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अब नहीं चलेगी स्कूल वाहन चालकों की मनमानी
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अब नहीं चलेगी स्कूल वाहन चालकों की मनमानी
झांसी। हादसों का सबब बनने वाली स्कूली वाहनों की तेज रफ्तार पर परिवहन विभाग ने लगाम कसी है। अब बच्चों को ले जाने वाले ऐसे वाहनों में स्पीड गवर्नर लगवाना अनिवार्य होगा। इसके बाद इन वाहनों की रफ्तार ड्राइवर के चाहने पर भी 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं हो सकेगी। जिले के सभी स्कूली वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कई वाहनों में यह उपकरण लगा भी दिए गए हैं।
तेज गति के कारण स्कूली वाहनों द्वारा अकसर होने वाले हादसों को देखते हुए परिवहन विभाग ने सड़क के नियमों को सख्ती से लागू कराने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकारी आंकड़ों में जिले में 380 स्कूली वाहन (बसें व अन्य चार पहिया) हैं। जो कि बच्चों को घर से विद्यालय लाने और ले जाने का कार्य करते हैं। हकीकत में छोटे-बड़े वाहनों की संख्या कहीं अधिक है। परिवहन विभाग वैसे तो वाहन स्वामियों व चालकों से निर्धारित गति से तेज वाहन नहीं चलाने की गारंटी लेता है, लेकिन इसका पालन होता नहीं है। इससे कई बार दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें अधिकांश तेज रफ्तार ही कारण सामने आया है।
हादसों के मद्देनजर महकमे ने स्कूली वाहनों की गति पर अंकुश लगाने के लिए स्पीड गवर्नर लगाने के आदेश दिए थे। एआरटीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी स्कूली वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जाने के निर्देश हैं, जिन पर अमल हो रहा है। अब तक तीन सौै अधिक स्कूली वाहनों में लगाए जा चुके हैं। बिना स्पीड गवर्नर के जनपद में एक भी स्कूली बस नहीं चल सकेगी।
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यह है स्पीड गवर्नर डिवाइस
स्पीड गवर्नर गति नियंत्रण संयंत्र है, जो फ्यूल व गियर से जुड़ा होता है। इस कारण गति नियंत्रण में होती है। यह संयंत्र परिवहन विभाग द्वारा अधिग्रहीत दुकानों पर मिलता है। संयंत्र लगाने के बाद स्कूल संचालक इसकी जानकारी परिवहन विभाग को देते हैं। परिहन विभाग जांच कर अंतिम रूप से स्वीकृत करता है। स्पीड गनर्वर लगाने के बाद वाहन को तय गति से ज्यादा पर नहीं चलाया जा सकता।
छेड़छाड़ की तो फिटनेस होगी निरस्त
जांच के दौरान स्पीड गवर्नर डिवाइस में छेड़छाड़ पाई जाती है, तो वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा वाहनों की विंड स्क्रीन पर वाहन की गति और क्यूआर कोड का वर्णन करने वाला एक स्टीकर भी चस्पा किया जाना आवश्यक है, जो वेदर प्रूफ को प्रदर्शित करेगा। वाहनों में निर्धारित मापदंड के स्पीड गवर्नर लगवाने से वाहनों की गति नियंत्रण में होगी और दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी।
केस-1
पिछले माह इलाइट चौैराहा से गोविंद चौराहा जानेे वाले मार्ग पर एक स्कूल वाहन से गिरकर गाड़ी की चपेट में आकर स्कूली बच्चा घायल हो गया था।
केस-2
बीते सप्ताह तेज रफ्तार भागते समय स्कूली वाहन थाना सीपरी क्षेत्र में आईटीआई के पास पलट गया था।
तीन पहिया वाहनों का हाल बेहाल
भले ही परिवहन विभाग ने चार पहिया स्कूली वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का निर्णय लिया होे, लेकिन अधिकतर स्कूली वाहनों में तिपहिया वाहन लगे हुए हैं, जिनसे बच्चों को ले जाया जाता है। इनमें अधिकांश बच्चे शहर क्षेत्र के हैं, क्योंकि तंग गलियों में चार पहिया वाहन पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसे में यह वाहन मानकों की भी धज्जियां उड़ा रह हैं। कई बार पुलिस व विभाग ने अभियान भी चलाया, लेकिन आज भी ये वाहन बिना मानकों के धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं।
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झांसी। हादसों का सबब बनने वाली स्कूली वाहनों की तेज रफ्तार पर परिवहन विभाग ने लगाम कसी है। अब बच्चों को ले जाने वाले ऐसे वाहनों में स्पीड गवर्नर लगवाना अनिवार्य होगा। इसके बाद इन वाहनों की रफ्तार ड्राइवर के चाहने पर भी 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं हो सकेगी। जिले के सभी स्कूली वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कई वाहनों में यह उपकरण लगा भी दिए गए हैं।
तेज गति के कारण स्कूली वाहनों द्वारा अकसर होने वाले हादसों को देखते हुए परिवहन विभाग ने सड़क के नियमों को सख्ती से लागू कराने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकारी आंकड़ों में जिले में 380 स्कूली वाहन (बसें व अन्य चार पहिया) हैं। जो कि बच्चों को घर से विद्यालय लाने और ले जाने का कार्य करते हैं। हकीकत में छोटे-बड़े वाहनों की संख्या कहीं अधिक है। परिवहन विभाग वैसे तो वाहन स्वामियों व चालकों से निर्धारित गति से तेज वाहन नहीं चलाने की गारंटी लेता है, लेकिन इसका पालन होता नहीं है। इससे कई बार दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें अधिकांश तेज रफ्तार ही कारण सामने आया है।
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हादसों के मद्देनजर महकमे ने स्कूली वाहनों की गति पर अंकुश लगाने के लिए स्पीड गवर्नर लगाने के आदेश दिए थे। एआरटीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी स्कूली वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जाने के निर्देश हैं, जिन पर अमल हो रहा है। अब तक तीन सौै अधिक स्कूली वाहनों में लगाए जा चुके हैं। बिना स्पीड गवर्नर के जनपद में एक भी स्कूली बस नहीं चल सकेगी।
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यह है स्पीड गवर्नर डिवाइस
स्पीड गवर्नर गति नियंत्रण संयंत्र है, जो फ्यूल व गियर से जुड़ा होता है। इस कारण गति नियंत्रण में होती है। यह संयंत्र परिवहन विभाग द्वारा अधिग्रहीत दुकानों पर मिलता है। संयंत्र लगाने के बाद स्कूल संचालक इसकी जानकारी परिवहन विभाग को देते हैं। परिहन विभाग जांच कर अंतिम रूप से स्वीकृत करता है। स्पीड गनर्वर लगाने के बाद वाहन को तय गति से ज्यादा पर नहीं चलाया जा सकता।
छेड़छाड़ की तो फिटनेस होगी निरस्त
जांच के दौरान स्पीड गवर्नर डिवाइस में छेड़छाड़ पाई जाती है, तो वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा वाहनों की विंड स्क्रीन पर वाहन की गति और क्यूआर कोड का वर्णन करने वाला एक स्टीकर भी चस्पा किया जाना आवश्यक है, जो वेदर प्रूफ को प्रदर्शित करेगा। वाहनों में निर्धारित मापदंड के स्पीड गवर्नर लगवाने से वाहनों की गति नियंत्रण में होगी और दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी।
केस-1
पिछले माह इलाइट चौैराहा से गोविंद चौराहा जानेे वाले मार्ग पर एक स्कूल वाहन से गिरकर गाड़ी की चपेट में आकर स्कूली बच्चा घायल हो गया था।
केस-2
बीते सप्ताह तेज रफ्तार भागते समय स्कूली वाहन थाना सीपरी क्षेत्र में आईटीआई के पास पलट गया था।
तीन पहिया वाहनों का हाल बेहाल
भले ही परिवहन विभाग ने चार पहिया स्कूली वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का निर्णय लिया होे, लेकिन अधिकतर स्कूली वाहनों में तिपहिया वाहन लगे हुए हैं, जिनसे बच्चों को ले जाया जाता है। इनमें अधिकांश बच्चे शहर क्षेत्र के हैं, क्योंकि तंग गलियों में चार पहिया वाहन पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसे में यह वाहन मानकों की भी धज्जियां उड़ा रह हैं। कई बार पुलिस व विभाग ने अभियान भी चलाया, लेकिन आज भी ये वाहन बिना मानकों के धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं।