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डरें नहीं, हर खांसने वाला व्यक्ति कोरोना का शिकार नहीं
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awareness to corona
झांसी। डरिए नहीं, हर खांसने व छींकने वाला व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार खांसी के साथ नाक का बहना और तेज बुखार अगर तीन दिन से अधिक रहता है और इलाज के बाद भी नियंत्रित नहीं होता तब ही कोरोना के लक्षणों की आशंका हो सकती है। कुछ सामान्य सावधानियां बरत कर इस वायरस के प्रकोप से बचा जा सकता है। किडनी, सांस, डायबिटीज, हृदय के रोगियों, बुजुर्गों व ऐसे लोग जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है इसका जल्द शिकार हो सकते हैं।
खांसी आने पर अधिकतर लोग कोरोना वायरस संक्रमित होने का डर पाल रहे हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता का कहना है यह गलत है। इन दिनों सामान्यत: प्रदूषण, फ्लू या वायरल की वजह से भी खांसी, बुखार हो रहा है। अगर खांसी के साथ ही, नाक भी बह रही है लगातार तेज बुखार आ रहा है और इलाज के बाद भी नियंत्रित नहीं हो रहा तब कोरोना के लिहाज से मरीज व चिकित्सक दोनों को विचार करना चाहिए। डॉ. गुप्ता के अनुसार बुजुर्ग, किडनी, हृदय रोगियों, डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी की जरूरत है। जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम है उन्हें जहां तक संभव को घर पर रहकर सावधानी बरतने की जरूरत है।
मेडिकल कॉलेज में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. अमित मोहन वार्ष्णेय के अनुसार जो लोग विदेश होकर लौटे हैं उनमें या उनके संपर्क में आने वाले लोगों में इस संक्रमण की आंशका अधिक रहती है। ऐसे लोगों में खांसी, बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। यह भी बताना चाहिए कि वे कब किस देश से लौटे हैं। आम लोग छोटी-छोटी सावधानियों से खुद का और दूसरों का बचाव कर सकते हैं। अनावश्यक घर से बाहर न जाएं, साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने, ट्रेन, बस, ऑटो में सफर करने से बचें। खांसी, छींक आने पर रूमाल या हाथ की कोहनी वाले हिस्सा मुंह के आगे कर लें। अपने हाथ को दिन में कई बार साबुन से ढंग से धोएं।
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खांसी आने पर अधिकतर लोग कोरोना वायरस संक्रमित होने का डर पाल रहे हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता का कहना है यह गलत है। इन दिनों सामान्यत: प्रदूषण, फ्लू या वायरल की वजह से भी खांसी, बुखार हो रहा है। अगर खांसी के साथ ही, नाक भी बह रही है लगातार तेज बुखार आ रहा है और इलाज के बाद भी नियंत्रित नहीं हो रहा तब कोरोना के लिहाज से मरीज व चिकित्सक दोनों को विचार करना चाहिए। डॉ. गुप्ता के अनुसार बुजुर्ग, किडनी, हृदय रोगियों, डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी की जरूरत है। जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम है उन्हें जहां तक संभव को घर पर रहकर सावधानी बरतने की जरूरत है।
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मेडिकल कॉलेज में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. अमित मोहन वार्ष्णेय के अनुसार जो लोग विदेश होकर लौटे हैं उनमें या उनके संपर्क में आने वाले लोगों में इस संक्रमण की आंशका अधिक रहती है। ऐसे लोगों में खांसी, बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। यह भी बताना चाहिए कि वे कब किस देश से लौटे हैं। आम लोग छोटी-छोटी सावधानियों से खुद का और दूसरों का बचाव कर सकते हैं। अनावश्यक घर से बाहर न जाएं, साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने, ट्रेन, बस, ऑटो में सफर करने से बचें। खांसी, छींक आने पर रूमाल या हाथ की कोहनी वाले हिस्सा मुंह के आगे कर लें। अपने हाथ को दिन में कई बार साबुन से ढंग से धोएं।
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