहीं है। मकर राशि में चंद्रमा का भ्रमण रहेगा। वहीं श्रावण पूर्णिमा होने से इस दिन लोग नये जनेऊ की पूजा कर उसे धारण भी करेंगे। इस दिन संस्कृत दिवस भी मनाया जाएगा।
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