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पिछले सात साल से झांसी से रूठा है मानसून, नहीं हो रही औसत बरसात
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पिछले सात साल से झांसी से रूठा है मानसून, नहीं हो रही औसत बरसात
झांसी। मानसून झांसी से सात साल से रूठा हुआ है। जुलाई के बीस दिन निकल गए और अब तक एक या दो दिन छोड़ दें तो बरसात नहीं हुई है। ऐसे में एक बार फिर जिला सूखे की ओर बढ़ रहा है। बीते सात सालों में एक दफा भी औसत से आधी बरसात नहीं हुई थी, पिछले साल भी यही हाल रहा था।
झांसी पानी के बड़े संकट से जूझता है। खरीफ तो पूरी तरह से मानसून पर ही निर्भर है, लेकिन मानसून ने खतरे की घंटी बजा दी है। लोग अच्छी बरसात की उम्मीद पाले हैं, लेकिन यदि उम्मीद के मुताबिक बरसात नहीं होती है तो पानी और रसातल में पहुंच जाएगा। हाल ही में अटल भूजल योजना के अंतर्गत मऊरानीपुर और बबीना ब्लाक भूजल के लिहाज से सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल किए गए हैं। यानि इन ब्लाकों में खतरा निकट है। मोंठ के अन्य ब्लाकों की स्थिति भी कमोवेश ठीक नहीं है। हालात चिंताजनक हैं, क्योंकि पिछले सात साल से पानी बहुत कम बरस रहा है। लेकिन, लोग अपनी जरूरत पूरी करने के लिए भूजल का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। भूगर्भ जल विभाग की मानें तो बंगरा, बामौर और गुरसरांय में पानी 12 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच गया है, जबकि सात मीटर से अधिक गहराई में पानी होना खतरे का संकेत माना जाता है।
यह हैं आंकड़े
वर्ष बरसात (मिलीमीटर)
2014-15 542.77
2015-16 470.30
2016-17 561.11
2017-18 391.33
2018-19 710.17
2019-20 562.22
2020-21 402.58
जुलाई में अब तक हुई बरसात
जुलाई में औसत वर्षा 296.4 मिलीमीटर होती है। लेकिन, अब तक 100 मिलीमीटर बरसात हुई है। यानि बीस दिन में औसत वर्षा का एक तिहाई पानी बरसा है।
पानी बनाया नहीं जा सकता है। केवल बचत करके इसे सहेजा जा सकता है। इसके लिए लोगों को पानी की कीमत समझनी होगी और बूंद- बूंद पानी बचाना होगा। तभी हम पानी की कमी से निपट सकते हैं।
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- शशांक शेखर सिंह
सहायक अभियंता
भूगर्भ जल विभाग
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झांसी। मानसून झांसी से सात साल से रूठा हुआ है। जुलाई के बीस दिन निकल गए और अब तक एक या दो दिन छोड़ दें तो बरसात नहीं हुई है। ऐसे में एक बार फिर जिला सूखे की ओर बढ़ रहा है। बीते सात सालों में एक दफा भी औसत से आधी बरसात नहीं हुई थी, पिछले साल भी यही हाल रहा था।
झांसी पानी के बड़े संकट से जूझता है। खरीफ तो पूरी तरह से मानसून पर ही निर्भर है, लेकिन मानसून ने खतरे की घंटी बजा दी है। लोग अच्छी बरसात की उम्मीद पाले हैं, लेकिन यदि उम्मीद के मुताबिक बरसात नहीं होती है तो पानी और रसातल में पहुंच जाएगा। हाल ही में अटल भूजल योजना के अंतर्गत मऊरानीपुर और बबीना ब्लाक भूजल के लिहाज से सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल किए गए हैं। यानि इन ब्लाकों में खतरा निकट है। मोंठ के अन्य ब्लाकों की स्थिति भी कमोवेश ठीक नहीं है। हालात चिंताजनक हैं, क्योंकि पिछले सात साल से पानी बहुत कम बरस रहा है। लेकिन, लोग अपनी जरूरत पूरी करने के लिए भूजल का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। भूगर्भ जल विभाग की मानें तो बंगरा, बामौर और गुरसरांय में पानी 12 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच गया है, जबकि सात मीटर से अधिक गहराई में पानी होना खतरे का संकेत माना जाता है।
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यह हैं आंकड़े
वर्ष बरसात (मिलीमीटर)
2014-15 542.77
2015-16 470.30
2016-17 561.11
2017-18 391.33
2018-19 710.17
2019-20 562.22
2020-21 402.58
जुलाई में अब तक हुई बरसात
जुलाई में औसत वर्षा 296.4 मिलीमीटर होती है। लेकिन, अब तक 100 मिलीमीटर बरसात हुई है। यानि बीस दिन में औसत वर्षा का एक तिहाई पानी बरसा है।
पानी बनाया नहीं जा सकता है। केवल बचत करके इसे सहेजा जा सकता है। इसके लिए लोगों को पानी की कीमत समझनी होगी और बूंद- बूंद पानी बचाना होगा। तभी हम पानी की कमी से निपट सकते हैं।
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- शशांक शेखर सिंह
सहायक अभियंता
भूगर्भ जल विभाग