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बेतवा का साढ़े तीन सौ किलोमीटर का किनारा होगा नो डेवलमेंट जोन, एनजीटी ने दिया था निर्देश 

Sat, 28 Aug 2021 01:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 28 Aug 2021 01:19 AM IST
सार

  • बाढ़ के उच्चतम बिंदू के सौ मीटर के दायरे में प्रतिबंधित होंगे सभी कार्य
  • एनजीटी के निर्देश के बाद सिंचाई विभाग ने शुरू की कवायद
  • झांसी, ललितपुर, जालौन एवं हमीरपुर में चिन्हित होगा इलाका

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Betwa will have three and a half kilometer shore with no development zone
बेतवा नदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एनजीटी के निर्देश पर बेतवा नदी का किनारा संरक्षित होगा। ललितपुर में राजघाट बांध से लेकर हमीरपुर के बीच नदी की करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर लंबी पट्टी नो डेवलमेंट जोन में तब्दील होगी। यहां निर्माण समेत दूसरे किसी कार्य की इजाजत नहीं दी जाएगी। पूरे इलाके में खनन प्रतिबंधित होगा। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पूरे इलाके में बाढ़ के उच्चतम बिंदू के सौ मीटर दूरी चिन्हित करने की कवायद शुरू कर दी है। 

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गंगा एवं यमुना की तर्ज पर एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने बेतवा नदी को भी संरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। बेतवा खास तौर से मानसूनी नदी मानी जाती है लेकिन, नदी के आसपास हो रहे बेतहाशा खनन ने इसकी सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाया। झांसी समेत ललितपुर, जालौन एवं हमीरपुर इलाके में चल रहे अवैध खनन ने नदी के जलीय जीवन को भी खतरे में डाल दिया। 
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इसको देखते हुए एनजीटी ने जल संसाधन विकास विभाग को नदी के दोनों किनारे के सौ-सौ मीटर दूरी तक फ्लड प्लेन जोन तय करने के निर्देश दिए। जिससे नदी को सुरक्षित किया जा सके। इसके लिए महकमे ने सर्वे आरंभ कराया है। 
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सिंचाई विभाग के अभियंताओं के मुताबिक इसके लिए चार खंड बनाए गए हैं। राजघाट बांध से ढुकवां जलाशय, ढुकवां जलाशय से एरच बांध, एरच बांध से उरई-राठ राजकीय मार्ग क्रासिंग एवं उरई-राठ राजकीय मार्ग क्रासिंग से बेतवा-यमुना संगम स्थल हमीरपुर के बीच सर्वे होगा। सर्वे में इस पूरी दूरी के बीच अधिकतम बाढ़ बिंदू तय होगा। 

सीमा निर्धारित होने के बाद इसी दूरी के बीच किसी भी प्रकार के निर्माण, अतिक्रमण, व्यावसायिक गतिविधि, पट्टे नीलामी एवं प्रदूषण संबंधी किसी भी गतिविधि को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता मो.फरीद के मुताबिक सीमा तय होने के बाद दोनों किनारे पर खंबे भी गाड़े जाएंगे।

 खनन के नहीं होंगे पट्टे 
बेतवा के किनारे सौ मीटर में किसी भी तरह की गतिविधियों की इजाजत न होने पर सबसे बड़ी चपत खनन उद्योग को लगेगी। झांसी मंडल समेत हमीरपुर में करीब एक हजार करोड़ रुपये का सलाना खनन कारोबार है। नदी के किनारे का पूरा इलाका प्रतिबंधित होने के बाद इसका पट्टा भी नहीं हो सकेगा। एनजीटी की पहरेदारी होने की वजह से इस उद्योग को भारी चपत लग सकती है। 


बाढ़ से होने वालों को नहीं मिलेगा मुआवजा
बेतवा के बाढ़ बिंदू का उच्चतम स्तर चिन्हित होने के बाद अगर कोई घर अथवा निर्माण इसके भीतर पाया जाता है तब इससे होने वाले नुकसान के लिए प्रशासन उत्तरदायी नहीं होगा। बाढ़ से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अभी तक बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता था लेकिन, इसके बाद बाढ़ पीड़ितों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।

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