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आयुर्वेद कॉलेज ने गोद लिए पांच गांव
झांसी/ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2015 12:34 AM IST
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बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज ने जनपद के पांच गांवों को गोद ले लिया है। अब इन गांवों में कॉलेज द्वारा कैंप लगाकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां दी जाएंगी।
गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय की ओर से प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक महाविद्यालयों को गांव गोद लेने हेतु दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इसी क्रम में झांसी के आयुर्वेदिक कॉलेज ने यह पहल की है। कॉलेज प्रवक्ता डा. रामकिशन निरंजन ने बताया कि अंबावाय, सारमऊ, रुद्रकरारी, बाजना, केशवपुर गांवों को कॉलेज द्वारा गोद लिया गया है। मंत्रालय से मिले निर्देशानुसार अब गांवों में समय-समय पर कैंप लगाकर ग्रामीणों को साफ-सफाई, बीमारियों और उनके बचाव के उपाए, ऋतुओं के अनुसार खानपान आदि से संबंधित जानकारियां दी जाएंगी। इसके अलावा जन जागरूकता के लिए पंफ्लेट भी बांटे जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी महीने के अंत में एक गांव में कैंप लगाया जाएगा। कॉलेज प्राचार्य के साथ बैठक कर गांव का चयन जल्द कर लिया जाएगा। इस कार्यक्रम की प्रभारी डा. सुमन श्रीवास्तव को बनाया गया है।
नहीं दिया दवाओं का बजट
आयुष मंत्रालय द्वारा स्वास्थ्य और बीमारियों के प्रति जागरूक करने के लिए गांव गोद लेने की मुहिम भले ही शुरू कर दी गई हो लेकिन बीमारी से ग्रसित मरीजों के उपचार हेतु कोई बजट की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में कैंप में बीमारी से जूझ रहे मरीज का इलाज कॉलेज प्रशासन को अपने यहां आने वाली दवाइयों से करना होगा। इससे कुछ ही मरीजों का भला हो सकेगा।
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गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय की ओर से प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक महाविद्यालयों को गांव गोद लेने हेतु दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इसी क्रम में झांसी के आयुर्वेदिक कॉलेज ने यह पहल की है। कॉलेज प्रवक्ता डा. रामकिशन निरंजन ने बताया कि अंबावाय, सारमऊ, रुद्रकरारी, बाजना, केशवपुर गांवों को कॉलेज द्वारा गोद लिया गया है। मंत्रालय से मिले निर्देशानुसार अब गांवों में समय-समय पर कैंप लगाकर ग्रामीणों को साफ-सफाई, बीमारियों और उनके बचाव के उपाए, ऋतुओं के अनुसार खानपान आदि से संबंधित जानकारियां दी जाएंगी। इसके अलावा जन जागरूकता के लिए पंफ्लेट भी बांटे जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी महीने के अंत में एक गांव में कैंप लगाया जाएगा। कॉलेज प्राचार्य के साथ बैठक कर गांव का चयन जल्द कर लिया जाएगा। इस कार्यक्रम की प्रभारी डा. सुमन श्रीवास्तव को बनाया गया है।
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नहीं दिया दवाओं का बजट
आयुष मंत्रालय द्वारा स्वास्थ्य और बीमारियों के प्रति जागरूक करने के लिए गांव गोद लेने की मुहिम भले ही शुरू कर दी गई हो लेकिन बीमारी से ग्रसित मरीजों के उपचार हेतु कोई बजट की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में कैंप में बीमारी से जूझ रहे मरीज का इलाज कॉलेज प्रशासन को अपने यहां आने वाली दवाइयों से करना होगा। इससे कुछ ही मरीजों का भला हो सकेगा।
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