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सुसाइड से पहले एक लड़की को भेजा लव यू मेसेज
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झांसी। सुसाइड से पहले अपने आखिरी मेसेज में कौस्तुभ ने एक लड़की को लव यू लिखकर भेजा। जब पड़ताल के लिए पुलिस आठवीं मंजिल स्थित सुसाइड प्वांइट पर पहुंची तब वहां कौस्तुभ का मोबाइल फोन रखा हुआ था। फोन उस समय स्विच ऑफ था। पुलिस ने मोबाइल को ऑन करने के बाद उसकी कॉल हिस्ट्री समेत सोशल मीडिया प्रोफाइल की पड़ताल की। कॉल हिस्ट्री चेक करने पर मालूम चला कि आखिरी बार उसने अपने पांच दोस्तों से अलग-अलग बात की।
कौस्तुभ ने फ्लैट के बगल में रहने वाले अपने एक दोस्त को आधी रात में जरूरी बात बताने के लिए मेसेज करके आठवीं मंजिल पर आने को कहा लेकिन, वह दोस्त वहां नहीं पहुंचा। कौस्तुभ की मौत के बाद अब यह बात राज ही रह गई कि आखिर कौस्तुभ उसे कौन सी बात बताना चाह रहा था। पुलिस ने उसके व्हाट्सएप चैट भी खंगाला। इसमें कौस्तुभ की एक लड़की से लंबी बातचीत है। बातचीत से मालूम चल रहा कि दोनों एक दूसरे को काफी अच्छे से जानते हैं। लड़की ने कौस्तुभ से उसके दर्द एवं दवाई के बारे में पूछा। उनके चैट में इसी तरह की बातचीत है। सुसाइड से पहले कौस्तुभ ने इसी लड़की को आखिरी बार लव यू लिखकर भेजा था हालांकि पुलिस का कहना है अभी फोन खंगालने के बाद भी यह साफ नहीं हुआ है कि उसने प्रेम प्रसंग के तनाव में आकर सुसाइड किया। फिलहाल उसकी मौत की वजह साफ नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में मालूम चला है कि कौस्तुभ काफी रिजर्व रहता था। वह किसी से जल्दी घुलता मिलता नहीं था। इस वजह से भी उसकी जिंदगी में क्या चल रहा था, यह बात अधिक लोगों को मालूम ही नहीं।
इंस्टाग्राम पर अपने दोस्तों से पूछा, शुड आई जंप
झांसी। कौस्तुभ की इंस्टाग्राम प्रोफाइल बताती है सुसाइड से पहले मानसिक तौर पर वह काफी उधेड़बुन में था। आत्मघाती कदम उठाने से पहले उसने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल के जरिए दोस्तों से पूछा, शुड आई जंप (क्या मैं कूद जाऊं)। कौस्तुभ ने जवाब देने के लिए तीन विकल्प सुझाए। लेकिन, इसमें नहीं का कोई विकल्प नहीं था। तीसरा विकल्प उसने, मर जा कुत्ता का दिया। कौस्तुभ ने यह प्रोफाइल लॉक कर रखी है। सिर्फ इंस्टाग्राम के उसके दोस्त ही इस प्रोफाइल तक पहुंच सकते हैं। इस प्रोफाइल के बारे में उसके माता-पिता को भी नहीं मालूम। कौस्तुभ के दोस्तों का कहना है वह कुछ दिनों से काफी परेशान था लेकिन, परेशानी की वजह उसने किसी को नहीं बताई। उधेड़बुन के चलते ही सुसाइड से पहले करीब चार घंटे तक वह अलग-अलग फ्लोर में टहलता रहा। चौथी मंजिल के अलावा वह पांचवीं मंजिल पर भी काफी देर लॉबी में बैठा रहा। इसके बाद वह सबसे ऊपरी आठवीं मंजिल पर गया। पुलिस का कहना है कि करीब छह माह पहले भी वह सुसाइड की कोशिश कर चुका था।
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रेलिंग के पास फर्श पर लिखा सॉरी
जान देने से पहले करीब चार घंटे तक अलग-अलग समय में कौस्तुभ मोबाइल पर दोस्तों से बात करता रहा। पांचवीं मंजिल पर जब वह मोबाइल पर बात कर रहा था, उसी दौरान उसने रेलिंग के पास नीचे जमीन पर जमी धूल पर सॉरी लिखा। इसके बाद वह नीचे चला गया। पुलिस ने अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जिसमें वह पूरे समय अपने लॉबी में घूमता दिखाई पड़ रहा है।
करीब आधे घंटे तक नहीं हुई शिनाख्त
डिप्टी कमिश्नर राजीव शाक्या रॉयल सिटी में पिछले करीब चार साल से इसी फ्लैट में रह रहे हैं लेकिन, कौस्तुभ की करीब आधे घंटे तक शिनाख्त ही नहीं हो सकी। सुरक्षा गार्ड भी उसे नहीं पहचान सके। सुरक्षा गार्डों ने आसपास के कई घरों की घंटी बजाई लेकिन, भोर करीब पौने चार बजे का मामला होने के नाते कई घरों के दरवाजे नहीं खुले। जिन घरों से लोग बाहर निकले, वह कौस्तुभ को पहचान नहीं सके। आधे घंटे तक कोई भी यह नहीं समझ सका कि यह डिप्टी कमिश्नर का बेटा है। करीब सवा चार बजे एक महिला ने उसकी शिनाख्त की।
शाक्या परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बुधवार को ही कौस्तुभ की मां के भतीजे की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी। इसमें शामिल होने के लिए ही राजीव एवं संतोषी दिल्ली जा रहे थे, लेकिन, दिल्ली पहुंचने से पहले ही यहां हादसा हो गया। इसके बाद वह लोग तुरंत झांसी लौट आए। कुछ माह पहले संतोषी की बहन की भी मौत हो चुकी। परिवार में कुछ महीने के भीतर यह तीसरी मौत है।
मां का दर्द, बिना कुछ कहे उसका बिट्टू क्यूं चला गया
मां संतोषी ने जैसे ही बेटे का शव देखा वह गश खाकर बेहोश हो गई। मां को होश ही नहीं आ रहा था। थोड़ी देर के लिए होश आता, तो वह सिर्फ बिट्टू (कौस्तुभ) को खोजती। रोते हुए बार-बार कह रही थी, बिट्टू ऐसा क्यूं किया। कुछ कहा क्यूं नहीं मुझसे। छोटी बहन भी मां से लिपटकर सिर्फ रोती जा रही थी। सुबह से वह अपने भाई को खोज रही थी लेकिन, उसे किसी ने कुछ नहीं बताया था। जब मां-पिता वापस लौटकर आए तब उसकी बहन को यह बात बताई गई। उसके बाद से बहन भी रो-रोकर बदहवास हो गई। राजीव का पूरा परिवार इटावा में रहता है। उनका छोटे भाई इटावा में सेवायोजन कार्यालय में तैनात हैं। दोपहर करीब डेढ़ बजे तक पूरा परिवार यहां आ गया। शव देखकर पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पिता राजीव को किसी तरह उनके सहकर्मियों ने संभाला। जीएसटी दफ्तर से भी तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी हादसे की बात सुनकर वहां पहुंच गए थे।
झांसी में किया गया अंतिम संस्कार
शव को पहले अंतिम संस्कार के लिए इटावा ले जाने की बात तय हुई लेकिन, पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने परामर्श करके झांसी स्थित मुक्तिधाम में ही उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
मोबाइल गेमिंग का शौकीन था कौस्तुभ
परिजनों का कहना है कि कौस्तुभ मोबाइल गेमिंग का खासा शौकीन था। पबजी से लेकर तमाम मोबाइल गेम में वह काफी महारत रखता था। उसने अपने कमरे की दीवारों पर भी पबजी एवं मोबाइल गेमिंग से जुड़े पोस्टर लगाए थे हालांकि बारहवीं में आने की वजह से अब उसके पढ़ाई का भी दबाव था।
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कौस्तुभ ने फ्लैट के बगल में रहने वाले अपने एक दोस्त को आधी रात में जरूरी बात बताने के लिए मेसेज करके आठवीं मंजिल पर आने को कहा लेकिन, वह दोस्त वहां नहीं पहुंचा। कौस्तुभ की मौत के बाद अब यह बात राज ही रह गई कि आखिर कौस्तुभ उसे कौन सी बात बताना चाह रहा था। पुलिस ने उसके व्हाट्सएप चैट भी खंगाला। इसमें कौस्तुभ की एक लड़की से लंबी बातचीत है। बातचीत से मालूम चल रहा कि दोनों एक दूसरे को काफी अच्छे से जानते हैं। लड़की ने कौस्तुभ से उसके दर्द एवं दवाई के बारे में पूछा। उनके चैट में इसी तरह की बातचीत है। सुसाइड से पहले कौस्तुभ ने इसी लड़की को आखिरी बार लव यू लिखकर भेजा था हालांकि पुलिस का कहना है अभी फोन खंगालने के बाद भी यह साफ नहीं हुआ है कि उसने प्रेम प्रसंग के तनाव में आकर सुसाइड किया। फिलहाल उसकी मौत की वजह साफ नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में मालूम चला है कि कौस्तुभ काफी रिजर्व रहता था। वह किसी से जल्दी घुलता मिलता नहीं था। इस वजह से भी उसकी जिंदगी में क्या चल रहा था, यह बात अधिक लोगों को मालूम ही नहीं।
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इंस्टाग्राम पर अपने दोस्तों से पूछा, शुड आई जंप
झांसी। कौस्तुभ की इंस्टाग्राम प्रोफाइल बताती है सुसाइड से पहले मानसिक तौर पर वह काफी उधेड़बुन में था। आत्मघाती कदम उठाने से पहले उसने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल के जरिए दोस्तों से पूछा, शुड आई जंप (क्या मैं कूद जाऊं)। कौस्तुभ ने जवाब देने के लिए तीन विकल्प सुझाए। लेकिन, इसमें नहीं का कोई विकल्प नहीं था। तीसरा विकल्प उसने, मर जा कुत्ता का दिया। कौस्तुभ ने यह प्रोफाइल लॉक कर रखी है। सिर्फ इंस्टाग्राम के उसके दोस्त ही इस प्रोफाइल तक पहुंच सकते हैं। इस प्रोफाइल के बारे में उसके माता-पिता को भी नहीं मालूम। कौस्तुभ के दोस्तों का कहना है वह कुछ दिनों से काफी परेशान था लेकिन, परेशानी की वजह उसने किसी को नहीं बताई। उधेड़बुन के चलते ही सुसाइड से पहले करीब चार घंटे तक वह अलग-अलग फ्लोर में टहलता रहा। चौथी मंजिल के अलावा वह पांचवीं मंजिल पर भी काफी देर लॉबी में बैठा रहा। इसके बाद वह सबसे ऊपरी आठवीं मंजिल पर गया। पुलिस का कहना है कि करीब छह माह पहले भी वह सुसाइड की कोशिश कर चुका था।
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रेलिंग के पास फर्श पर लिखा सॉरी
जान देने से पहले करीब चार घंटे तक अलग-अलग समय में कौस्तुभ मोबाइल पर दोस्तों से बात करता रहा। पांचवीं मंजिल पर जब वह मोबाइल पर बात कर रहा था, उसी दौरान उसने रेलिंग के पास नीचे जमीन पर जमी धूल पर सॉरी लिखा। इसके बाद वह नीचे चला गया। पुलिस ने अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जिसमें वह पूरे समय अपने लॉबी में घूमता दिखाई पड़ रहा है।
करीब आधे घंटे तक नहीं हुई शिनाख्त
डिप्टी कमिश्नर राजीव शाक्या रॉयल सिटी में पिछले करीब चार साल से इसी फ्लैट में रह रहे हैं लेकिन, कौस्तुभ की करीब आधे घंटे तक शिनाख्त ही नहीं हो सकी। सुरक्षा गार्ड भी उसे नहीं पहचान सके। सुरक्षा गार्डों ने आसपास के कई घरों की घंटी बजाई लेकिन, भोर करीब पौने चार बजे का मामला होने के नाते कई घरों के दरवाजे नहीं खुले। जिन घरों से लोग बाहर निकले, वह कौस्तुभ को पहचान नहीं सके। आधे घंटे तक कोई भी यह नहीं समझ सका कि यह डिप्टी कमिश्नर का बेटा है। करीब सवा चार बजे एक महिला ने उसकी शिनाख्त की।
शाक्या परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बुधवार को ही कौस्तुभ की मां के भतीजे की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी। इसमें शामिल होने के लिए ही राजीव एवं संतोषी दिल्ली जा रहे थे, लेकिन, दिल्ली पहुंचने से पहले ही यहां हादसा हो गया। इसके बाद वह लोग तुरंत झांसी लौट आए। कुछ माह पहले संतोषी की बहन की भी मौत हो चुकी। परिवार में कुछ महीने के भीतर यह तीसरी मौत है।
मां का दर्द, बिना कुछ कहे उसका बिट्टू क्यूं चला गया
मां संतोषी ने जैसे ही बेटे का शव देखा वह गश खाकर बेहोश हो गई। मां को होश ही नहीं आ रहा था। थोड़ी देर के लिए होश आता, तो वह सिर्फ बिट्टू (कौस्तुभ) को खोजती। रोते हुए बार-बार कह रही थी, बिट्टू ऐसा क्यूं किया। कुछ कहा क्यूं नहीं मुझसे। छोटी बहन भी मां से लिपटकर सिर्फ रोती जा रही थी। सुबह से वह अपने भाई को खोज रही थी लेकिन, उसे किसी ने कुछ नहीं बताया था। जब मां-पिता वापस लौटकर आए तब उसकी बहन को यह बात बताई गई। उसके बाद से बहन भी रो-रोकर बदहवास हो गई। राजीव का पूरा परिवार इटावा में रहता है। उनका छोटे भाई इटावा में सेवायोजन कार्यालय में तैनात हैं। दोपहर करीब डेढ़ बजे तक पूरा परिवार यहां आ गया। शव देखकर पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पिता राजीव को किसी तरह उनके सहकर्मियों ने संभाला। जीएसटी दफ्तर से भी तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी हादसे की बात सुनकर वहां पहुंच गए थे।
झांसी में किया गया अंतिम संस्कार
शव को पहले अंतिम संस्कार के लिए इटावा ले जाने की बात तय हुई लेकिन, पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने परामर्श करके झांसी स्थित मुक्तिधाम में ही उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
मोबाइल गेमिंग का शौकीन था कौस्तुभ
परिजनों का कहना है कि कौस्तुभ मोबाइल गेमिंग का खासा शौकीन था। पबजी से लेकर तमाम मोबाइल गेम में वह काफी महारत रखता था। उसने अपने कमरे की दीवारों पर भी पबजी एवं मोबाइल गेमिंग से जुड़े पोस्टर लगाए थे हालांकि बारहवीं में आने की वजह से अब उसके पढ़ाई का भी दबाव था।