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तनाव में तो नहीं बच्चे, हर गतिविधि पर नजर रखें अभिभावक
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तनाव में तो नहीं बच्चे, हर गतिविधि पर नजर रखें अभिभावक
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्रा मान्या तिवारी की आत्महत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। होनहार छात्रा के इस तरह अपनी जिंदगी खत्म करने से अभिभावक भी परेशान हैं। इस घटना के बारे में कई मनोवैज्ञानिकों से भी बात की गई। उनका कहना है कि आज कल बच्चों पर पढ़ाई का बोझ ज्यादा है। हॉस्टल में छात्र-छात्राएं अभिभावकों से अलग रहते हैं। इसलिए उनकी गतिविधियों पर कोई नजर नहीं रख पाता। किसी तरह का तनाव होने पर वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। इसलिए बाहर रहने वाले बच्चों से भी अभिभावक फोन पर बात करते रहें। उनसे उनकी गतिविधियां जानते रहें। ताकि बच्चे तनाव में न आ पाएं। उन पर किसी तरह का दबाव भी न डालें।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कानपुर की एमबीबीएस छात्रा मान्या तिवारी (19) ने मंगलवार सुबह इमरजेंसी के सामने बने पांच मंजिला सुपर स्पेशियलिटी भवन से कूदकर जान दे दी थी। छात्रा ने पेपर खराब होने पर तनाव में आकर यह कदम उठाया था। इस घटना से कॉलेेज प्रशासन के साथ अभिभावक भी चिंतित हैं। जबकि मान्या पढ़ाई में काफी होशियार थी। बिना कोचिंग के ही उसका एमबीबीएस में चयन हो गया था। इतना ही नहीं उसने आईआईटी प्री की भी परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन लक्ष्य उसका चिकित्सक बनना था। इसीलिए मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ले लिया था। इतनी होशियार होने के बाद भी उसका तनाव में आकर आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाना कई सवाल खड़े करता है।
क्षमताएं जानने की कोशिश करें
छात्रा काफी होशियार थी जिस छात्रा का बिना कोचिंग पढ़े एमबीबीएस मेें चयन हो गया हो, उसकी पढ़ाई पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उसका अच्छा परिवार था, पिता कानपुर आईआईटी में प्रोफेसर हैं। ऐसे में सफलता पाना भी उसका उद्देश्य रहा। पढ़ाई के दौरान उद्देश्य से भटक गई होगी। भले ही उसके भटकाव का कारण अज्ञात है। अज्ञात घटनाएं प्रमाणित करती हैं कि समाज में समायोजन की स्थिति और दूसरी तरफ अति महत्वाकांक्षी होने की स्थिति है। इनमें से एक स्थिति के चलते छात्रा ने यह कदम उठाया है।
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डॉ. जितेंद्र तिवारी, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, बुंदेलखंड महाविद्यालय
छात्र-छात्राओं के संपर्क में रहें
नियमित रूप से पढ़ाई के तनाव से जूझ रहे छात्रों से उनकी मुलाकात होती रहती है। उनका कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान सहयोगात्मक रवैया रखना चाहिए। बाहर शहरों में पढ़ाई करने वाले बच्चों पर माता - पिता को ध्यान देना चाहिए। रोज फोन के जरिये संपर्क करें। उनसे खाने पीने से लेकर हर गतिविधियों की जानकारी लें। समय- समय के भीतर उनसे मिलते - जुलते भी रहें। माता - पिता हर समय बच्चों से दोस्ताना व्यवहार करें, ताकि झिझक खोलकर वह सीधे बात कर सकें।
डॉ. अमन किशोर, मनोचिकित्सक
तनाव से रहें मुक्त
छात्र - छात्राओं को पढ़ाई के साथ - साथ हर एक घंटे का ब्रेक लेना जरूरी है।
ब्रेक टाइम में अपनी पसंदीदा ऐसी एक्टिविटी करें, जिससे मन को आराम मिले। जैसे लाइट म्यूजिक सुनना, जोक्स पढ़ना, दोस्तों से बात करना आदि।
हो सके तो ग्रुप में पढ़ाई की जाए ताकि किसी भी प्रकार का तनाव होने पर आप अकेला महसूस न कर सकें।
टॉपिक्स को रटने की जगह उनको समझने का ज्यादा प्रयास किया जाए।
परीक्षा के तनाव से ऐसे बचें
सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होने वाला है। सोचते रहने से तनाव और बढ़ेगा, जिसका असर बच्चों की परीक्षा के परिणामों पर पड़ेगा, इसलिए सोचना छोड़ें और पढ़ना शुरू करें। उन विषयों पर ध्यान दें, जिनमें उनको ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। वह यह जरूर देखें कि कौन से विषय या अध्याय में उनको पढ़ने की जरूरत है, इन पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जाए। समय के अनुसार पढ़ना शुरू करें और बीच - बीच में ब्रेक जरूर लें।
तनाव के कुछ लक्षण
अभिभावक बच्चोें पर हर समय नजर रखें। यदि बच्चों में सांस लेने में परेशानी, पेशियों में खिंचाव, बहुत ज्यादा पसीना आना, दिल की धड़कन बढ़ना, पेट में मरोड़, सिर में दर्द, मुंह सूखना, पेट खराब होना, बेहोशी या चक्कर आना, बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड लगना, नींद न आना, बुरे सपने आना, थकान, भूख में कमी या भूख लगने का समय बदलना, डर, निराशा, अवसाद, चिड़चिड़ापन, हताशा महसूस करना देख तुरंत ध्यान दें।
खानपान का भी ध्यान रखें
लगातार पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राएं खानपान का भी ध्यान रखें। विशेषज्ञों के मुताबिक छात्र-छात्राएं अच्छा आहार लें। अच्छा आहार तनाव से जूझने में मदद करता है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रिफाइंड कार्बोहाईड्रेट, चीनी से युक्त स्नैक्स खाने से तनाव बढ़ता है। इसके बजाए ताजा फल और सब्जियां व अच्छी गुणवत्ता का प्रोटीन तनाव से लड़ने में मदद करता है।
मान्या का सुरक्षित रखा बिसरा
झांसी। मेडिकल कॉलेज मेें आत्महत्या करने वाली एमबीबीएस छात्रा मान्या तिवारी का बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। उसने आत्महत्या की थी, फिर भी बिसरा सुरक्षित रखा गया है। पोस्टमार्टम प्रक्रिया होने के बाद बड़ागांव गेट बाहर मुक्तिधाम में छात्रा का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मंगलवार को घटना की खबर पाकर मृतका के पिता व मां अन्य रिश्तेदार मेडिकल कॉलेज पहुंच गए थे। शव देखकर उनमें कोहराम मच गया था। पोस्टमार्टम प्रक्रिया होने के बाद शव परिजनों के हवाले किया। शव कानपुर न ले जाकर परिजनों ने बड़ागांव गेट बाहर मुक्तिधाम मेें ही अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, मृतका का बिसरा भी सुरक्षित रख लिया गया है।
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्रा मान्या तिवारी की आत्महत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। होनहार छात्रा के इस तरह अपनी जिंदगी खत्म करने से अभिभावक भी परेशान हैं। इस घटना के बारे में कई मनोवैज्ञानिकों से भी बात की गई। उनका कहना है कि आज कल बच्चों पर पढ़ाई का बोझ ज्यादा है। हॉस्टल में छात्र-छात्राएं अभिभावकों से अलग रहते हैं। इसलिए उनकी गतिविधियों पर कोई नजर नहीं रख पाता। किसी तरह का तनाव होने पर वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। इसलिए बाहर रहने वाले बच्चों से भी अभिभावक फोन पर बात करते रहें। उनसे उनकी गतिविधियां जानते रहें। ताकि बच्चे तनाव में न आ पाएं। उन पर किसी तरह का दबाव भी न डालें।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कानपुर की एमबीबीएस छात्रा मान्या तिवारी (19) ने मंगलवार सुबह इमरजेंसी के सामने बने पांच मंजिला सुपर स्पेशियलिटी भवन से कूदकर जान दे दी थी। छात्रा ने पेपर खराब होने पर तनाव में आकर यह कदम उठाया था। इस घटना से कॉलेेज प्रशासन के साथ अभिभावक भी चिंतित हैं। जबकि मान्या पढ़ाई में काफी होशियार थी। बिना कोचिंग के ही उसका एमबीबीएस में चयन हो गया था। इतना ही नहीं उसने आईआईटी प्री की भी परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन लक्ष्य उसका चिकित्सक बनना था। इसीलिए मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ले लिया था। इतनी होशियार होने के बाद भी उसका तनाव में आकर आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाना कई सवाल खड़े करता है।
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क्षमताएं जानने की कोशिश करें
छात्रा काफी होशियार थी जिस छात्रा का बिना कोचिंग पढ़े एमबीबीएस मेें चयन हो गया हो, उसकी पढ़ाई पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उसका अच्छा परिवार था, पिता कानपुर आईआईटी में प्रोफेसर हैं। ऐसे में सफलता पाना भी उसका उद्देश्य रहा। पढ़ाई के दौरान उद्देश्य से भटक गई होगी। भले ही उसके भटकाव का कारण अज्ञात है। अज्ञात घटनाएं प्रमाणित करती हैं कि समाज में समायोजन की स्थिति और दूसरी तरफ अति महत्वाकांक्षी होने की स्थिति है। इनमें से एक स्थिति के चलते छात्रा ने यह कदम उठाया है।
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डॉ. जितेंद्र तिवारी, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, बुंदेलखंड महाविद्यालय
छात्र-छात्राओं के संपर्क में रहें
नियमित रूप से पढ़ाई के तनाव से जूझ रहे छात्रों से उनकी मुलाकात होती रहती है। उनका कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान सहयोगात्मक रवैया रखना चाहिए। बाहर शहरों में पढ़ाई करने वाले बच्चों पर माता - पिता को ध्यान देना चाहिए। रोज फोन के जरिये संपर्क करें। उनसे खाने पीने से लेकर हर गतिविधियों की जानकारी लें। समय- समय के भीतर उनसे मिलते - जुलते भी रहें। माता - पिता हर समय बच्चों से दोस्ताना व्यवहार करें, ताकि झिझक खोलकर वह सीधे बात कर सकें।
डॉ. अमन किशोर, मनोचिकित्सक
तनाव से रहें मुक्त
छात्र - छात्राओं को पढ़ाई के साथ - साथ हर एक घंटे का ब्रेक लेना जरूरी है।
ब्रेक टाइम में अपनी पसंदीदा ऐसी एक्टिविटी करें, जिससे मन को आराम मिले। जैसे लाइट म्यूजिक सुनना, जोक्स पढ़ना, दोस्तों से बात करना आदि।
हो सके तो ग्रुप में पढ़ाई की जाए ताकि किसी भी प्रकार का तनाव होने पर आप अकेला महसूस न कर सकें।
टॉपिक्स को रटने की जगह उनको समझने का ज्यादा प्रयास किया जाए।
परीक्षा के तनाव से ऐसे बचें
सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होने वाला है। सोचते रहने से तनाव और बढ़ेगा, जिसका असर बच्चों की परीक्षा के परिणामों पर पड़ेगा, इसलिए सोचना छोड़ें और पढ़ना शुरू करें। उन विषयों पर ध्यान दें, जिनमें उनको ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। वह यह जरूर देखें कि कौन से विषय या अध्याय में उनको पढ़ने की जरूरत है, इन पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जाए। समय के अनुसार पढ़ना शुरू करें और बीच - बीच में ब्रेक जरूर लें।
तनाव के कुछ लक्षण
अभिभावक बच्चोें पर हर समय नजर रखें। यदि बच्चों में सांस लेने में परेशानी, पेशियों में खिंचाव, बहुत ज्यादा पसीना आना, दिल की धड़कन बढ़ना, पेट में मरोड़, सिर में दर्द, मुंह सूखना, पेट खराब होना, बेहोशी या चक्कर आना, बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड लगना, नींद न आना, बुरे सपने आना, थकान, भूख में कमी या भूख लगने का समय बदलना, डर, निराशा, अवसाद, चिड़चिड़ापन, हताशा महसूस करना देख तुरंत ध्यान दें।
खानपान का भी ध्यान रखें
लगातार पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राएं खानपान का भी ध्यान रखें। विशेषज्ञों के मुताबिक छात्र-छात्राएं अच्छा आहार लें। अच्छा आहार तनाव से जूझने में मदद करता है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रिफाइंड कार्बोहाईड्रेट, चीनी से युक्त स्नैक्स खाने से तनाव बढ़ता है। इसके बजाए ताजा फल और सब्जियां व अच्छी गुणवत्ता का प्रोटीन तनाव से लड़ने में मदद करता है।
मान्या का सुरक्षित रखा बिसरा
झांसी। मेडिकल कॉलेज मेें आत्महत्या करने वाली एमबीबीएस छात्रा मान्या तिवारी का बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। उसने आत्महत्या की थी, फिर भी बिसरा सुरक्षित रखा गया है। पोस्टमार्टम प्रक्रिया होने के बाद बड़ागांव गेट बाहर मुक्तिधाम में छात्रा का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मंगलवार को घटना की खबर पाकर मृतका के पिता व मां अन्य रिश्तेदार मेडिकल कॉलेज पहुंच गए थे। शव देखकर उनमें कोहराम मच गया था। पोस्टमार्टम प्रक्रिया होने के बाद शव परिजनों के हवाले किया। शव कानपुर न ले जाकर परिजनों ने बड़ागांव गेट बाहर मुक्तिधाम मेें ही अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, मृतका का बिसरा भी सुरक्षित रख लिया गया है।