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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कला उत्सव का समापन
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Fri, 06 Oct 2017 01:10 AM IST
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bu jhansi news
- फोटो : amar ujala
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में चल रहे तीन दिवसीय कला उत्सव का समापन हो गया। बृहस्पतिवार को कलाकारों ने सूरदास के भजन गाए और कत्थक नृत्य किया।
राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर के कलाकारों ने डॉ. अंजना झा के निर्देशन में कत्थक नृत्य और गणेश वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद मधुराष्ट्रकम गाकर सामूहिक नृत्य किया। डॉ. अंजना झा ने दस मात्रा में ताल झपताल और जयपुर घराने की बंदिशें पेश की। ताल तीन ताल में राग रागेश्वरी पर आधारित सरगम की प्रस्तुति दी। गोस्वामी तुलसीदास की कृति बादल पर कलाकारों ने सामूहिक नृत्य किया। कलाकारों में संचिता ठाकुर, रेखा दीक्षित, पूजा तिवारी, सृष्टि पाठक, शिवानी, दीपाली शर्मा, रुचि विद्यार्थी, संदीप तिवारी, शीना बाजपेई, विनीता कुशवाहा, दामिनी साल्वी, अनुषा कुसुमवाल, धर्मेंद्र सिंह तोमर, श्यामवीर सिंह कुशवाहा ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
ललित कला विभाग और बुंदेलखंड नाट्य कला समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुए कला उत्सव के समापन कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि कला का उद्देश्य मानव क ी चेतना को जागृत करना है। कला, नृत्य, रंगमंच का उत्सव सीधे ईश्वर से जोड़ता है। कला आध्यात्मिक सुख देती है। इस अवसर पर डॉ. हिमांशु द्विवेदी, प्रो. वीके सहगल, प्रो. वीपी खरे, डॉ. मुन्ना तिवारी, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. सीपी पैन्युली, डॉ. यशोधरा शर्मा, जयराम कुटार, नेहा मिश्रा, सतीश साहनी, डॉ. संतोष पांडेय, डॉ. मुहम्मद नईम मौजूद रहे।
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स्वांग बेटी बचाओ का मंचन
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कलाकारों ने बुंदेली भाषा में बुंदेली लोक नाट्य स्वांग बेटी बचाओ का मंचन किया। इसके जरिए बालिका शिक्षा पर जोर दिया गया। डॉ. हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित नाटक में रवि अहिरवार, अमिताभ पांडेय, पूनम राना, कल्पना धाकड़, सर्वेश खरे, आदित्य मुखिया, वीर सिंह, स्वराज रावत, समरजीत ने अभिनय से लोगों को बांधे रखा।
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राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर के कलाकारों ने डॉ. अंजना झा के निर्देशन में कत्थक नृत्य और गणेश वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद मधुराष्ट्रकम गाकर सामूहिक नृत्य किया। डॉ. अंजना झा ने दस मात्रा में ताल झपताल और जयपुर घराने की बंदिशें पेश की। ताल तीन ताल में राग रागेश्वरी पर आधारित सरगम की प्रस्तुति दी। गोस्वामी तुलसीदास की कृति बादल पर कलाकारों ने सामूहिक नृत्य किया। कलाकारों में संचिता ठाकुर, रेखा दीक्षित, पूजा तिवारी, सृष्टि पाठक, शिवानी, दीपाली शर्मा, रुचि विद्यार्थी, संदीप तिवारी, शीना बाजपेई, विनीता कुशवाहा, दामिनी साल्वी, अनुषा कुसुमवाल, धर्मेंद्र सिंह तोमर, श्यामवीर सिंह कुशवाहा ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
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ललित कला विभाग और बुंदेलखंड नाट्य कला समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुए कला उत्सव के समापन कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि कला का उद्देश्य मानव क ी चेतना को जागृत करना है। कला, नृत्य, रंगमंच का उत्सव सीधे ईश्वर से जोड़ता है। कला आध्यात्मिक सुख देती है। इस अवसर पर डॉ. हिमांशु द्विवेदी, प्रो. वीके सहगल, प्रो. वीपी खरे, डॉ. मुन्ना तिवारी, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. सीपी पैन्युली, डॉ. यशोधरा शर्मा, जयराम कुटार, नेहा मिश्रा, सतीश साहनी, डॉ. संतोष पांडेय, डॉ. मुहम्मद नईम मौजूद रहे।
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स्वांग बेटी बचाओ का मंचन
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कलाकारों ने बुंदेली भाषा में बुंदेली लोक नाट्य स्वांग बेटी बचाओ का मंचन किया। इसके जरिए बालिका शिक्षा पर जोर दिया गया। डॉ. हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित नाटक में रवि अहिरवार, अमिताभ पांडेय, पूनम राना, कल्पना धाकड़, सर्वेश खरे, आदित्य मुखिया, वीर सिंह, स्वराज रावत, समरजीत ने अभिनय से लोगों को बांधे रखा।