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संगीत से कलाकार को मिलता है मोक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Dec 2017 02:47 AM IST
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jhansi news
- फोटो : amar ujala
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भजन गायक अनूप जलोटा ने कहा कि संगीत जीवन के एक साथी की तरह है, जो सुख-दुख में साथ देता है। आनंद का नाम संगीत है। दिलों को राहत और मरहम देने का काम संगीत का है। संगीत में अपनापन होता है, तभी तो चालीस-पचास साल के बाद आज भी वही गाने कर्णप्रिय हैं। संगीत से कलाकार को मोक्ष मिलता है।
शिल्प मेला की भजन संध्या में आए अनूप जलोटा ने ‘अमर उजाला’ के साथ संगीत के महत्व को साझा किया। उन्होंने कहा कि चार पीढ़ियाें से ‘ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन...’ भजन सुना जा रहा है। इससे महसूस होता है कि उनको मोक्ष मिल गया, बल्कि यूं ही कहें कि संगीत से कलाकार को मोक्ष मिलता है, क्योंकि चार अलग-अलग तरह के विचारों की पीढ़ियों को एक ही भजन में बांधना कोई आसान काम नहीं है। पुराने फिल्मी गीत आज भी सुने जा रहे हैं, यही संगीत की ताकत है। उनके लिए झांसी नया नहीं है। 35 साल से झांसी आ रहे हैं। उन्हें तो याद भी नहीं है कि यहां की कितनी यात्रा हो चुकी हैं। एक महीने पहले ही ओरछा में संजय साक्षी की फिल्म ‘आम्रपाली’ की शूटिंग के दौरान एक गाना फिल्माने आए थे, तब झांसी में अपने मित्र के पास कुछ देर के लिए रुके थे। उत्तर प्रदेश का प्रत्येक शहर अपना लगता है, क्योंकि वह शुरूआत के बीस साल लखनऊ में रहे हैं। अब मुंबई में मकान है, लेकिन वहां महीने में पांच या छह दिन के लिए ही रुक पाते हैं।
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शिल्प मेला की भजन संध्या में आए अनूप जलोटा ने ‘अमर उजाला’ के साथ संगीत के महत्व को साझा किया। उन्होंने कहा कि चार पीढ़ियाें से ‘ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन...’ भजन सुना जा रहा है। इससे महसूस होता है कि उनको मोक्ष मिल गया, बल्कि यूं ही कहें कि संगीत से कलाकार को मोक्ष मिलता है, क्योंकि चार अलग-अलग तरह के विचारों की पीढ़ियों को एक ही भजन में बांधना कोई आसान काम नहीं है। पुराने फिल्मी गीत आज भी सुने जा रहे हैं, यही संगीत की ताकत है। उनके लिए झांसी नया नहीं है। 35 साल से झांसी आ रहे हैं। उन्हें तो याद भी नहीं है कि यहां की कितनी यात्रा हो चुकी हैं। एक महीने पहले ही ओरछा में संजय साक्षी की फिल्म ‘आम्रपाली’ की शूटिंग के दौरान एक गाना फिल्माने आए थे, तब झांसी में अपने मित्र के पास कुछ देर के लिए रुके थे। उत्तर प्रदेश का प्रत्येक शहर अपना लगता है, क्योंकि वह शुरूआत के बीस साल लखनऊ में रहे हैं। अब मुंबई में मकान है, लेकिन वहां महीने में पांच या छह दिन के लिए ही रुक पाते हैं।
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